India-US Deal: क्रेमलिन ने बुधवार को कहा कि भारत किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए आज़ाद है और अपने सप्लायर्स में विविधता लाने में कुछ भी नया नहीं है.
5 February, 2026
भारत और अमेरिका के बीच हुई सबसे बड़ी डील पर रूस का पहला रिएक्शन सामने आया है. क्रेमलिन ने बुधवार को कहा कि भारत किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए आज़ाद है और अपने कच्चे तेल सप्लायर्स में विविधता लाने के उसके फैसले में कुछ भी नया नहीं है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, “हम, दूसरे सभी इंटरनेशनल एनर्जी एक्सपर्ट्स की तरह, अच्छी तरह जानते हैं कि रूस भारत को तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का एकमात्र सप्लायर नहीं है. भारत ने हमेशा ये प्रोडक्ट्स दूसरे देशों से खरीदे हैं. इसलिए, हमें इसमें कुछ भी नया नहीं दिखता.”
दोनों के लिए फायदेमंद व्यापार
विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने बुधवार को कहा कि हाइड्रोकार्बन का व्यापार भारत और रूस दोनों के लिए फायदेमंद है. ज़खारोवा ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, “हमें पूरा विश्वास है कि भारत द्वारा रूसी हाइड्रोकार्बन की खरीद दोनों देशों के लिए फायदेमंद है और इंटरनेशनल एनर्जी मार्केट में स्थिरता बनाए रखने में योगदान देती है. हम भारत में अपने पार्टनर्स के साथ इस क्षेत्र में करीबी सहयोग जारी रखने के लिए तैयार हैं.”
हल्के ग्रेड का होता है अमेरिकी तेल
नेशनल एनर्जी सिक्योरिटी फंड के एक प्रमुख एक्सपर्ट इगोर युशकोव ने कहा कि भारतीय रिफाइनर रूसी कच्चे तेल का आयात पूरी तरह से बंद नहीं कर सकते. उन्होंने कहा, “वे जो अमेरिकी शेल तेल एक्सपोर्ट करते हैं, वह हल्के ग्रेड का होता है, जो गैस कंडेनसेट जैसा होता है. दूसरी ओर, रूस भारी सल्फर से भरपूर यूराल तेल सप्लाई करता है. इसका मतलब है कि भारत को अमेरिकी कच्चे तेल को दूसरे ग्रेड के साथ मिलाना होगा, जिसमें अतिरिक्त लागत आएगी, जिसका मतलब है कि सीधा बदलाव संभव नहीं होगा.”
अमेरिका पूरी नहीं कर पाएगा आपूर्ति
एक्सपर्ट ने कहा, “रूस आमतौर पर भारत को हर दिन 1.5 मिलियन से 2 मिलियन बैरल तेल एक्सपोर्ट करता है. अमेरिका उस मात्रा को पूरा नहीं कर पाएगा. इसलिए, ऐसा लगता है कि ट्रंप सिर्फ यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्होंने इन व्यापार वार्ताओं में जीत हासिल की और यह सौदा पूरी तरह से अमेरिकी मांगों के अनुसार हुआ.” बता दें, भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल दूसरे देशों से इंपोर्ट करता है, जिसे बाद में पेट्रोल और डीजल जैसे फ्यूल में रिफाइन किया जाता है. इस इंपोर्टेड तेल का लगभग एक-तिहाई हिस्सा रूस से आता है.
News Source: PTI
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