US-Iran Nuclear Talk: ईरान और अमेरिका के बीच अंकारा में होने वाली बैठक अब ओमान में होगी. ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि न्यूक्लियर बातचीत शुक्रवार को ओमान में होगी.
5 February,2026
ईरान और अमेरिका एक टेबल पर बातचीत करने के लिए सहमत हो गए हैं. ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच न्यूक्लियर बातचीत शुक्रवार को ओमान में होगी. पिछले महीने देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों पर तेहरान की खूनी कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी ज़्यादा है. सहमति से पहले यह संकेत मिल रहे थे कि बातचीत के फॉर्मेट और कंटेंट में बदलाव के कारण होने वाली बातचीत में रुकावट आ रही है. शुक्रवार 6 फरवरी को ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची मस्कट में अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के साथ इस डील पर चर्चा करेंगे.
मुस्लिम नेताओं ने ट्रंप से की अपील
बुधवार को, एक क्षेत्रीय अधिकारी ने कहा कि ईरान तुर्की द्वारा प्रस्तावित बैठक से अलग तरह की बैठक चाहता था, जो पूरी तरह से ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम के मुद्दे पर केंद्रित हो, जिसमें केवल ईरान और अमेरिका ही शामिल हों. व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने पुष्टि की कि अमेरिका मूल योजना के अनुसार तुर्की के बजाय ओमान में ईरान के साथ उच्च-स्तरीय बातचीत में हिस्सा लेगा. अधिकारी ने कहा कि कई अरब और मुस्लिम नेताओं ने बुधवार को ट्रंप प्रशासन से आग्रह किया कि वे बातचीत से पीछे न हटें, इसलिए अमेरिका इस बातचीत के लिए सहमत हो गया.
तुर्की में बैठक क्यों नहीं करना चाहता ईरान
तुर्की एक NATO देश है, इसलिए ईरान कोई रिस्क नहीं लेना चाहता. ईरान को तुर्की से किसी मदद की उम्मीद नहीं है. तुर्की ने पहले भी ईरान से अमेरिका के सामने सरेंडर करने के लिए कहा था. ईरान हालात को और खराब नहीं करना चाहता. तुर्की ईरान का दुश्मन देश रहा है. तुर्की ने अरब देशों को भी बातचीत में शामिल होने के लिए बुलाया था. अगर अरब देश बातचीत में शामिल होते, तो समझौते की शर्तें और भी मुश्किल हो सकती थीं. जगह बदलकर ईरान ने यह साफ कर दिया है कि बातचीत मल्टीलेटरल नहीं होगी. ओमान में होने वाली मीटिंग में सिर्फ़ अमेरिका को बुलाया गया है
‘न्यूक्लियर मुद्दों से आगे बढ़ेगी बातचीत’
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि वह परमाणु मुद्दे से परे कई चिंताओं पर चर्चा करेगा, जिसमें ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों, पूरे क्षेत्र में प्रॉक्सी नेटवर्क को समर्थन और “अपने ही लोगों के साथ व्यवहार” पर चर्चा शामिल है. उपराष्ट्रपित जेडी वेंस ने कहा, “यह एक बहुत ही अजीब देश है जिसके साथ कूटनीति करना मुश्किल है.
वेंस ने कहा कि ट्रंप की निचली रेखा यह है कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. ईरान लंबे समय से जोर देता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है. हालांकि, हाल के वर्षों में ईरानी अधिकारियों ने बम बनाने की धमकी देना शुरू कर दिया है. वेंस ने कहा कि उनका मानना है कि ट्रंप “गैर-सैन्य तरीकों से जो कुछ भी कर सकते हैं, उसे पूरा करने के लिए काम करेंगे और अगर उन्हें लगता है कि सैन्य कार्रवाई ही एकमात्र विकल्प है, तो वह आखिरकार उस विकल्प को चुनेंगे.”
News Source: PTI
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