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SC ने ‘घूसखोर पंडत’ के निर्माता नीरज पांडे को फटकारा, समाज को अपमानित न करने की हिदायत

by Sanjay Kumar Srivastava
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SC ने 'घूसखोर पंडत'के निर्माता नीरज पांडे को फटकारा, समाज को अपमानित न करने की हिदायत

Ghooskhor Pandat: सुप्रीम कोर्ट ने ‘घूसखोर पंडत’ मामले पर फिल्म निर्माता व निर्देशक नीरज पांडे को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर समाज के किसी वर्ग को अपमानित नहीं किया जा सकता.

Ghooskhor Pandat: सुप्रीम कोर्ट ने ‘घूसखोर पंडत’ मामले पर फिल्म निर्माता व निर्देशक नीरज पांडे को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर समाज के किसी वर्ग को अपमानित नहीं किया जा सकता. इस बात को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फिल्म निर्माता नीरज पांडे को उनकी फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के शीर्षक को लेकर फटकार लगाई. शीर्ष अदालत मनोज बाजपेयी अभिनीत इस फिल्म की ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज पर रोक लगाने की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की बेंच ने फिल्म के खिलाफ दायर याचिका पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड और पांडे को नोटिस जारी किया.

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की भी है सीमा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह के शीर्षक का इस्तेमाल करके आप समाज के किसी वर्ग को क्यों अपमानित कर रहे हैं? अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक बात है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप किसी को भी अपमानित कर सकते हैं. यह नैतिकता और सार्वजनिक व्यवस्था के खिलाफ है. जब तक आप हमें बदला हुआ शीर्षक नहीं बताते, हम आपको फिल्म रिलीज करने की अनुमति नहीं देंगे. हमने सोचा था कि फिल्म निर्माता, पत्रकार आदि जिम्मेदार लोग हैं. सुप्रीम कोर्ट ने पांडे को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया कि फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ समाज के किसी भी वर्ग को अपमानित नहीं करती है. सुनवाई के दौरान फिल्म निर्माता के वकील ने बताया कि अभी तक नया शीर्षक तय नहीं किया गया है और अदालत को आश्वासन दिया कि यह ऐसा होगा जिससे कोई विवाद नहीं होगा. कोर्ट ने कहा कि आप कहते हैं कि आप इस शीर्षक का इस्तेमाल नहीं करेंगे. हम अनुच्छेद 19(1)(क) के तहत दिए गए अधिकार का पूर्ण सम्मान करते हैं. लेकिन कुछ प्रतिबंध हैं. हम बंधुत्व के पहलू को शामिल करना चाहते हैं. यह संविधान के मूलभूत सिद्धांतों में से एक है. हम इस मामले को बंधुत्व से जोड़ना चाहते हैं.

समाज के प्रति जिम्मेदारी का दिलाया अहसास

पीठ ने टिप्पणी की कि जब समाज में पहले से ही दरारें हैं, तो इस तरह का विभाजन पैदा करने की कोशिश में संयम क्यों नहीं बरता जा सकता? किसी को अपमानित क्यों किया जाए? समाज के एक वर्ग को इस तरह के नाम से अपमानित क्यों किया जाए? जागरूक होना एक बात है, लेकिन जनता को अपमानित करना और इस तरह की अशांति पैदा करना, आप अशांति को और बढ़ा रहे हैं. इस मामले की सुनवाई 19 फरवरी को फिर से होगी. याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म जाति और धर्म आधारित रूढ़िवादिता को बढ़ावा देती है और सार्वजनिक व्यवस्था, सांप्रदायिक सद्भाव और संवैधानिक मूल्यों के लिए खतरा है. पांडे द्वारा निर्मित ‘घूसखोर पंडत’ की घोषणा नेटफ्लिक्स ने हाल ही में मुंबई में एक कार्यक्रम में की थी. इसमें नुसरत भरूचा, साकिब सलीम, अक्षय ओबेरॉय और दिव्या दत्ता भी मुख्य भूमिका में हैं. सुप्रीम कोर्ट ब्राह्मण समाज ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय संगठन सचिव अतुल मिश्रा द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने के निर्देश देने की मांग की गई थी. याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म का शीर्षक और कहानी प्रथम दृष्टया आपत्तिजनक और अपमानजनक हैं, जो ब्राह्मण समुदाय को मानहानिकारक तरीके से चित्रित करते हैं. जनहित याचिका में जाति और धर्म को दर्शाने वाले शब्द ‘पंडत’ के प्रयोग पर आपत्ति जताई गई थी, जबकि ‘घूसखोर’ शब्द रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार का प्रतीक है. नेटफ्लिक्स इंडिया ने मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया किया कि फिल्म का नाम बदला जाएगा.

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News Source: Press Trust of India (PTI)

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