Chicken Neck Underground Train: चिकन नेक पर फुल कंट्रोल पाने के लिए भारत 40 किलोमीटर अंडरग्राउंड रेलवे ट्रैक बिछाने जा रहा है, जिससे पूर्वोत्तर के राज्यों में कनेक्टिविटी बढ़ेगी.
5 February, 2026
भारत ने चिकन नेक और पूर्वोत्तर राज्यों को सुरक्षित रखने के लिए बड़ा फैसला लिया है. भविष्य के खतरों पर फुल स्टॉप लगाने और चिकन नेक पर अपना फुल कंट्रोल पाने के लिए भारत अब वहां अंडरग्राउंड ट्रेन चलाने जा रहा है. भारत 40 किलोमीटर अंडरग्राउंड रेलवे ट्रैक बिछाने जा रहा है के जरिए पूर्वोत्तर के राज्यों में कनेक्टिविटी बढ़ाएगा. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को घोषणा की है कि पश्चिम बंगाल में सिलिगुड़ी कॉरिडोर के साथ अंडरग्राउंड रेलवे ट्रैक बिछाने की योजना बनाई जा रही है, जो पूर्वोत्तर को बाकी भारत से जोड़ेगा.
क्या है चिकन नेक और क्या है जरूरी?
आपने अक्सर चिकन नेक को लेकर चीन और बांग्लादेश के विवादित बयानों के बारे में सुना होगा. बता दें, सिलिगुड़ी कॉरिडोर को इसके आकार के कारण ‘चिकन नेक’ कहा जाता है. यह उत्तरी पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी इलाके में ज़मीन की एक पट्टी है, जिसकी चौड़ाई 20-22 किलोमीटर तक है. यह पट्टी नेपाल और बांग्लादेश के बीच है, जबकि भूटान और चीन कुछ सौ किलोमीटर दूर हैं. यह चिकन नेक या सिलिगुड़ी कॉरिडोर भारत को उसके 8 पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है. इस इलाके से सड़कें गुज़रती हैं, रेलवे लाइनें हैं, फ्यूल पाइपलाइनें हैं, और मिलिट्री सप्लाई लाइनें भी यहीं से गुज़रती हैं, इसलिए यह भारत के सुरक्षा और रणनीतिक तौर पर बहुत जरूरी है
ऐसे बनेंगे रेलवे ट्रैक
रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “पूर्वोत्तर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले 40 किलोमीटर लंबे रणनीतिक कॉरिडोर के लिए विशेष योजना बनाई जा रही है. अंडरग्राउंड रेलवे ट्रैक बिछाने और मौजूदा ट्रैक को चार-लाइन बनाने की योजना चल रही है.” जानकारी देते हुए, नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) के जनरल मैनेजर चेतन कुमार श्रीवास्तव और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी हितेंद्र गोयल ने कहा कि अंडरग्राउंड लाइनें पश्चिम बंगाल में टिन माइल हाट और रंगपानी रेलवे स्टेशनों के बीच होंगी. यह अंडरग्राउंड हिस्सा सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है.
एक लाइन पश्चिम बंगाल के बागडोगरा की ओर जाएगी, जो देश की हवाई रक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण है. श्रीवास्तव ने कहा कि पटरियां मैदानी इलाके में ज़मीन से करीब 20-24 मीटर नीचे बिछाई जाएंगी. अंडरग्राउंड ट्रैक के साथ-साथ, इस हिस्से पर मौजूदा डबल लाइन को चार-लाइन में बदला जाएगा. जब ये योजनाएं लागू हो जाएंगी, तो इसका मतलब होगा कि रणनीतिक कॉरिडोर में रेलवे ट्रैक की छह लाइनें होंगी – चार ज़मीन के ऊपर और दो ज़मीन के नीचे.
चीन-बांगलादेश की नजर
पिछले साल असम ने ‘चिकन नेक’ को प्रभावी ढंग से बाईपास करने वाले वैकल्पिक सड़क मार्गों की तलाश को प्राथमिकता देने की बात कही थी, जब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने चीन में एक विवादास्पद बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत के पूर्वोत्तर राज्य ‘लैंडलॉक’ हैं और उनके पास अपने देश के अलावा समुद्र तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है. चीन भी इस पर अपना दबादबा बनाने की कोशिश में जुटा रहता है.
News Source: PTI
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