Introduction
Middle East Tension : अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के बाद ईरान ने भी पलटवार करते हुए मध्य पूर्व देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाकर मिसाइल से हमला कर दिया. 28 फरवरी को किए गए हमले के बाद से ही मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है. हालांकि, ईरान ने खाड़ी देशों स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ही हमला किया है. लेकिन अभी तक इन देशों ने ईरान पर पलटवार नहीं किया है. इसी बीच लगातार इस बात की शंका जताई जा रही है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात इस युद्ध में ईरान के खिलाफ मैदान में आ सकते हैं. इसके अलावा खाड़ी के जिन देशों पर ईरान लगातार मिसाइल दाग रहा है उनमें सबसे बड़ी सैन्य ताकत सऊदी अरब के पास है. वहीं, ईरान का कहना है कि यह हमारे पड़ोसी देश हैं और इन पर हमला करना हमारा मकसद नहीं है. वह सिर्फ अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला कर रहा है.
मध्य पूर्व में अपनी सैन्य क्षमता को लेकर सऊदी अरब ने लगातार उसका बजट बढ़ाया है और उसके कारण ही वह एक ताकत बनकर उभरा है. वहीं, सऊदी सेना की उसकी सबसे बड़ी ताकत एयरफोर्स मानी जाती है और वह लगातार उस पर ध्यान में दे रहा है. हालांकि, सऊदी की पैदल सेना भी किसी से कम नहीं है. इस आर्टिकल में आप नीचे पढ़ सकते हैं सऊदी अरब, कतर और कुवैत समेत खाड़ी देशों की सैन्य क्षमता कितनी है…
Table Of Content
- सऊदी अरब सेना
- कुवैत की सैन्य क्षमता
- संयुक्त अरब अमीरात
- ऐसी है बहरीन की सैन्य शक्ति
- आधुनिक सैन्य ताकत है कतर
सऊदी अरब सेना
सऊदी एयर फोर्स के पास 300 से ज्यादा एफ-15 स्ट्राइक ईगल और यूरोफ़ाइटर टाइफ़ून जैसे हाईटेक लड़ाकू विमान है. इतनी भारी संख्या होने की वजह से सऊदी आसपास के इलाके की तुलना में काफी मजबूत स्थिति में है. इसके अलावा एयर डिफ़ेंस सिस्टम ‘पीस शील्ड’ भी है जो दुश्मन देश की मिसाइलों और ड्रोन को आसमान में ही खत्म करने की क्षमता रखता है. वह डिफेंस सिस्टम को अपडेट करने को लेकर भी काम कर रहा है. साथ ही सऊदी के पास एडवांस ड्रोन्स और मिसाइलें भी हैं जो दुश्मन देश के आसानी से छक्के छुड़ा सकता है. दुनिया भर के लोगों को लगता है कि वह सिर्फ तेल और गैस बेचने के लिए मशहूर है लेकिन उसकी सेना भी बहुत खतरनाक है. हालांकि, उसने अभी तक कोई बड़ा युद्ध नहीं लड़ा है वह सिर्फ प्रॉक्सी वार करता है और दूसरे देशों को युद्ध में फंडिंग करता है.
इसके अलावा सऊदी की थलसेना भी काफी मजबूत मानी जाती है. पैदल सेना के पास अमेरिकी अबराम टैंक और आधुनिक बख्तरबंद गाड़ियां हैं. साथ ही वह अपनी नौसेना को भी मजबूती देने के लिए लगातार काम कर रहा है ताकि समुद्री मार्गों और ऊर्जा ठिकानों को ज्यादा से ज्यादा सुरक्षा दी जा सके. साथ ही आयात और निर्यात होने वाले सामान को प्रतिकूल परिस्थितियों में मिशन को पूरा किया जा सके. हालांकि, इतने भारी बजट होने के बाद भी सऊदी सेना विदेशी हथियारों पर निर्भर है. वह स्वदेशी हथियारों पर बहुत कम काम करता है और ज्यादातर अमेरिकी, ब्रिटेन और फ्रांस के हथियारों पर निर्भर रहता है. ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स सालाना डेटा आधारित आकलन करती है और बताती है कि किस सेना के पास कितनी ताकत है. इसकी रैंकिंग के अनुसार, 2026 में 145 देशों की सूची सऊदी अरब 25वें स्थान पर अपनी जगह बनाता है.

ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स की समीक्षा में आर्मी, एयरफोर्स और नेवी की क्षमता को ध्यान में रखकर अपनी प्वाइंट को तैयार करती है. साथ ही उनके पास कितने स्वदेशी और अत्याधुनिक हथियार हैं इसका भी ध्यान रखकर अपनी रिपोर्ट बनाती है. इसमें कम स्कोर मतलब है कि कोई देश पारंपरिक सैन्य शक्ति के रूप में काम करता आ रहा है. बता दें कि अमेरिकी इस सूची में 0.0857 के स्कोर साथ शीर्ष स्थान पर काबिज है.
कुवैत की सैन्य क्षमता
खाड़ी देशों में से एक कुवैत लगातार अपनी सैन्य क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है. वह रणनीतिक और आर्थिक क्षेत्र में समृद्धि के बदौलत अपनी ताकतवर सेना को खड़ा कर रहा है. साल 2024 में कुवैत का रक्षा बजट 7.79 अरब डॉलर था. वह ग्लोबल फ़ायर पावर सूची में 76वें स्थान पर आता है और इसका पावर इंडेक्स 1.716 है. इसके अलावा कुवैत में 18 से 25 वर्षीय पुरुषों के लिए अनिवार्य सैन्य सेवा देना है. दूसरी तरफ कुवैत की थलसेना के पास करीब 367 बैटल टैंक हैं और एयरफोर्स के पास 131 विमान हैं, जिसमें करीब 50 लड़ाकू विमान हैं. कुवैत बीते कई सालों से युद्ध में नहीं जाता है लेकिन दुनिया में युद्धों की स्थिति को ध्यान में रखकर वह भी अपनी सैन्य क्षमता लगातार बढ़ाने में लग गया है. यही वजह है कि उसने 18 से 37 साल के पुरुषों के लिए सेना में भर्ती होने की अनिवार्य शर्त रखी है.

वहीं, क्षेत्रीय स्थिति को देखते हुए कुवैत ने अब ड्रोन और मिसाइलों पर भी फोकस करना शुरू कर दिया है. साथ ही वह अपना एयर डिफेंस सिस्टम भी विकसित में करने में लगा है और अपनी वायु सेना भी पर भी ध्यान दे रहा है. कुवैत के पास वर्तमान में एफए-18 हॉरनेट जैसे लड़ाकू विमान हैं. रणनीतिक छोर से देखा जाए तो कुवैत अमेरिका और ब्रिटेन का सहयोगी देश है. यह दोनों देश कुवैत को ट्रेनिंग, टेक्नोलॉजी और सुरक्षा सहयोग देने में अहम भूमिका निभाते हैं. यही वजह है कि अमेरिका ने अपना एक सैन्य अड्डा कुवैत में भी विकसित किया है.
संयुक्त अरब अमीरात
UAE भी मध्य पूर्व में एक मजबूत सैन्य ताकत में से एक है. हालांकि, ईरान ने जो निशाना बनाकर सऊदी अरब और UAE पर हमला किया है. लेकिन इन्होंने अभी तक पलटवार नहीं किया है. लेकिन शंका जताई जा रही है कि यह दोनों देश ईरान के खिलाफ युद्ध में कूद सकते हैं और अगर ऐसा होता है तो पूरा मध्य पूर्व युद्ध की चपेट में आ जाएगा. इसका सीधा प्रभाव ग्लोबल मार्केट पर देखने को भी मिलेगा जहां पर पहले से ही पेट्रोल और गैस की कीमतों पर भारी बढ़ोतरी हुई पड़ी है. यूएई ने ईरानी की कई मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया है लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है. बताया जा रहा है कि UAE के पास टेक्नोलॉजी और सटीक हमला करने की क्षमता है और उसका सालाना सैन्य बजट 22.75 अरब डॉलर है.

वहीं, अगर उसकी ग्लोबल फायर पावर इंडेक्स की तरफ देखा जाए तो उसका स्थान वर्ल्ड रैंकिंग में 54वें स्थान पर आता है. रक्षा विश्लेषकों की मानें तो यूएई सिर्फ डिफेंसिव नहीं बल्कि सक्रिय सैन्य शक्ति बन चुका है. यूएई ने इससे पहले लीबिया और यमन में भी सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया था. यूएई की सबसे बड़ी ताकत एयरफोर्स मानी जाती है. उसके पास एफ-16 और मिराज 2000 जैसे लड़ाकू विमान भी है और वह लगातार इनकी संख्या को बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं. इसके पास पैट्रियट और थाड जैसे एयर डिफेंस सिस्टम भी हैं जो दुश्मन देश की मिसाइल और ड्रोन को ट्रैक करके हवा में मारने की क्षमता रखते हैं.
ऐसी है बहरीन की सैन्य शक्ति
खाड़ी में लगातार बढ़ रहे तनाव को ध्यान में रखते हुए बहरीन भी अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाने में लगा हुआ है. बहरीन की सेना को ‘बहरीन डिफेंस फोर्स’ कहा जाता है. ये सेना एडवांस और तकनीक के तौर पर मजबूत मानी जाती है. बहरीन की सेना तकनीकी रूप से काफी एडवांस मानी जाती है और इसकी तीनों सेनाओं में एयरफोर्स सबसे मजबूत मानी जाती है. खाड़ी देशों में बहरीन पहला देश था जिसने अपनी सेना में एफ-16 फ़ाइटिंग फाल्कन को शामिल किया था. 70 वैरिएंट के साथ यह सेना को और मजबूत करता है. वहीं, समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बहरीन नेवी फोर्स के पास अमेरिकी मूल का ओलिवर हजार्ड-पेरी क्लास का युद्धपोत है.

अगर हम बहरीन के रक्षा बजट की बात करें तो उसने अपना सालाना रक्षा बजट 1.75 अरब डॉलर रखा है. साथ ही क्षेत्रीय तनाव को ध्यान में रखते हुए वह अपना रक्षा बजट में वृद्धि कर रहा है. हालांकि, अभी उसकी सेना विदेशी कॉन्ट्रैक्ट पर निर्भर है जो इसकी कमजोरी को दर्शाता है. लेकिन ईरान युद्ध को ध्यान में रखते हुए बहरीन अपनी स्वदेशी सेना पर भी ध्यान देने की कोशिश में लग गया है. वहीं, रणनीतिक सहयोग के मामले में उसका अंतरराष्ट्रीय समर्थन है और उसके देश में अमेरिका का पांचवां बेड़ा है, जिस पर ईरान ने ताबड़तोड़ मिसाइल से हमला किया है.
आधुनिक सैन्य ताकत है कतर
भौगोलिक और जनसंख्या के लिहाज से कतर देश बेहद छोटा है लेकिन अपनी आधुनिक सेना के माध्यम से वैश्विक दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है. कतर दुनिया में सबसे बड़ा गैस उत्पादक देश है और ईरान ने हाल ही में उसके गैस प्लांट पर हमला करके दुनिया को चौंका दिया था. कतर की सेना भले ही संख्या के हिसाब से ज्यादा बड़ी न हो लेकिन वह तकनीक और अत्याधुनिक हथियारों के मामले में किसी देश से कम नहीं है.

कतर की एयरफोर्स ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है. इस वक्त कतर के पास यूरो फ़ाइटर टाइफ़ून और रफाल जैसे आधुनिक हथियार है. कतर के पास नौसेना भी ज्यादा बड़ी नहीं है लेकिन अत्याधुनिक पेट्रोलिंग जहाज होने की वजह से वह समुद्री इलाके की सुरक्षा काफी मजबूती से कर पाता है. लेकिन कतर की सबसे बड़ी चुनौती उसकी कम आबादी है. करीब तीन लाख आबादी वाले इस देश में 80 हजार विदेशी हैं. जनसंख्या कम होने की वजह से इसका असर सेना पर भी देखने को मिलता है. कतर अपनी सेना को मजबूत करने के लिए विदेशी विशेषज्ञों और कॉन्ट्रैक्ट सैनिकों पर ज्यादा निर्भर है. रणनीतिक रूप से कतर की सेना आक्रामक नहीं है बल्कि रक्षात्मक है. यही वजह है कि ईरान की तरफ से हमले होने के बाद भी उसने जवाबी कार्रवाई नहीं की है.
Conclusion
खाड़ी में बिगड़ते हालातों को ध्यान में रखते हुए वहां मौजूद देशों ने अपनी सेना को मजबूत करने के लिए अब कदम उठाना शुरू कर दिया है. हालांकि, खाड़ी देशों ने अपनी वायु सेना को काफी मजबूत किया है, लेकिन वह अभी विदेशी हथियारों और कॉन्ट्रैक्ट सेना पर निर्भर है. अब इन देशों के लिए चुनौती बन गया है कि वह अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाए और स्वदेशी हथियारों को भी बनाना शुरू कर दें. अगर हम खाड़ी देशों में सऊदी अरब और यूएई की बात करें तो इनके पास थलसेना, वायुसेना और नेवी काफी मजबूत है. लेकिन अभी भी इनकी सेना के पास जो हथियार हैं वह अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस से आते हैं.
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