Home Top News SC का बड़ा फैसला: दिल्ली के सुजान सिंह पार्क पर केंद्र सरकार का हक, HC का बेदखली आदेश रद्द

SC का बड़ा फैसला: दिल्ली के सुजान सिंह पार्क पर केंद्र सरकार का हक, HC का बेदखली आदेश रद्द

by Sanjay Kumar Srivastava 22 April 2026, 8:46 PM IST (Updated 23 April 2026, 4:51 PM IST)
22 April 2026, 8:46 PM IST (Updated 23 April 2026, 4:51 PM IST)
SC का बड़ा फैसला: दिल्ली के सुजान सिंह पार्क पर केंद्र सरकार का हक, हाईकोर्ट का बेदखली आदेश रद्द

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें केंद्र सरकार को राजधानी के पॉश इलाके सुजान सिंह पार्क स्थित आवासीय परिसरों को खाली करने का निर्देश दिया गया था.

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें केंद्र सरकार को राजधानी के पॉश इलाके सुजान सिंह पार्क स्थित आवासीय परिसरों को खाली करने का निर्देश दिया गया था. न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस संपत्ति पर केंद्र का कब्जा दिल्ली किराया नियंत्रण (DRC) अधिनियम, 1958 के दायरे में नहीं आता है. अदालत ने सरकारी अनुदान अधिनियम, 1895 की सर्वोच्चता को बरकरार रखते हुए कहा कि यह परिसर 1945 के सरकारी अनुदान की शर्तों पर है.

लीज डीड में नहीं था बेदखली का प्रावधान

पीठ ने फैसला सुनाया कि चूंकि यह संपत्ति DRC अधिनियम के दायरे में नहीं आती, इसलिए अतिरिक्त किराया नियंत्रक (ARC) के पास केंद्र सरकार के खिलाफ बेदखली के मुकदमे पर सुनवाई करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था. न्यायमूर्ति मिश्रा ने फैसला लिखते हुए कहा कि उच्च न्यायालय ने यह मानकर गलती की कि प्रतिवादी के पास अन्य कोई कानूनी उपचार नहीं बचेगा. अदालत ने जोर देकर कहा कि किसी उपचार की उपलब्धता या अनुपस्थिति किसी अदालत के अधिकार क्षेत्र को निर्धारित नहीं कर सकती. अदालत ने नोट किया कि लीज डीड (Lease Deed) में किराए का भुगतान न करने की स्थिति में बेदखली का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था. कानून की स्पष्ट शर्तों के अभाव में मकान मालिक को केंद्र सरकार से परिसर खाली कराने का स्वतः अधिकार नहीं मिल जाता. इस फैसले से सुजान सिंह पार्क के आवासीय परिसर पर केंद्र सरकार का कब्जा फिलहाल सुरक्षित हो गया है.

सरकार का कई फ्लैटों पर है कब्जा

यह मामला 26 अप्रैल, 1945 को काउंसिल में गवर्नर जनरल द्वारा सर सोभा सिंह एंड संस प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में निष्पादित एक स्थायी लीज डीड से जुड़ा है. पट्टे में लगभग 100 आवासीय फ्लैटों के निर्माण के लिए 7.58 एकड़ भूमि शामिल थी. आवंटन पत्र के एक खंड के तहत, केंद्र सरकार ने अपने अधिकारियों को उचित किराए पर पट्टे पर दिए गए 50 प्रतिशत फ्लैटों का अधिकार सुरक्षित रखा. समय के साथ सरकार ने कई फ्लैटों, नौकर क्वार्टरों और गैरेज पर कब्जा कर लिया.

शोभा सिंह एंड संस ने दायर की थी याचिका

1991 में प्रतिवादी सर शोभा सिंह एंड संस ने एक बेदखली याचिका दायर की जिसमें आरोप लगाया गया कि सरकार ने 1989 और 1991 के बीच किराए के भुगतान में चूक की है. अतिरिक्त किराया नियंत्रक (ARC) और किराया नियंत्रण न्यायाधिकरण (RCT) दोनों ने केंद्र के खिलाफ फैसला सुनाया, जिसे बाद में 2020 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुष्टि की. शीर्ष अदालत के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या सरकार का कब्जा डीआरसी अधिनियम या एक संप्रभु व्यवस्था के तहत एक पारंपरिक मकान मालिक-किरायेदार का संबंध था.

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News Source: PTI

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