Home Latest News & Updates असम राइफल्स होगी और ताकतवर, डॉग स्क्वायड में शामिल होंगे ‘तंगखुल हुई’ और ‘कोम्बाई’ नस्ल के कुत्ते

असम राइफल्स होगी और ताकतवर, डॉग स्क्वायड में शामिल होंगे ‘तंगखुल हुई’ और ‘कोम्बाई’ नस्ल के कुत्ते

by Sanjay Kumar Srivastava
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असम राइफल्स होगी और ताकतवर, डॉग स्क्वायड में शामिल होंगे 'तंगखुल हुई' और 'कोम्बाई' नस्ल के कुत्ते

Assam Rifles: केंद्र सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को बढ़ावा देते हुए असम राइफल्स ने अपने डॉग स्क्वायड में स्वदेशी नस्लों को शामिल करने का निर्णय लिया है.

Assam Rifles: केंद्र सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को बढ़ावा देते हुए असम राइफल्स ने अपने डॉग स्क्वायड में स्वदेशी नस्लों को शामिल करने का निर्णय लिया है. बल के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल आलोक पालेई ने बताया कि प्रयोग के तौर पर मणिपुर की ‘तंगखुल हुई’ नस्ल को पहले ही शामिल किया जा चुका है, जबकि अप्रैल से तमिलनाडु की ‘कोम्बाई’ नस्ल को शामिल करने की योजना है. यह पहल केंद्रीय गृह मंत्रालय के उस निर्देश के बाद शुरू हुई है, जिसमें सुरक्षा बलों के डॉग स्क्वायड में भारतीय नस्लों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया गया था. असम राइफल्स डॉग ट्रेनिंग सेंटर (ARDTC) अब इन स्थानीय नस्लों की क्षमताओं का परीक्षण कर रहा है. स्वदेशी कुत्तों को शामिल करने का उद्देश्य न केवल विदेशी नस्लों पर निर्भरता कम करना है, बल्कि स्थानीय परिवेश और जलवायु के अनुकूल बेहतरीन खोजी कुत्तों को तैयार करना भी है.

सुरक्षा बलों में अब स्वदेशी नस्लों का जलवा

यह कदम अर्धसैनिक बलों के आधुनिकीकरण में स्वदेशीकरण की एक नई मिसाल पेश करेगा. वर्तमान में हमारे पास चार नस्लें हैं – लैब्राडोर, जर्मन शेफर्ड, बेल्जियन मैलिनोइस और तंगखुल हुई. इनमें से हमने 2022 में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में तंगखुल हुई के छह कुत्तों को शामिल किया. ये रोग प्रतिरोधक क्षमता में अत्यधिक सक्षम हैं और सभी नशीले पदार्थों की पहचान में लगे हुए हैं. अधिकारी ने बताया कि तंगखुल हुई नस्ल मणिपुर के उखरुल जिले में पाई जाती है और यह एक घरेलू नस्ल है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से शिकार के लिए किया जाता है. कोम्बाई नस्ल के बारे में पालेई ने कहा कि यह तमिलनाडु में पाई जाती है और स्वदेशी नस्ल की मांग के बाद इस प्रकार के कुत्तों को सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में शामिल किया जा रहा है. पहले चरण में हम अप्रैल में कोम्बाई के दो नर और आठ मादा कुत्तों को शामिल करेंगे. पालेई ने कहा कि तंगखुल हुई और कोम्बाई नस्लों को जल्द ही पूरी तरह से शामिल किए जाने की संभावना है.

असम राइफल्स में हैं 253 कुत्ते

उन्होंने कहा कि यह केंद्र असम राइफल्स की एकमात्र सुविधा है. कोम्बाई कुत्तों को भी मार्च 2027 तक एक साथ प्रशिक्षित किया जाएगा. असम राइफल्स में कुत्तों की स्वीकृत संख्या 344 है, लेकिन वर्तमान में उसके पास 253 कुत्ते हैं. लेफ्टिनेंट कर्नल ने बताया कि ये कुत्ते पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर के विभिन्न बटालियनों में तैनात हैं. उन्होंने कहा कि असम राइफल्स के पास वर्तमान में 1,200 से अधिक प्रशिक्षित डॉग हैंडलर हैं, जबकि प्रत्येक कुत्ते की देखभाल और रखरखाव के लिए 9-10 लोगों की आवश्यकता होती है. पालेई ने बताया कि जोरहाट जिले में असम राइफल्स डॉग ट्रेनिंग सेंटर में 104 कुत्ते और 174 हैंडलर हैं, जो प्रशिक्षण के विभिन्न चरणों में हैं. जब उनसे किसी ऐसे बड़े ऑपरेशन के बारे में पूछा गया जिसमें डॉग स्क्वाड की महत्वपूर्ण भूमिका रही हो, तो उन्होंने कहा कि म्यांमार से तस्करी किए गए मादक पदार्थों का एक बड़ा जखीरा सितंबर 2025 में पूर्वोत्तर राज्य में उनकी डॉग यूनिट की बदौलत जब्त किया गया था.

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News Source: Press Trust of India (PTI)

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