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भारी रिटर्न का लालच देकर 20,000 करोड़ डकारा, डार्विन लैब्स का संस्थापक गिरफ्तार

by Sanjay Kumar Srivastava
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सावधान! भारी रिटर्न का लालच देकर 20,000 करोड़ डकारा, डार्विन लैब्स का सह-संस्थापक मुंबई से गिरफ्तार

Bitcoin Fraud: CBI ने 20,000 करोड़ रुपये के गेन बिटक्वाइन (Gain Bitcoin) मुद्रा घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक डार्विन लैब्स के सह-संस्थापक आयुष वार्ष्णेय को गिरफ्तार कर लिया है.

Bitcoin Fraud: CBI ने 20,000 करोड़ रुपये के गेन बिटक्वाइन (Gain Bitcoin) मुद्रा घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक डार्विन लैब्स के सह-संस्थापक आयुष वार्ष्णेय को गिरफ्तार कर लिया है. एजेंसी ने वार्ष्णेय के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया था. CBI ने बताया कि सोमवार को उनके देश से भागने के कारण अलर्ट जारी किया गया था. इसके बाद उन्हें मुंबई हवाईअड्डे पर हिरासत में ले लिया गया. सीबीआई के अनुसार, डार्विन लैब्स ने क्रिप्टो करेंसी टोकन की डिजाइन को और विकसित किया, जिसके जरिए 20,000 करोड़ का घोटाला किया गया. इस योजना में निवेशकों को काफी अच्छे रिटर्न का लालच दिया गया था. जांच के दौरान एजेंसी ने डार्विन लैब्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके सह-संस्थापकों वार्ष्णेय, साहिल बाघला और वाओमी एआई के मुख्य पूंजी अधिकारी और संस्थापक निकुंज जैन की संलिप्तता का पता लगाया.

वेबसाइट के जरिए घोटाले को अंजाम

जांच एजेंसी ने बताया कि डार्विन लैब्स ने प्रमुख साइट www.gainbitcoin.com सहित एक वेब के माध्यम से घोटाले में प्रमुख भूमिका निभाई थी. अधिकारियों ने कहा कि इसका मास्टरमाइंड अमित भारद्वाज (अब दिवंगत) और उसका भाई अजय भारद्वाज था. कंपनी ने कई प्रमुख घटक विकसित किए, जिनमें बिटक्वाइन माइनिंग पूल प्लेटफॉर्म GBMiners.com, एक बिटक्वाइन भुगतान गेटवे, कॉइन बैंक बिटक्वाइन वॉलेट और निवेशकों के साथ इंटरफेस करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली गेन बिटक्वाइन वेबसाइट शामिल है. 2015 में लॉन्च किया गया गेन बिटक्वाइन ऑपरेशन को वेरिएबलटेक पीटीई के मुखौटे के तहत छुपाया गया था. इस योजना के जरिए निवेशकों को 18 महीने की अवधि में बिटक्वाइन में प्रति माह 10 प्रतिशत के असाधारण रिटर्न का लालच दिया गया.

पूरे देश में कंपनी के खिलाफ कई एफआईआर

निवेशकों से बाहरी एक्सचेंजों से डिजिटल मुद्रा खरीदने और इसे “क्लाउड माइनिंग” अनुबंधों के माध्यम से गेनबिटकॉइन में जमा करने का आग्रह किया गया. यह योजना एक बहु-स्तरीय विपणन पर आधारित थी. जहां भुगतान नए निवेशकों को लाने पर निर्भर थे. इसके शुरुआती दिनों में निवेशकों को बिटकॉइन में भुगतान प्राप्त हुआ, जिससे एक आकर्षक आय का भ्रम पैदा हुआ. हालांकि, 2017 तक नई पूंजी का प्रवाह कम होने के कारण यह सिलसिला टूटने लगा. केस दर्ज होने के बाद एक बयान में सीबीआई ने कहा कि नुकसान को कवर करने के प्रयास में गेनबिटकॉइन ने एकतरफा भुगतान को अपने इन-हाउस क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया, जिसका मूल्य बिटकॉइन से काफी कम था, जिससे निवेशकों को और अधिक गुमराह किया गया. बड़े पैमाने पर घोटाले को देखते हुए जम्मू-कश्मीर से महाराष्ट्र और दिल्ली से पश्चिम बंगाल तक कई एफआईआर दर्ज की गईं. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी.

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News Source: PTI

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