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Nepal में Balendra का स्वैग, पुरानी पार्टियों का सूपड़ा साफ; अब सत्ता की चाबी युवा जोश के हाथ

by Preeti Pal
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Nepal में रैपर Balendra का स्वैग, पुरानी पार्टियों का सूपड़ा साफ; अब सत्ता की चाबी युवा जोश के हाथ

Nepal Election Result: हमारे पड़ोसी देश नेपाल की सियासत में बड़ा बदलाव हो चुका है. दरअसल, 35 साल के रैपर बालेंद्र शाह ने रिकॉर्ड तोड़ जीत हासिल की है.

08 March, 2026

हिमालय की गोद में बसे हमारे पड़ोसी और खूबसूरत देश नेपाल से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है. दरअसल, नेपाल के आम चुनाव में एक बड़ा उलटफेर हुआ है और इस बार जनता ने पुरानी घिसी-पिटी राजनीति को किनारे कर बदलाव को चुना है. फेमस रैपर से पॉलिटीशियन बने 35 साल के बालेंद्र शाह, जिन्हें प्यार से लोग ‘बालेन’ भी कहते हैं, उनकी पार्टी ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ यानी RSP ने नेपाल चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. ये सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि नेपाल की पॉलिटिकल हिस्ट्री में एक नए युग की शुरुआत है.

बालेन का जलवा

इस चुनाव का सबसे बड़ा मुकाबला झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र में देखने को मिला. यहां बालेन का मुकाबला नेपाल के कद्दावर नेता और चार बार प्रधानमंत्री रह चुके केपी शर्मा ओली से था. हालांकि, जब रिजल्ट आया, तो सब हैरान रह गए. बालेन ने ओली को करीब 50,000 वोटों के भारी अंतर से हरा दिया. जहां बालेन को 68,348 वोट मिले, वहीं ओली मात्र 18,734 वोटों पर सिमट गए. इस जीत के साथ ही बालेन नेपाल के संसदीय इतिहास के सबसे यंग प्रधानमंत्री बनने के रास्ते पर हैं और वो देश के पहले मधेसी प्रधानमंत्री भी होंगे.

उड़ गए पुराने दल

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी का प्रदर्शन इतना जबरदस्त रहा कि उसने काठमांडू जिले की सभी 10 सीटों पर क्लीन स्वीप कर दिया. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 129 सीटों में से RSP ने 100 सीटों पर कब्जा जमा लिया है. ये दिखाता है कि नेपाल की जनता, खासकर यंग जेनेरेशन, अब भ्रष्टाचार, नेपोटिज्म और पुराने नेताओं से पूरी तरह ऊब चुकी है. नेपाली कांग्रेस के गगन थापा जैसे यंग चेहरे भी बालेन की पार्टी के उम्मीदवार अमरेश सिंह के सामने अपनी सीट नहीं बचा पाए.

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कैसे मिली जीत?

नेपाल की इस राजनीतिक क्रांति के पीछे कई बड़े कारण हैं. जनता के लिए सबसे बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई और राजनीति में बदलाव था. चुनाव प्रचार के दौरान बालेन ने खुद को ‘मधेस का बेटा’ बताया और उनकी पार्टी का नारा ‘अबकी बार बालेंद्र सरकार’ घर-घर तक पहुंच गया. चुनाव के आखिरी दिन बालेन ने काठमांडू घाटी में जो मेगा रोड-शो किया, उसने माहौल को पूरी तरह बदल दिया और घाटी की सभी 15 सीटें उनकी झोली में डाल दीं.

फ्यूचर की चुनौतियां

पड़ोसी देश नेपाल में इस स्थिरता को लेकर भारत भी काफी गंभीर है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल की जनता को इस सफल चुनाव के लिए बधाई दी और इसे लोकतंत्र की यात्रा का एक गौरवशाली क्षण बताया. उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत एक अच्छे पड़ोसी के नाते नेपाल की नई सरकार के साथ मिलकर शांति और प्रगति के लिए काम करता रहेगा. दिलचस्प बात ये है कि कभी बालेन के धुर विरोधी रहे केपी शर्मा ओली ने भी उन्हें जीत की बधाई दी और उनके 5 साल के सक्सेसफुल कार्यकाल की कामना की.

बदलेंगे नेपाल की किस्मत?

वैसे, बालेन के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं. नेपाल ने पिछले 18 सालों में 14 सरकारें देखी हैं, ऐसे में एक स्थिर सरकार देना उनकी पहली प्राथमिकता होगी. साथ ही, उन्हें ये भी साबित करना होगा कि उनकी सरकार किसी बाहरी शक्ति के दबाव में काम नहीं करेगी और एक स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करेगी. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बालेन की जीत जनता की उस निराशा का परिणाम है जो पुराने सिस्टम से उपजी थी. अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि एक रैपर के तौर पर लोगों का दिल जीतने वाले बालेन, प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठकर देश की तकदीर कैसे बदलते हैं.

News Source: PTI

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