Vijay: साउथ फिल्मों के सुपरस्टार विजय काफी टाइम से अपनी किसी फिल्म की वजह से नहीं बल्कि पॉलिटिक्स की वजह से चर्चा में हैं. फिल्हाल तमिलनाडु में उनकी पार्टी अपनी बढत बनाए हुए है.
04 May, 2026
तमिलनाडु की राजनीति और सिनेमा का रिश्ता उतना ही पुराना है जितना कि वहां का कल्चर. इस राज्य ने हमेशा अपने फिल्म स्टार्स को सिर आंखों पर बैठाया है और उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाया है. MGR से लेकर जयललिता और करुणानिधि तक, यहां के महान नेताओं का सफर कैमरे के सामने से ही शुरू हुआ था. अब इसी लिस्ट में नया और सबसे बड़ा नाम जुड़ गया है और वो है, मेगास्टार विजय.
विजय का दांव
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों से ठीक पहले माहौल पूरी तरह गरमाया हुआ है. ज्यादातर एग्जिट पोल DMK की जीत का इशारा कर रहे थे. हालांकि, जैसे-जैसे रिजल्ट ओपन होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. रुझानों में फिलहाल विजय की पार्टी TVK 96 सीटों पर अपनी बढ़त बनाए हुए है. इसके बाद उम्मीद की जा रही है कि विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेट्टरी कषगम’ जीतकर सत्ता में आ सकती है. ये जीत विजय को अगला एमजीआर बना सकती है. फिलहाल विजय के सपोर्टर में इसे लेकर काफी ज्यादा एक्साइटमेंट नजर आ रही है. वैसे, कुछ ही देर में उनके पॉलिटिकल करियर की शुरुआत का फैसला हो जाएगा.
सिनेमा से सन्यास
फरवरी 2024 में जब विजय ने अपनी पार्टी TVK के गठन का एलान किया, तो उन्होंने क्लियर कर दिया था कि ये उनके लिए कोई साइड बिजनेस या हॉबी नहीं है. उन्होंने अपने पहले भाषण में कहा था कि, राजनीति मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि लोगों की पवित्र सेवा है. ये मेरा लक्ष्य है. अपनी गंभीरता साबित करने के लिए उन्होंने अपनी फिल्म ‘थलपति 69’ को अपनी आखिरी फिल्म अनाउंस कर दिया. 51 साल के विजय इस बार पेरंबूर और तिरुचि ईस्ट जैसी बड़ी सीटों से चुनाव मैदान में हैं.
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इतिहास की चेतावनी
विजय के लिए ये रास्ता आसान नहीं है. शिवाजी गणेशन, कमल हासन और विजयकांत जैसे दिग्गज कलाकारों का राजनीतिक हश्र उनके लिए एक वॉर्निंग की तरह है. इन सभी को जनता ने परदे पर तो प्यार दिया पर वोट की चोट से दूर रखा. हालांकि, वो आंध्र प्रदेश के एनटी रामा राव से इंस्पिरेशन ले सकते हैं, जिन्होंने पार्टी बनाने के सिर्फ 9 महीने के अंदर मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल कर ली थी.
‘मसीहा’ वाली इमेज
वैसे, राजनीति में विजय की ये एंट्री अचानक नहीं थी. साल 2009 में उनके पास 85,000 फैन क्लबों का एक बड़ा नेटवर्क था, जिसे उन्होंने ‘विजय मक्कल इयक्कम’ (VMI) नाम की संस्था में बदला. क्रिटिक्स का कहना है कि उनकी फिल्मों ने बहुत पहले ही उनके लिए फ्लोर तैयार कर दिया था. ‘कत्थी’ में किसानों का दर्द, ‘मेरसल’ में हेल्थ सेक्टर का करप्शन और ‘सरकार’ में चुनावी हेराफेरी, इन सब फिल्मों ने विजय को जनता के बीच एक ‘मसीहा’ के रूप में स्थापित किया.
विवादों का साया
विजय के सफर में कंट्रोवर्सीज और चैलेंज भी कम नहीं रहे. पिछले साल करूर में उनकी एक चुनावी रैली के दौरान मची भगदड़ में 11 बच्चों सहित 41 लोगों की जान चली गई थी. इस घटना के बाद विजय के तुरंत वहां से चले जाने और चुप्पी साधने पर उन्हें काफी ट्रोल किया गया. इसके अलावा पर्सनल लाइफ में भी उनकी पत्नी ने उन पर गंभीर आरोप लगाते हुए तलाक की अर्जी दी है.
यंगस्टर्स की पसंद
विजय Gen Z के बीच काफी पॉपुलर हैं. खासकर उन लोगों के बीच जो पुरानी द्रविड़ पार्टियों (DMK और AIADMK) से ऊब चुके हैं. विजय ने साफ किया है कि वो न तो भाजपा के साथ जाएंगे और न ही डीएमके के साथ. उनकी पार्टी का घोषणापत्र महिलाओं, युवाओं और मछुआरों पर फोकस रहेगा. जैसे, मछुआरों के लिए 8 चुनिंदा मछलियों पर MSP और सालाना प्रतिबंध के दौरान 27,000 रुपये की सहायता. वहीं, 12वीं से लेकर पीएचडी तक 25 लाख रुपये तक का बिना गारंटी वाला एजुकेशन लोन. इसके अलावा महिलाओं के लिए सालाना 6 मुफ्त एलपीजी सिलेंडर और शादी के लिए 8 ग्राम सोना. देखा जाए तो, विजय ने अपने एक्टिंग करियर के पीक पर राजनीति में छलांग लगाकर एक बड़ा रिस्क लिया है. उन्होंने राज्य में ‘व्हिसल रेवोल्यूशन’ की शुरुआत की है, जो उनकी पार्टी का चुनाव चिह्न भी है. आज जब रिजल्ट क्लियर हो जाएगा, तब ये भी क्लियर हो जाएगा कि तमिलनाडु की जनता ने अपने इस ‘थलपति’ को ‘नायक’ के रूप में स्वीकार किया है या नहीं.
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