Delhi University: दिल्ली विश्वविद्यालय ने परिसर में अशांत माहौल को देखते हुए एक महीने के लिए धरना-प्रदर्शन, सभा और जुलूस पर रोक लगा दी है.
Delhi University: दिल्ली विश्वविद्यालय ने परिसर में अशांत माहौल को देखते हुए एक महीने के लिए धरना-प्रदर्शन, सभा और जुलूस पर रोक लगा दी है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने मंगलवार को जारी आदेश में कहा है कि इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है. प्रशासन ने कहा कि आए दिन हो रहे आंदोलन से पढ़ाई में व्यवधान हो रहा था. यदि कोई आदेश का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने मंगलवार को यातायात अवरोध, सुरक्षा के लिए खतरा और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंकाओं का हवाला देते हुए परिसर में एक महीने के लिए सार्वजनिक सभाओं, जुलूसों, प्रदर्शनों और किसी भी प्रकार के विरोध पर प्रतिबंध लगा दिया.
5 से ज्यादा छात्रों के जुटने पर प्रतिबंध
17 फरवरी को जारी एक आदेश में डीयू के प्रॉक्टर कार्यालय ने कहा कि यह प्रतिबंध इस सूचना के बाद लगाया गया है कि सार्वजनिक सभाएं हिंसक हो सकती हैं और कानून व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं. इसमें सिविल लाइंस के सहायक पुलिस आयुक्त के उस पूर्व निर्देश का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें सार्वजनिक सभाओं, मशालें या इसी तरह की सामग्री ले जाने, नारे लगाने और भाषण देने पर रोक लगाई गई है, जिससे सार्वजनिक शांति या यातायात प्रभावित हो सकता है. डीयू के प्रॉक्टर मनोज कुमार ने कहा कि अतीत में आयोजक अक्सर ऐसे विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने में विफल रहे हैं, जो हिंसक हो गए और व्यापक रूप से फैल गए, जिसके परिणामस्वरूप विश्वविद्यालय परिसर में कानून व्यवस्था बिगड़ गई. आदेश में कहा गया है कि पांच या अधिक व्यक्तियों का एकत्र होना, नारे लगाना और भाषण देना, मशालें, बीकन/टॉर्च आदि सहित किसी भी प्रकार की खतरनाक सामग्री ले जाना प्रतिबंधित है. यह प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू होता है और एक महीने तक प्रभावी रहेगा, जब तक कि इसे पहले वापस नहीं ले लिया जाता.
सभाओं पर भी रोक
हंसराज कॉलेज में अंग्रेजी के एसोसिएट प्रोफेसर और दिल्ली विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद के सदस्य मिथुराज धुसिया ने इस कदम को सख्त प्रतिबंध बताया. यह स्वीकार करते हुए कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण होने चाहिए और विश्वविद्यालय को व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए. धुसिया ने कहा कि सभाओं पर रोक लगाने के लिए यातायात अवरोध का हवाला देना अस्वीकार्य है. धुसिया ने कहा कि क्या प्रशासन नियुक्तियों, नई नीति के कार्यान्वयन, यूजीसी समानता विधेयक और शिक्षकों के हालिया निलंबन जैसे मुद्दों पर हो रहे प्रदर्शनों को रोकने की कोशिश कर रहा है? उन्होंने आदेश को वापस लेने की मांग की. उन्होंने कहा कि प्रॉक्टर का कार्यालय सार्वजनिक सभाओं पर एकतरफा प्रतिबंध नहीं लगा सकता. यह आदेश हाल ही में हुए विवादों के बाद आया है, जहां पिछले सप्ताह दिल्ली पुलिस ने एक विरोध प्रदर्शन के दौरान दो छात्र समूहों के बीच हुई झड़प के बाद दो एफआईआर दर्ज की थी. 12 फरवरी को इतिहासकार इरफान हबीब पर उस समय पानी की बाल्टी फेंकी गई जब वह एक सामाजिक न्याय कार्यक्रम में बोल रहे थे.
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News Source: Press Trust of India (PTI)
