Chayansa village: हरियाणा के पलवल जिले में लगातार हो रही मौत से दहशत का माहौल है. पलवल का छायंसा गांव खौफ के साये में जी रहा है. गांव में 26 जनवरी को शुरू हुआ मौत का सिलसिला अब जाकर थमा है.
Chayansa village: हरियाणा के पलवल जिले में लगातार हो रही मौत से दहशत का माहौल है. पलवल का छायंसा गांव खौफ के साये में जी रहा है. गांव में 26 जनवरी को शुरू हुआ मौत का सिलसिला अब जाकर थमा है. लोगों को अभी तक मौत का कारण समझ में नहीं आया है. गांव में दहशत का आलम ये है कि सडकें सुनसान और हर चेहरे पर खौफ है. गांव के सरपंच मोहम्मद इमारन ने बताया कि कैसे एक बीमारी ने पूरे गांव की सुख शांति को खत्म कर दिया. उन्होंने गांव के पानी को दोषी तो ठहराया. सरपंच ने करीब 20 मौत की बात बताई. जबकि स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि सात मौत ही हुई है. बीमारी से गांव के सुरेश कुमार ने अपनी 10 वर्षीय पुत्री पायल को खोया है. पिता पूरी व्यवस्था को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं और मां का रोते रोते बुरा हाल है. पेशे से बेलदार सुरेश मजदूरी कर परिवार चलाते हैं. उन्होंने बताया कि वे अस्पताल अस्पताल बेटी को लेकर दौड़ते रहे और जब तक डॉक्टरों की नींद टूटी, तब तक बहुत देर हो गयी थी.
मरीजों में तेज बुखार, खांसी, उल्टी के लक्षण
मां ने बताया कि बेटी पायल काफी होनहार थी, लेकिन अचानक आयी इस बीमारी ने बेटी को हमसे छिन लिया. नूर मोहम्मद की अपने घर के बाहर ही किराने की छोटी दुकान है, उन्होंने दो दिन के अन्तराल पर दादी और मां दोनों को खोया. गांव में मौत और बीमारी को लेकर तमाम कयास लगाए जा रहे हैं. गांव में पेयजल आपूर्ति की टंकी में काफी गंदगी दिखी. इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति भी खराब थी. ग्रामीणों ने बताया कि बीमारी के शुरुआती लक्षण में मरीजों में तेज बुखार, खांसी, उल्टी, बदन दर्द और कमजोरी देखी जा रही है. मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में कैंप लगाकर जांच कर रही है. लगातार ग्रामीणों की स्क्रीनिंग की जा रही है.
स्वास्थ्य विभाग ने लिए पानी के नमूने
पलवल के सीएमओ डॉ. सत्येंद्र वशिष्ठ का कहना है कि मौत के हर पहलु पर जांच हो रही है. स्थिति नियंत्रण में है. 11 फ़रवरी के बाद कोई मौत नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि आधिकारिक आंकड़ा सात ही है. कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारण का पूरी तरह से पता चलेगा. गांव से पानी के नमूने भी ले लिए गए हैं, जिसकी जांच चल रही है. पीड़ितों ने प्रशासन से सवाल किया है कि जो जिंदगियां खत्म हुईं, उसका जिम्मेदार कौन और जवाबदेही कैसे तय होगी. ग्रामीणों ने बताया कि नवंबर 2024 के आसपास शुरू आंकड़े फरवरी 2026 तक बढ़कर 18 हो चुके, जिसमें 9 बच्चे शामिल हैं. ग्रामीणों ने पानी की टंकी पर सवाल उठाया. कहा कि टूटी पाइपलाइनों से गंदे पानी की आपूर्ति हो रही है. कहा कि गांव में झोलाछाप डॉक्टरों का राज है. स्वास्थ्य विभाग इन झोलाछापों पर कोई कार्रवाई नहीं करता है.
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