Surya Grahan Mythological Story: सूर्य ग्रहण सिर्फ एक खगोलीय घटना ही नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक पौराणिक कहानी भी है, जो सूर्य और राहु की दुश्मनी से जुड़ी है.
17 February, 2026
आज यानी 17 फरवरी को साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण लगने वाला है. थोड़ी ही देर में सूर्य ग्रहण शूरू हो जाएगा. सूर्य ग्रहण दोपहर 3:26 बजे शुरू होगा और 7:57 बजे तक रहेगा. चंद्रमा जब सूर्य और धरती के बीच में एक सीधी कतार में आ जाता है तब सूर्य ग्रहण लगता है. हालांकि, सूर्य ग्रहण सिर्फ एक खगोलीय घटना ही नहीं है, बल्कि इसे हिंदू धर्म और ज्योतिष में अशुभ माना जाता है. सूर्य ग्रहण के पीछे एक पौराणिक कहानी जुड़ी है. यह कहानी है राहु के बदले की. हर सूर्य ग्रहण के दौरान राहु सूर्य से बदला लेता है. चलिए विस्तार से जानते हैं पूरी कहानी क्या है.

अमृत के लिए हुआ युद्ध
सूर्य और राहु की दुश्मनी समुद्र मंथन और अमृत पान से जुड़ी है. समुद्र मंथन में देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र से अमृत निकाला था. माना जाता है कि इस अमृत को पीने के लिए देवताओं और असुरों के बीच में युद्ध होने लगा. भगवान विष्णु जानते थे कि अगर असुरों ने अमृत पी लिया तो ये अमर हो जाएंगे और सृष्टि में उत्पात मचाएंगे. इसलिए भगवान विष्णु ने असुरों को भ्रमित करने के लिए मोहिनी रूप धारण किया और अमृत बांटने लगे. असुरों में से एक स्वरभानु नाम का असुर था, उसे पता चल गया था कि असुरों के साथ धोखा हो रहा है. स्वरभानु ने भी देवता का रूप धारण किया और देवताओं के बीच में जाकर बैठ गया.
राहु ने छल से पिया अमृत
भगवान विष्णु ने उसे भी अमृत दिया और उसने पी लिया. सूर्य और चंद्रमा ने स्वरभानु को पहचान लिया और भगवान विष्णु को बता दिया. भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से असुर का गला काट दिया, लेकिन तब तक अमृत की बूंद उसके अंदर जा चुकी थी, इसलिए उसकी मृत्यु नहीं हुई. स्वरभानु का सिर और धड़ अलग हो गया. सिर राहु कहलाया और धड़ को केतु कहा गया. सूर्य और चंद्रमा ने भगवान विष्णु को उसके बारे में बताया था, इसलिए राहु सूर्य से बदला लेता है. राहु बार बार सूर्य को निगलने की कोशिश करता है, इसलिए ग्रहण लगता है. राहु केवल सिर है और उसकी शक्तियां सीमित है, इसलिए वह सूर्य को निगल नहीं पाता और कुछ देर बाद सूर्य ग्रहण समाप्त हो जाता है.

आसमान में दिखेगा चमकता घेरा
राहत की बात यह है सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी भारत में मान्य नहीं होगा यानी सूर्य ग्रहण के दिन आपको कोई सावधानी बरतने की जरूरत नहीं है. आप पूजा-पाठ और शुभ काम कर सकते हैं. बता दें, सूर्य ग्रहण इसलिए भी खास है, क्योंकि इसमें ‘रिंग ऑफ फायर’ दिखाई देता है. सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता और उसके चारों ओर एक पीली रिंग दिखाई देती है, जिसे रिंग ऑफ फायर कहा जाता है.
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