Siliguri Violence: पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी शहर में गुरुवार को हिंसा भड़क उठी. सिलीगुड़ी में एक गर्भवती आदिवासी महिला पर हुए हमले को लेकर हजारों लोगों ने विरोध मार्च निकाला.
Siliguri Violence: पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी शहर में गुरुवार को हिंसा भड़क उठी. सिलीगुड़ी में एक गर्भवती आदिवासी महिला पर हुए हमले को लेकर हजारों लोग विरोध मार्च निकाल रहे थे. पुलिस ने जब मार्च रोकने का प्रयास किया तो भीड़ हिंसक हो गई. पुलिस ने उत्तरी बंगाल में राज्य सरकार के शाखा सचिवालय उत्तरकन्या तक मार्च करने का प्रयास कर रहे प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े. पानी की बौछारें की और लाठीचार्ज किया. जिससे कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए. पुलिस ने कहा कि 16 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है. तीन बत्ती मोड़ के पास हुई झड़पों में प्रदर्शनकारियों सहित कई लोग घायल हो गए. भाजपा व आरएसएस समर्थित जनजाति सुरक्षा मंच के सदस्यों ने दिसंबर में फांसीदेवा इलाके में महिला पर हमला करने के आरोपी को मौत की सजा देने की मांग करते हुए ‘उत्तरकन्या अभियान’ का आह्वान किया था. हमले में महिला के बच्चे की मौत हो गई थी. मार्च में जलपाईमोर में डाबग्राम-फुलबाड़ी विधायक शिखा चटर्जी और फांसीदेवा विधायक दुर्गा मुर्मू सहित कई भाजपा नेता शामिल थे. रैली को लेकर पुलिस ने कई बैरिकेड लगाए थे और पानी की बौछारें छोड़ी थीं. समस्या तब शुरू हुई जब प्रदर्शनकारियों ने तीन बत्ती मोड़ पर बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की.
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हाथापाई
प्रदर्शनकारियों ने टायरों में आग लगा दी और लगातार पुलिस बैरिकेड्स को पीछे धकेल दिया, जिसके बाद पुलिस को पहले पानी की बौछार करनी पड़ी और बाद में आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े. अधिकारियों ने कहा कि स्थिति बिगड़ने पर लाठीचार्ज किया गया. पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हाथापाई भी हुई, जिससे व्यस्त चौराहा कुछ देर के लिए युद्ध के मैदान में बदल गया. अंततः मार्च को तितर-बितर कर दिया गया और स्थिति को नियंत्रण में ले लिया गया. चटर्जी ने पुलिस कार्रवाई की तीखी आलोचना की. उन्होंने कहा कि हम आदिवासी समुदाय के सदस्यों के साथ उत्तरकन्या की ओर मार्च कर रहे थे. पुलिस ने हमें रोका और पानी की बौछारें कीं, आंसू गैस छोड़ी और लाठीचार्ज किया. मैं अराजकता में फंस गई थी और सहकर्मियों द्वारा सुरक्षा के लिए खींच लिया गया था. यह अनैतिक और अलोकतांत्रिक है. घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वरिष्ठ टीएमसी नेता और सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब ने कहा कि पुलिस आदिवासियों पर हमले से संबंधित मामले की जांच कर रही है. हम आदिवासी महिला पर हमले की निंदा करते हैं, लेकिन जिस तरह से भाजपा हिंसा भड़का रही है और घटना का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रही है, वह निंदनीय है. कानून को अपना काम करना चाहिए.
पीड़ित परिवार से मिले दार्जिलिंग के सांसद
यह विरोध 23 दिसंबर को फांसीदेवा पुलिस स्टेशन की सीमा के तहत झमकलाल गांव में एक घटना से शुरू हुआ था, जहां एक भूमि विवाद के कारण दो समूहों के बीच विवाद हुआ था. पुलिस के अनुसार, झड़प के दौरान सात महीने की गर्भवती आदिवासी महिला पर हमला करने के आरोप में एक को गिरफ्तार किया गया था. यह आरोप लगाया गया है कि महिला को गंभीर चोटें आईं और 8 जनवरी को समय से पहले बच्चे को जन्म दिया. नवजात शिशु की तीन दिन बाद मौत हो गई. प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की. दार्जिलिंग के सांसद राजू बिस्ता ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और राज्यपाल और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग सहित संवैधानिक अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की. पहले भी आरोप लगे थे कि शिकायतों के बावजूद त्वरित पुलिस कार्रवाई नहीं की गई. गुरुवार की हिंसा ने क्षेत्र में राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है. भाजपा ने राज्य सरकार पर दोषियों को बचाने का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेड तोड़ने और सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने के प्रयास के बाद ही बल का प्रयोग किया गया था. क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.
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News Source: Press Trust of India (PTI)
