Kahaani 2: विद्या बालन की फिल्म ‘कहानी 2’ के मेकर्स ने काफी टाइम के बाद राहत की सांस ली है. साल 2016 में रिलीज़ हुई ये फिल्म कई सालों से कानूनी पछड़ों में पड़ी हुई थी.
21 March, 2026
बॉलीवुड एक्ट्रेस विद्या बालन की फिल्म ‘कहानी’ और उसका दूसरा पार्ट आपने जरूर देखा होगा. अब इस फिल्म के मेकर्स के लिए सालों बाद अच्छी खबर आई है. दरअसल, साल 2016 में रिलीज हुई फिल्म ‘कहानी 2’ को लेकर चल रहा बरसों पुराना कानूनी विवाद अब हमेशा के लिए खत्म हो गया है. सुप्रीम कोर्ट ने सुजॉय घोष के खिलाफ चल रहे कॉपीराइट उल्लंघन के मामले को पूरी तरह से कैंसिल कर दिया है. अदालत ने इस मामले को न सिर्फ बेबुनियाद बताया, बल्कि इसे फिल्ममेकर को परेशान करने वाला कदम भी करार दिया.

पूरा मामला
ये मामला झारखंड के हजारीबाग से शुरू हुआ था, जहां उमेश प्रसाद मेहता नाम के एक व्यक्ति ने दावा किया था कि सुजॉय घोष की फिल्म ‘कहानी 2’ उनकी लिखी हुई स्क्रिप्ट ‘सबक’ की कॉपी है. मेहता का आरोप था कि उन्होंने जून 2015 में मुंबई जाकर सुजॉय घोष से मुलाकात की थी और अपनी स्क्रिप्ट की एक कॉपी उन्हें दी थी. उनका दावा था कि सुजॉय ने बिना उनकी परमिशन के उस कहानी पर फिल्म बना डाली. इसके बाद हजारीबाग के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) ने सुजॉय घोष को समन जारी कर दिया था. सुजॉय ने इसके खिलाफ झारखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से उन्हें राहत नहीं मिली, जिसके बाद मामला देश की सबसे बड़ी अदालत पहुंचा.
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सुप्रीम कोर्ट से राहत
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने इस मामले की गहराई से जांच की और जो फैक्ट्स सामने आए, वे सुजॉय घोष के पक्ष में थे. अदालत ने पाया कि ‘कहानी 2’ की स्टोरी सुजॉय ने बहुत पहले ही तैयार कर ली थी. अदालत ने नोट किया कि सुजॉय ने साल 2012 में ही अपनी फिल्म का सिनोप्सिस ‘कोलकाता’ नाम से रजिस्टर करा लिया था. इसके बाद साल 2013 में इसकी आधी स्क्रिप्ट ‘दुर्गा रानी सिंह’ नाम से और पूरी स्क्रिप्ट ‘करार’ नाम से रजिस्टर हुई थी. दूसरी तरफ, शिकायतकर्ता ने अपनी स्क्रिप्ट जुलाई 2015 में रजिस्टर कराई थी. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि जब सुजॉय की स्टोरी पहले से ही रजिस्टर्ड थी, तो कॉपीराइट उल्लंघन का सवाल ही नहीं उठता.
अदालत की फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों के कामकाज पर भी कड़े सवाल उठाए. बेंच ने कहा कि हजारीबाग के मजिस्ट्रेट ने बिना किसी ठोस सबूत के और बिना ये देखे कि फिल्म और स्क्रिप्ट में कोई समानता है भी या नहीं, सुजॉय घोष को समन भेज दिया. कोर्ट ने इसे ‘मैकेनिकल’ तरीका बताया और कहा कि क्रिमिनल केस में किसी को समन करना एक गंभीर बात है और इसे मजाक नहीं समझना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि शिकायतकर्ता के आरोप पूरी तरह से निराधार थे. यहां तक कि स्क्रीन राइटर्स एसोसिएशन (SWA) की डिस्प्यूट सेटलमेंट कमेटी, जिसमें एक्सपर्ट शामिल होते हैं, उन्होंने भी साल 2018 में ये कह दिया था कि फिल्म और शिकायतकर्ता की स्क्रिप्ट अलग-अलग है.

फिल्ममेकर्स के लिए मिसाल
अक्सर देखा जाता है कि बड़ी फिल्मों की रिलीज के बाद कोई न कोई अपनी कहानी चोरी होने का दावा लेकर खड़ा हो जाता है. सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला ऐसे लोगों के लिए एक कड़ा मैसेज है जो ‘पब्लिसिटी’ या ‘पैसों’ के लिए फिल्ममेकर्स को कानूनी पचड़ों में फंसाते हैं. कोर्ट ने साफ किया कि अगर कोई शिकायत गलत इरादे या परेशान करने के लिए की गई है, तो अदालतों की जिम्मेदारी है कि वो उसे बारीकी से जांचें और रद्द करें.
फिल्मों की लिस्ट
वैसे, बात करें सुजॉय घोष की, तो वो ‘कहानी’ और ‘बदला’ जैसी शानदार थ्रिलर फिल्मों के लिए जाने जाते हैं. अब सुजॉय इस कानूनी बोझ से पूरी तरह फ्री हैं. ‘कहानी 2’ में विद्या बालन ने लीड रोल किया था. इस फिल्म को क्रिटिक्स ने भी काफी पसंद किया था. फिल्म में विद्या के साथ अर्जुन रामपाल और जुगल हंसराज भी हैं.
News Source: PTI
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