MS Dhoni : मद्रास हाई कोर्ट ने एक मामले में महेंद्र सिंह धोनी को 10 लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया है. यह पूरा मामला मानहानि से जुड़ा है जिसमें सबूतों को ट्रांसलेट करवाने के लिए ये रकम जमा करवानी है.
MS Dhoni : भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) सीजन में एक बार फिर से मैदान पर दिखने के लिए तैयार हैं. साथ ही उन्होंने इस टूर्नामेंट के लिए तैयारियां भी शुरू कर दी हैं. एक तरफ जहां कैप्टन कूल IPL की तैयारियों में जुट गए हैं तो वहीं, एक पुराने मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने उनको 10 लाख रुपये जमा करने का आदेश दिया है. माही को यह राशि एक सीडी के कंटेंट के ट्रांसक्रिप्शन और ट्रांसलेशन से जुड़े मामले पर देनी है. धोनी की तरफ से दर्ज मानहानि केस में कुछ खास कागजी कार्रवाई का खर्चा उठाने के लिए धोनी को ये निर्देश दिया गया है.
क्या है पूरा मामला?
ये पूरा मामला साल 2013 के IPL मैच फिक्सिंग और सट्टेबाजी कांड से जुड़ा हुआ है. उस दौरान इस कांड में अपना नाम जुड़ने के बाद धोनी ने एक मीडिया कंपनी, एक IPS अधिकारी और अन्य लोगों के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज करवाया था. उसी दौरान से इस मामले में सुनवाई चल रही है और इसको लेकर कोर्ट कार्यवाही कर रही है. अपने मानहानि के मामले में सबूत के तौर पर धोनी ने कई न्यूज शो की सीडी उपलब्ध कराई थी और उसको लेकर अदालत का ये आदेश सामने आया है.
मद्रास हाई कोर्ट की जस्टिस आरएन मंजुला ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि जो भी CD शिकायत कर्ता (MS धोनी) की तरफ जमा करवाई गई है. उससे जुड़ा अनुवाद और ट्रांसक्रिप्शन का काम पूरा किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि ये पूरा कार्य काफी जटिल और लंबा है. साथ ही इस काम के लिए इंटरप्रेटर और टाइपिस्ट की भी जरूरत है. साथ ही 3-4 महीने में (हिंदी न्यूज रिपोर्ट) को ट्रांसलेट और ट्रासक्राइब कर पाएंगे. बताया जा रहा है कि इस पूरे कार्य के लिए 10 लाख रुपये तक का खर्च आएगा और कोर्ट ने धोनी को जमा करने के लिए कहा है.
कब तक जमा करवानी है राशि?
जस्टिस मंजुला ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में शिकायत कर्ता को ही खुद ही यह सारे दस्तावेज जमा करवाने होते हैं. लेकिन इस केस में कुछ खास परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट के आधिकारिक इंटरप्रेटर को लगाना पड़ रहा है. यही वजह है कि इसका सारा खर्च धोनी को ही वहन करना होगा. कोर्ट ने इंटरप्रेटर को निर्देश दिया कि वे मार्च 2026 के तीसरे हफ्ते तक सीडी के सारे कंटेंट ट्रांसक्रिप्शन और अनुवाद पूरा करा लें. साथ ही माही को 10 लाख रुपये 12 मार्च तक कोर्ट के चीफ जस्टिस रिलीफ फंड के खाते में जमा करवाने होंगे. वहीं, मामले की अगली सुनवाई भी 12 मार्च को होगी.
यह भी पढ़ें- ‘वर्ल्ड कप सिर्फ खेलना ही नहीं…’ T20 विश्व कप के बीच रोहित शर्मा ने दिया बड़ा बयान; युवाओं को दिया ये मैसेज
News Source: Press Trust of India (PTI)
