Middle East War : मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री का बड़ा बयान सामने आया है. उनका कहना है कि ईरान के आसपास देशों में भारी संख्या में अमेरिकी सैनिकों को भेजा जा रहा है.
Middle East War : ईरान और इजरायल-अमेरिकी के बीच जारी जंग से मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है. इस युद्ध की वजह से दुनिया भर के देशों में पेट्रोल और गैस को लेकर हाहाकार मच हुआ, क्योंकि ईरान ने साफ कर दिया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से इजरायल-अमेरिका और उनके सहयोगी देशों का कोई भी मालवाहक जहाज नहीं गुजरेगा. इसी बीच अमेरिका द्वारा दी गई डेडलाइन भी खत्म होने वाली है और ट्रंप ने रविवार को कहा कि अगर 48 घंटे के भीतर यह समुद्री गलियारा नहीं खोला गया था तो ईरान में भारी तबाही मचेगी. इसी बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीटर हेगसेथ ने भी साफ कर दिया है कि हजारों की संख्या में अमेरिकी सैनिक मध्य पूर्व की तरफ जा रहे हैं.
समझौता नहीं, तो युद्ध गहराएगा
पीटर हेगसेथ ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने जोर देकर कहा है कि ईरान के साथ बातचीत में प्रगति हुई है और चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही मामला किसी समझौते पर नहीं पहुंचा तो युद्ध और गहरा सकता है. इसी बीच दो अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि विमानवाहक पोत USS जॉर्ज HW बुश मंगलवार को तैनात किया और 3 विध्वंसक जहाज मध्य पूर्व में जाने वाले हैं. इस पूरे कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में 6 हजार से ज्यादा नाविक शामिल हैं. इसके अलावा 82वीं एयरबोर्न डिवीज़न के हज़ारों सैनिक भी मिडिल ईस्ट में पहुंचने लगे हैं. हालांकि, इसमें से ज्यादातर सैनिक युद्ध के पहले से ही जाने के लिए रोटेशन का हिस्सा हैं, कुछ सैनिक ऐसे भी हैं जिन्हें ट्रंप प्रशासन ने पिछले हफ्ते ही भेजने का फैसला किया है.
मैदान में बताना कि हम क्या कर सकते हैं
हेगसेथ ने मंगलवार को पत्रकारों से खास बातचीत में कहा कि आप तब तक कोई जंग नहीं जीत सकते हैं जब तक दुश्मन को यह न बता दें कि आप युद्ध के मैदान में क्या कर सकते हैं. उन्होंने आगे कहा कि अभी हमारे दुश्मन यह सोच रहे हैं कि किन 15 तरीकों से अमेरिका ईरान में अपनी सेना भेज सकता है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ईरान से अमेरिका बातचीत के माध्यम से किसी समझौते पर पहुंचना चाहता है क्योंकि हम नहीं चाहते हैं कि जरूरत से ज्यादा सैन्य कार्रवाई कर सकें.
12 मार्च को लग गई थी आग
दुनिया के सबसे बड़े विमानवाहक पोत, USS Gerald R. Ford के लॉन्ड्री रूम में 12 मार्च को आग लग गई थी. साथ ही इस घटना के बाद लाल सागर के रास्ते से भूमध्य सागर की तरफ लौटना पड़ा. क्रीट में मौजूद नौसैनिक अड्डे पर इसकी मरम्मत की जा रही है. नौसेना की एक प्रेस रिलीज के मुताबिक, आग लगने की वजह से इसके अंदर मौजूद 7 कमरे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं. यही वजह है कि कई नौसैनिकों का सामान खराब हो गया और नाविकों को सोने के लिए दूसरी जगहों की तलाश करनी पड़ी. आग लगने से हुए नुकसान के बाद यह जहाज क्रोएशिया में है और अमेरिका का कहना है कि यह जल्द ही अपनी दुगुनी ताकत के साथ वापस आएगा.
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