Home Top News पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सरकार का बड़ा फैसला, इन सामानों पर घटाई एक्सपोर्ट ड्यूटी

पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सरकार का बड़ा फैसला, इन सामानों पर घटाई एक्सपोर्ट ड्यूटी

by Amit Dubey 31 May 2026, 11:02 AM IST
31 May 2026, 11:02 AM IST
Export Duty News

Export Duty News: पश्चिम एशिया में जारी संकट और इससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावित होने के बीच भारत सरकार ने एक बड़ा फैसला किया है. न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार ने पेट्रोल-डीजल और हवाई जहाजों के तेल (ATF) की एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती कर दी है. जानकारी के अनुसार, वित्त मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन में कहा कि पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस शून्य रहेगा. इसके अलावा, घरेलू खपत के लिए स्वीकृत पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

1 जून से प्रभावी

मिली जानकारी के अनुसार, देश की मोदी सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले अप्रत्याशित लाभ टैक्स (windfall gains tax) को घटाकर 1.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जबकि डीजल पर लगने वाला कर घटाकर 13.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है. वहीं, विमानन टरबाइन ईंधन (Aviation Turbine Fuel) पर लगने वाले टैक्स को घटाकर 9.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है. यह सभी कटौती जो 1 जून से प्रभावी होंगी. जानकारी के मुताबिक, डीजल के निर्यात पर शुल्क 16.5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 13.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है और विमानन टरबाइन ईंधन पर शुल्क 1 जून से 16 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 9.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है.

26 मार्च को बढ़ाया गया था निर्यात शुल्क

केंद्र की मोदी सरकार ने बीते 26 मार्च को डीजल पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लगाया था. 11 अप्रैल को हुई समीक्षा में शुल्क बढ़ाकर क्रमशः 55.5 रुपये प्रति लीटर और 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था. 30 अप्रैल को हुई समीक्षा में इसे घटाकर क्रमशः 23 रुपये प्रति लीटर और 33 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया और 16 मई को इसे और घटाकर क्रमशः 16.5 रुपये प्रति लीटर और 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया.

क्यों लगाया गया था विंडफॉल टैक्स?

अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध के दौरान ईंधन की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए विंडफॉल टैक्स लगाया गया था. इसका उद्देश्य निर्यातकों को मूल्य अंतर का अनुचित लाभ उठाने से रोकना भी था, क्योंकि युद्ध की शुरुआत के बाद से ग्लोबल स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई थी.

बता दें कि 28 फरवरी को, अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य हमले शुरू किए थे, जिससे तेहरान की ओर से व्यापक जवाबी कार्रवाई हुई थी. कच्चे तेल की कीमतें पिछले सप्ताह से 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं, जबकि युद्ध से पहले यह लगभग 73 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थीं. मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट की पृष्ठभूमि में निर्यात को हतोत्साहित करके पेट्रोलियम उत्पादों की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह अप्रत्याशित लाभ कर लगाया गया था.

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News Source: PTI

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