Iran Israel Conflict : इजराइल और अमेरिकी हमले के बाद मिडिल ईस्ट में टेंशन बढ़ गई है. ईरान ने भी पलटवार किया और इजराइल पर जमकर मिसाइल दागीं हैं. इसी बीच ईरान ने भी अपने समर्थित संगठन को एक्टिव कर दिया है.
Iran Israel Conflict : अमेरिका और इजराइल के ईरान पर संयुक्त हमले के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है. हालांकि, ईरान ने भी पलटवार किया है और इजराइल पर जमकर मिसाइल बरसाई हैं. खास बात यह है कि इजराइल का सबसे सुरक्षित कवच आयरम डोम को भी तोड़ दिया है. इसी बीच ईरान द्वारा वित्तपोषित संगठन मिलिशिया ग्रुप एक्टिव हो गया है. सशस्त्र गुट मिलिशिया इजराइल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है. गाजा, इराक, यमन और लेबनान इन चारों क्षेत्रों से सक्रिय सशस्त्र गुट इस लड़ाई में ईरान के साथ मिलकर अहम भूमिका निभा रहे हैं.
ईरान के निर्देश पर करते हैं काम
ईरान ने सोमवार को इजराइल और अरब राज्यों पर मिसाइलें दागीं और युद्ध का विस्तार मध्य पूर्व में करने के लिए मिलिशिया को शामिल करने के लिए कहा गया है. इस दौरान इजराइल पर पहले से ही हिजबुल्लाह हमला कर रहा है. दूसरी तरफ मिलिशिया ने भी इजराइल पर हमला कर दिया है. आपको बताते चलें कि शिया मिलिशिया मुख्य रूप से शिया मुस्लिम समुदाय से जुड़ा संगठन है. यह मध्य पूर्व इराक, लेबनान, सीरिया और यमन में एक्टिव हैं. यह ज्यादातर ईरान के निर्देश को मानता है और अगर वह कह दें कि किसी युद्ध के मैदान में जाना है तो यह संगठन मना नहीं करता है. साथ ही इन्हें एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.
आर्थिक मदद देता है ईरान
ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और उसके कुद्स फोर्स शिया मिलिशिया को हथियार सप्लाई करने के साथ आर्थिक मदद देते हैं. इस ग्रुप का मुख्य मकसद अमेरिका, इजराइल और उनके सहयोगियों के खिलाफ लड़ना है. यह संगठन ज्यादातर स्थानीय लड़ाई के दौरान युद्ध के मैदान में शामिल होते हैं.
मिलिशिया समूह मुख्य सक्रिय क्षेत्र
- हिज़्बुल्लाह लेबनान, सीरिया
- हूती यमन
- कताइब हिज़्बुल्लाह इराक, सीरिया
- हरकत अल-नुजबा इराक, सीरिया
- असाइब अहल अल-हक इराक
- हमास फिलिस्तीनी
- पॉपुलर मोबिलाइज़ेशन फोर्सेज़ इराक इराक
क्या होगी अमेरिका से बातचीत
इसी बीच सरकार ने रविवार को संकेत दिया कि वह ईरान के नए नेतृत्व के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं. ईरान के विदेश मंत्री ने पहले सुझाव दिया था कि खाड़ी अरब देशों पर हमलों के बारे में दबाव डाले जाने के बाद सैन्य इकाइयां किसी भी केंद्रीय सरकार के नियंत्रण से स्वतंत्र रूप से कार्य कर रही थीं. इससे पहले तेहरान के लिए मध्यस्थ के रूप में काम किया है. ईरानी नेताओं ने कहा है कि हमलों की शुरुआत के बाद से 200 से अधिक लोग मारे गए हैं, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौत हो गई है.
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