Home Latest News & Updates महिला बिल पर बहस: 543 सीटों पर तुरंत 33% आरक्षण क्यों नहीं? प्रियंका ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

महिला बिल पर बहस: 543 सीटों पर तुरंत 33% आरक्षण क्यों नहीं? प्रियंका ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

by Sanjay Kumar Srivastava
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महिला आरक्षण पर सवाल: 543 सीटों पर तुरंत 33% आरक्षण क्यों नहीं? प्रियंका गांधी ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

Priyanka Gandhi: प्रियंका गांधी ने पूछा कि सरकार लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों पर महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं दे सकती.

Priyanka Gandhi: कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने गुरुवार को लोकसभा में तीखे हमले में कहा कि सरकार ने चुनाव आयोग और न्यायपालिका जैसी संस्थाओं पर दबाव डालकर लोकतंत्र को खत्म करना शुरू कर दिया है. लेकिन अब संविधान संशोधन विधेयक के साथ लोकतंत्र पर एक खुला हमला शुरू किया गया है. महिला कोटा कानून में संशोधन और परिसीमन आयोग के गठन के लिए पेश किए गए तीन विधेयकों पर लोकसभा में बहस में भाग लेते हुए प्रियंका गांधी ने पूछा कि सरकार लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों पर महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं दे सकती.

कहा-लोकतंत्र पर खुला हमला

उन्होंने कहा कि विधेयक लोकसभा सीटों की संख्या 850 तक बढ़ाने की बात करता है, जो 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन आयोग द्वारा किया जाएगा. सतही तौर पर यह ठीक लगता है लेकिन जब कोई इसे ध्यान से पढ़ता है तो वास्तविक अर्थ सामने आता है. इसमें राजनीति की गंध आती है. कांग्रेस नेत्री ने कहा कि बारीक प्रिंट पढ़ने पर पता चलता है कि परिसीमन आयोग के तीन सदस्य राज्यों के भाग्य और संसद में उनके प्रतिनिधित्व का फैसला करेंगे. प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार ने चुनाव आयोग, न्यायपालिका आदि संस्थानों पर दबाव डालकर लोकतंत्र को खत्म करना शुरू कर दिया, लेकिन अब लोकतंत्र पर खुला हमला किया जा रहा है.

बीजेपी पर साधा निशाना

उन्होंने कहा कि अगर यह संविधान संशोधन विधेयक संसद में पारित हो गया तो भारत में लोकतंत्र खत्म हो जाएगा. कांग्रेस सांसद ने विधायी निकायों में महिला आरक्षण के मुद्दे की पृष्ठभूमि भी बताई. उन्होंने कहा कि यह राजीव गांधी ही थे, जो प्रधानमंत्री के रूप में, पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिला आरक्षण के लिए एक विधेयक लाए और आखिरकार कांग्रेस की पीवी नरसिम्हा राव सरकार के दौरान इसके लिए विधेयक पारित किया गया. प्रियंका गांधी ने कहा कि यूपीए के तहत यह राज्यसभा में पारित हो गया था, लेकिन लोकसभा में आम सहमति नहीं बन सकी. 2018 में राहुल गांधी ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर महिला आरक्षण की मांग की. मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के संबोधन से ऐसा लगता है कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी महिला आरक्षण की चैंपियन है.

आरक्षण पर बताया यूपीए की भूमिका

उन्होंने कहा कि कोई भी महिला आपको बताएगी कि महिलाएं उन लोगों को आसानी से पहचान लेती हैं जो उन्हें गुमराह करने की कोशिश करते हैं. उन्होंने भाजपा से सावधान रहने का आग्रह किया. प्रियंका गांधी ने कहा कि 2023 में जब यह कानून पारित हुआ था, तब कांग्रेस ने इसका समर्थन किया था और आज भी कांग्रेस महिला आरक्षण के पुरजोर समर्थन में है. लेकिन सच्चाई यह है कि बहस महिला आरक्षण पर नहीं है. दिल्ली, पुदुचेरी और जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेशों में प्रस्तावित संशोधित महिला कोटा कानून को लागू करने के लिए दो सामान्य विधेयक- परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक भी सदन में पेश किए गए.

ये भी पढ़ेंः मोदी की विपक्ष को चेतावनी: महिला कोटे का विरोध करने वालों को देश की नारी शक्ति नहीं करेगी माफ

News Source: PTI

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