Double Grahan Sutak Kaal: इस साल फरवरी महीने में ही पहले दो ग्रहण लगने वाले हैं. यहां जानें ग्रहण की तारीख और उनका सूतक काल समय.
5 February, 2026
सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण सिर्फ एक खगोलीय घटना ही नहीं है, बल्कि इसे हिंदू धर्म और ज्योतिष में अशुभ माना जाता है. ग्रहण के दौरान बहुत सी सावधानियां रखनी होती है. हर साल चार ग्रहण लगते हैं- 2 सूर्य ग्रहण और 2 चंद्र ग्रहण. साल 2026 में फरवरी महीने में ही पहले दो ग्रहण लगने वाले हैं, यानी आपको फरवरी में ज्यादा सावधानियां बरतनी होंगी, क्योंकि इस दिन शुभ काम करना वर्जित माना जाता है. चलिए जानते हैं सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण किस दिन लगेंगे और इनका सूतक काल समय क्या है.
चंद्र ग्रहण का सूतक काल

साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को होलिका दहन वाले दिन लगेगा. इस दिन फाल्गुन मास की पूर्णिमा रहेगी. चंद्र ग्रहण भारत में दिखेगा, इसलिए इसका सूतक काल भी भारत में मान्य होगा. भारतीय समय के अनुसार, 3 मार्च को चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगा. यानी चंद्र ग्रहण 3 घंटे 26 मिनट तक रहेगा. वहीं सूतक काल की बात करें तो सूतक काल चंद्र ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लग जाता है. इसलिए 3 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 46 मिनट तक सूतक काल रहेगा.
सूर्य ग्रहण का सूतक काल

साल का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी, 2026 को फाल्गुन महीने की अमावस्या को लगेगा. सूर्य ग्रहण दोपहर 3:26 बजे शुरू होगा और 7:57 बजे तक रहेगा. राहत की बात यह है सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी भारत में मान्य नहीं होगा यानी सूर्य ग्रहण के दिन आपको कोई सावधानी बरतने की जरूरत नहीं है. आप पूजा-पाठ और शुभ काम कर सकते हैं. अगर यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाी देता तो इसका सूतक काल ग्रहण शुरू होने से पहले 12 घंटे पहले शुरू हो जाता.
सूतक काल में बरते सावधानियां
- सूतक लगने के बाद खाना बनाना, भोजन करना, पूजा पाठ करना और कोई शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है.
- सूतक लगने से पहले मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं.
- सूतक के दौरान चाकू का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और यात्रा नहीं करनी चाहिए.
- इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को चांद नहीं देखना चाहिए और घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए.
- तुलसी के पौधे में दैवी लक्ष्मी का वास होता है, इसलिए इसे भी नहीं छूना चाहिए.
- इस समय मानसिक और शारीरिक शुद्धता बनाए रखने के लिए लोग मन में भगवान का नाम लेते हैं.
- हालांकि बच्चों और बुजुर्गो को सूतक नियमों में छूट दी जाती है.
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