Home Top News ‘अंतरराष्ट्रीय कानून मर चुके…’ दोहरे रवैये पर बोले अब्बास अराघची; अमेरिका पर कही ये बात

‘अंतरराष्ट्रीय कानून मर चुके…’ दोहरे रवैये पर बोले अब्बास अराघची; अमेरिका पर कही ये बात

by Sachin Kumar
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Middle East War Foreign Minister Araghchi Double Standards

Middle East War : मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध ने दुनिया की नींद उड़ा दी है. गैस और तेल की सप्लाई में बाधा आने की वजह से आम जन को काफी दिक्कत हो रही है. इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री ने बड़ा बयान दिया है.

Middle East War : ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के बीच 25 दिनों से जारी जंग के बीच मिडिल ईस्ट में भारी तनाव बना हुआ है. अभी दूर-दूर तक नहीं दिख रहा है कि यह युद्ध समाप्त हो जाए. इसी बीच खबर सामने आई है कि इस जंग में सऊदी अरब और UAE ईरान के खिलाफ उतर सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो मध्य पूर्व में जंग भयानक रूप ले लेगी. वहीं, इजरायल और अमेरिका तेहरान पर बहुत आक्रामक तरीके से हमला कर रहे हैं उन्होंने कई सिविलियन इलाकों पर भी हमला किया है. इसी बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि व्यवहार में अंतरराष्ट्रीय कानून अब मृत हो चुका है. इसकी वजह साफ है कि गाजा बनाम यूक्रेन के मामले में पश्चिम देशों का दोहरा रवैया रहा है.

विश्व संस्थाएं चुप्पी साधी बैठी हैं

अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान के खिलाफ इजरायल और अमेरिकी का आक्रामकता पर विश्व संस्थाएं चुप्पी साधे बैठी हैं. उन्होंने आगे कहा कि फिर भी ईरानियों के खिलाफ हो रहे उल्लंघनों की निंदा करने के लिए राष्ट्रपति स्टीनमीयर की सराहना की जानी चाहिए. जो लोग कानून के शासन को महत्व देते हैं, उन्हें भी इस पर अपनी आवाज उठानी चाहिए. लेकिन वह लोग अब चुप बैठे हैं.

1 हजार सैनिक मध्य पूर्व भेजने का निर्देश

आपको बताते चलें कि युद्ध अब और गहरा हो सकता है क्योंकि पेंटागन ने अमेरिकी सेना की 82वीं एयरबोर्न डिविजन के 1 हजार सैनिकों को मध्य पूर्व भेजने का निर्देश दे दिया है. बताया जा रहा है कि यह कदम राष्ट्रपति ट्रंप को अतिरिक्त सैन्य विकल्प देने के लिए उठाया गया है, दूसरी तरफ ट्रंप का कहा है कि ईरानी लीडर्स के साथ युद्ध को रोकने के लिए बातचीत चल रही है. लेकिन अब सैनिकों का एक बेड़ा मध्य पूर्व में भेजने का मतलब है कि यह युद्ध पहले के मुकाबले ज्यादा भयानक होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. इस सैनिक डिविजन में करीब 3 हजार जवान होते हैं और यह 18 घंटे के भीतर दुनिया के किसी भी हिस्से में तैनात हो सकते हैं.

सैन्य ताकत बढ़ाने के दिए संकेत

इससे पहले भी अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के संकेत दिए थे और इसी कड़ी में USS Boxer वॉरशिप के साथ मरीन और नौसैनिकों को मध्य पूर्व भेजा गया था. अतिरिक्त सैनिकों का यह बेड़ा पहले से तैनात 50 हजार अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़ा सकती है. हालांकि, व्हाइट हाउस ने सीधे तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है लेकिन प्रवक्ता अन्ना केली ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के पास सभी सैन्य विकल्प मौजूद हैं. एक सूत्र ने बताया कि अभी तक अमेरिका का ईरान में सेना उतारने का कोई विचार नहीं बना है, लेकिन यह तैनाती भविष्य की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर इसका हिस्सा हो सकती हैं.

इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्चा बढ़ा सकता है युद्ध

दूसरी तरफ रियल एस्टेट के संगठनों क्रेडाई और नारेडको ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-ईरान के बीच लंबे समय तक चलने वाला युद्ध निर्माण लागत को बढ़ा सकता है. इसके अलावा ईंधन और माल ढुलाई की कीमतों में भारी वृद्धि होने की वजह से टाइल्स और स्टील बहुत महंगी हो सकती है. साथ ही प्रोजेक्ट की समय सीमा बढ़ सकती है और घरों की कीमतों में भी भारी वृद्धि हो सकती है.

यह भी पढ़ें- ट्रंप का बातचीत का दावा : ईरान ने दागी इजरायल पर मिसाइल, US भेजेगा एक हजार सैनिक

News Source: PTI

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