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अब स्टेम सेल थेरेपी से नहीं होगा सेरेब्रल पाल्सी और ऑटिज्म का इलाज, इस वजह से लगी रोक

by Sanjay Kumar Srivastava
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अब स्टेम सेल थेरेपी से नहीं होगा सेरेब्रल पाल्सी और ऑटिज्म का इलाज, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने इस वजह से लगाई रोक

Stem Cell Therapy: राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार के इलाज में स्टेम सेल थेरेपी के उपयोग को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है.

Stem Cell Therapy: राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार के इलाज में स्टेम सेल थेरेपी के उपयोग को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है. इस कदम का मुख्य उद्देश्य महानगरों और छोटे शहरों में चल रहे उन निजी क्लीनिकों को रोकना है, जो सेरेब्रल पाल्सी और ऑटिज़्म जैसी बीमारियों को स्टेम सेल से ठीक करने का भ्रामक दावा करते हैं. नई एडवाइजरी के अनुसार, चिकित्सा जगत में स्टेम सेल थेरेपी का उपयोग अब केवल उन 32 विशिष्ट बीमारियों के लिए किया जा सकेगा जिन्हें वैज्ञानिक रूप से अनुमोदित किया गया है. जहां ऑटिज्म (ASD) बच्चे के सामाजिक संवाद और व्यवहार को प्रभावित करता है, वहीं सेरेब्रल पाल्सी (CP) मुख्य रूप से शारीरिक मुद्रा और मांसपेशियों की गति को प्रभावित करने वाला रोग है.

केवल 32 बीमारियों के लिए ही मान्य

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अनुसार, वर्तमान में स्टेम सेल थेरेपी केवल 32 बीमारियों (जैसे कुछ प्रकार के रक्त कैंसर और विकार) के लिए ही मान्य है. आयोग ने स्पष्ट किया कि ऑटिज़्म और सेरेब्रल पाल्सी के उपचार में इस थेरेपी की प्रभावशीलता के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं. यह निर्देश सभी मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों और डॉक्टरों के लिए अनिवार्य है ताकि मरीजों को असुरक्षित और अप्रमाणित उपचारों से बचाया जा सके. स्टेम सेल थेरेपी से जिन बीमारियों का इलाज संभव है, उनमें एक्यूट माइलॉयड ल्यूकेमिया, मल्टीपल स्केलेरोसिस, थैलेसीमिया, ऑस्टियोपेट्रोसिस, मल्टीपल मायलोमा, अप्लास्टिक एनीमिया/पैरॉक्सिस्मल हीमोग्लोबिनुरिया, जर्म सेल ट्यूमर और मायलोफाइब्रोसिस शामिल हैं. यह सलाह भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) की सिफारिशों के आधार पर जारी की गई है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई

30 जनवरी को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्टेम सेल थेरेपी के संबंध में एक फैसला सुनाया, जिसके बाद 10 मार्च को ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने पत्र जारी किया. जिसमें कहा गया कि कोई भी स्टेम सेल उपचार जो मानक देखभाल की सूची में शामिल नहीं है या केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) या स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR) द्वारा अनुमोदित नहीं है, उसे अवैध माना जाएगा और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी. मालूम हो कि स्टेम सेल थेरेपी एक आधुनिक चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें शरीर के क्षतिग्रस्त ऊतकों, अंगों या मृत कोशिकाओं को स्वस्थ स्टेम सेल्स (कोशिकाओं) का उपयोग करके पुनर्जीवित किया जाता है.

शोध के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय से लेनी होगी अनुमति

पत्र में कहा गया है कि नियमित अभ्यास में स्टेम सेल थेरेपी को केवल मानक देखभाल के रूप में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा अनुमति दी जाएगी. स्टेम सेल थेरेपी केवल अनुसंधान के संदर्भ में ही स्वीकार्य है. पत्र में आगे कहा गया है कि स्टेम सेल अनुसंधान भी केवल एक स्वीकृत क्लिनिकल परीक्षण के हिस्से के रूप में स्वीकार्य होगा. इस शोध के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के सभी नैतिक दिशानिर्देशों का पालन करना आवश्यक होगा. शोध के दौरान मरीज के परिजनों की लिखित सहमति जरूरी है. कोई भी स्टेम सेल उपचार जो मानक देखभाल की सूची में शामिल नहीं है या CDSCO या DHR द्वारा अनुमोदित नहीं है, उसे अवैध माना जाएगा और कानून के अनुसार कार्रवाई के लिए उत्तरदायी होगा.

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News Source: PTI

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