Iran-US War: ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष ने भारतीय निर्यातकों की कमर तोड़ दी है. समुद्री मार्गों में खतरा बढ़ने से कंटेनर का किराया बढ़ गया है.
Iran-US War: ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष ने भारतीय निर्यातकों की कमर तोड़ दी है. समुद्री मार्गों में खतरा बढ़ने से कंटेनर का किराया बढ़ गया है. मरीन इंश्योरेंस महंगा हो गया है और शिपिंग कंपनियां वॉर चार्जेज वसूल रही हैं. सामान सही सलामत गंतव्य तक पहुंचने की भी चुनौती है. करोड़ों के माल पेटियों में जाने को तैयार पड़े हैं. सवाल ये कि अब इनका क्या होगा. ईरान अमेरिका के बीच चल रहे तनाव का असर भारतीय कारोबार पर भी पड़ रहा है. समुद्री रास्तों पर खतरा बढ़ने की वजह से विदेशों में माल भेजना महंगा हो गया है. कंटेनर का किराया तीन गुना तक बढ़ गया है और इसके साथ-साथ निर्यात होने वाले सामान का बीमा भी काफी महंगा हो गया है.
भारतीय निर्यातकों के सामने संकट
स्ट्रैट ऑफ हॉर्मोज के आसपास से गुजरना सबसे ज्यादा जोखिम भरा सौदा हो गया है. दूसरा रास्ता स्वेज कैनाल का है जहां हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में जहाजों पर किए जा रहे हमलों ने स्वेज नहर के माध्यम से होने वाले वैश्विक व्यापार को भारी नुकसान पहुंचाया है. इन हमलों के कारण बड़ी शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों का मार्ग बदल दिया था, जिससे 2024 में स्वेज नहर के राजस्व में 60% से अधिक की गिरावट आई है यानी दोनों मुख्य जलमार्ग पर बड़ा खतरा है. टेक्सटाइल के बड़े निर्यातक सुशील कुमार ने बताया कि वहां स्थिति वाकई चिंताजनक है. बड़ी बड़ी पेटियों में ऑर्डर के कपड़े तैयार हैं. सभी पर मेक्सिको का पता चिपकाए हुए हैं, मगर सवाल ये कि ये समान पहुंचाएं कैसे जाएं. दूसरे निर्यातक भी ऐसी ही परेशानी से जूझ रहे हैं.
सामान सुरक्षित पहुंचें ये भी तय नहीं
बड़े निर्यातक सामन्थ की गारमेंट फैक्ट्री में तो आधे प्रोडक्ट पैक किए गए हैं और बाकी सैंपल हैंगर में ही हैं. अब इनकी परेशानी अमेरिका अपने ऑर्डर भेजने की है. 13 मार्च को ऑर्डर निकलने की तारीख है मगर भेजें कैसे इन्हें भी नहीं पता है. समुद्री मार्ग अनिश्चित, कई शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों के रास्ते बदल दिए हैं और लंबा रास्ता लेकर जा रहे हैं, जिससे समय भी ज्यादा लग रहा है और खर्च भी बढ़ गया है. सामान सुरक्षित पहुंचें ये भी तय नहीं है. सामन्थ ने कहा कि वायु मार्ग से अगर ये समान भेजे जाएं तो मूल धन भी नहीं निकल पाएगा मुनाफा तो भूल ही जाइए. ऐसे कई निर्यातक हैं जिनके करोड़ों के माल फंस गए हैं. अब इनके तैयार सामान का क्या होगा और युद्ध अगर ऐसे ही चलते रहे तो भविष्य को लेकर भी तमाम सवाल उन्हें परेशान कर रहे हैं.
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