Vijaypat Singhania : विजयपत सिंघानिया अब इस दुनिया में नहीं रहे. वह अपने पीछे इस दुनिया में रेमंड ग्रुप जैसा साम्राज्य के अलावा एक लीगेसी भी छोड़कर गए हैं. उन्होंने बताया की मेहनत के दम पर एक फैक्ट्री को ग्लोबल स्तर पर भी एक पहचान मिल सकती है.
Vijaypat Singhania : भारतीय बिजनेस के एक बड़े अध्याय का अंत हो गया है. रेमंड ग्रुप फर्श से अर्श तक पहुंचाने वाले विजयपत सिंघानिया का 28 मार्च, 2026 का निधन हो गया. एक समय 12 हजार करोड़ की संपत्ति के मालिक रहे सिंघानिया की कहानी जितनी दिलचस्प है और उसके बाद अंतिम दिनों में काफी भावुक करने वाली है. मुंबई के सबसे महंगे और ऊंचे घर में रहने वाले इस शख्स ने बिजनेस की दुनिया को एक अलग दिखाने का काम किया.
कैसा रहा विजपत का सफर?
रेमंड को ग्लोबल स्तर पर ले जाने वाले विजयपत सिंघानिया का दुनिया से जाना भारतीय कॉरपोरेट जगत के लिए यह एक बड़ी क्षति है. 1980 में जब उन्होंने इस ग्रुप की कमान संभाली तो तब वह एक साधारण सी कपड़ा मिल हुआ करती थी. उनकी कड़ी मेहनत और क्रिएटिव सोच की वजह से यह देखते ही देखते दुनिया में सूटिंग फैब्रिक ब्रांड बन गया. उन्होंने केवल अपने ग्रुप को ऊनी कपड़ों तक सीमित नहीं रखा बल्कि सिंथेटिक फैब्रिक और डेनिम के बाजार में एक झंडा गाड़ दिया. इसके अलावा उनकी अगुवाई वाली कंपनी ने इंजीनियरिंग और कंज्यूमर केयर जैसे नए क्षेत्रों में भी विस्तार किया.
टेक्साइल बिजनेस में की महारत हासिल
सिंघानिया ने अपनी मेहनत के दम पर रेमंड को उस मुकाम पर पहुंचाया, जहां पर लोग इस कंपनी में इनवेस्ट करने के लिए तरसने लगे. साथ ही उन्होंने बिजनेस के पारंपरिक मॉडल को छोड़कर हाई-प्रिसिजन इंजीनियरिंग और मॉडर्न रिटेलिंग को अपनाने का काम किया. अब यह ग्रुप न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी कपड़ों के मामलों में जबरदस्त दबदबा रखता है. विजयपत ने जिस ग्रुप में जान डालने का काम किया और आज उसे पूरी दुनिया में बहुत पसंद किया जाता है.
कैसा है उनका परिवार?
विजयपत की कड़ी मेहनत के बदौलत आज उनका परिवार बिजनेस और रसूख की दुनिया का एक बड़ा नाम है. वहीं, विजयपत और पदमपत सिंघानिया दोनों भारत के प्रसिद्ध JK Group के संस्थापक लाला कमलापत सिंघानिया के पोते थे. लाला कमलापत सिंघानिया के तीन बेटे पदमपत, कैलाशपत और लक्ष्मणपत थे. इसमें विजयपत सिंघानिया, कैलाशपत सिंघानिया के पिता थे.
जब सिंघानिया परिवार के बीच में संपत्ति का बंटवारा हुआ तो रेमंड ग्रुप कैलाशपत सिंघानिया के हिस्से में आ गया था और उसके बाद उनके बेटे विजयपत ने एक उद्योग आगे बढ़ाया. दूसरी तरफ पदमपत सिंघानिया ने कानपुर में स्थित जेके संगठन की कमान संभाली. पदमपत को जेके संगठन को ऊंचाईयों पर लेकर जाने का श्रेय दिया जाता है. साथ ही रेमंड ग्रुप को विश्व स्तर पर ले जाने का श्रेय भी विजयपत को जाता है.
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