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ऐतिहासिक फैसला: जम्मू-कश्मीर में नियमित होंगे अस्थायी कर्मचारी, 40 साल का संघर्ष होगा खत्म

by Sanjay Kumar Srivastava
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ऐतिहासिक फैसला: जम्मू-कश्मीर में नियमित होंगे 1 लाख अस्थायी कर्मचारी, 40 साल का संघर्ष होगा खत्म

J&K Government: जम्मू और कश्मीर में अस्थायी कर्मचारियों को जल्द ही नियमित किया जाएगा. ये कर्मचारी 40 वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं. यह घोषणा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को विधानसभा में की.

J&K Government: जम्मू और कश्मीर में अस्थायी कर्मचारियों को जल्द ही नियमित किया जाएगा. ये कर्मचारी 40 वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं. यह घोषणा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को विधानसभा में की. उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को कहा कि सरकार 2026 में दैनिक वेतनभोगी, तदर्थ और अन्य अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू करेगी, जबकि वह चालू वर्ष के दौरान लगभग 30,000 रिक्त पदों को भरने के लिए भी काम कर रही है. विधानसभा में अपने विभागों के अनुदानों और कटौती प्रस्तावों पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि दिहाड़ी मजदूरों और अस्थायी श्रमिकों का मुद्दा सभी दलों के सदस्यों द्वारा उठाया गया था. उन्होंने स्वीकार किया कि यह समस्या दशकों से बनी हुई है. उन्होंने कहा कि ये कर्मचारी 20, 30 और यहां तक ​​कि 40 वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं. कोई भी सरकार इस मुद्दे को पूरी तरह से हल नहीं कर पाई है.

मुख्य सचिव की देखरेख में समिति का गठन

उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल के अभिभाषण पर हुई चर्चा के दौरान और बाद में बजट सत्र के दौरान मैंने स्पष्ट रूप से कहा था कि हम इस वर्ष इन कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया को शुरू करेंगे. मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्य सचिव की देखरेख में एक समिति का गठन किया गया है ताकि इस मामले की जांच की जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि बनाई गई कोई भी नीति अदालतों या वित्त विभाग में न अटके. उन्होंने कहा कि समिति की रिपोर्ट आने और पारदर्शी तरीके से जमीनी कार्य पूरा होने के बाद हम सब कुछ जनता के सामने रखेंगे. जल्दबाजी में लिए जाने के किसी भी सुझाव को खारिज करते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि नियमितीकरण रातोंरात नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि मैं उचित तैयारी के बिना केवल कागज़ पर हस्ताक्षर करके इन कर्मचारियों को गुमराह करने को तैयार नहीं हूं.

विभागों में एक लाख से अधिक दिहाड़ी मजदूर

मुख्यमंत्री ने विधानसभा में बताया कि वर्तमान में सरकारी विभागों में एक लाख से अधिक दिहाड़ी मजदूर और आकस्मिक श्रमिक कार्यरत हैं. उन्होंने बताया कि पंजीकृत कार्यबल में 69,696 आकस्मिक श्रमिक, 8,836 दैनिक वेतनभोगी श्रमिक, 8,534 मौसमी श्रमिक, 5,757 खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति सहायक, 2,153 अंशकालिक सफाईकर्मी और अस्पताल विकास कोष के माध्यम से कार्यरत 1,929 व्यक्ति शामिल हैं. उन्होंने कहा कि हमने पद सृजित किए हैं, लेकिन उससे कहीं अधिक पदों पर भर्ती की है. उन्होंने दोहराया कि सरकार का लक्ष्य इस वर्ष नए पद सृजित किए बिना लगभग 30,000 रिक्त पदों को भरना है. उन्होंने सदन को यह भी आश्वासन दिया कि चयन बोर्ड और लोक सेवा आयोग के समन्वय से सभी रिक्तियों को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से भरा जाएगा ताकि उन कानूनी चुनौतियों से बचा जा सके जिनके कारण अतीत में भर्ती प्रक्रिया बाधित हुई थी.

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News Source: Press Trust of India (PTI)

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