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खाड़ी देशों को सीधा अल्टीमेटम: होर्मुज पर ईरान ने खींची लक्ष्मण रेखा, क्या शुरू होगा महायुद्ध?

by Sanjay Kumar Srivastava 16 July 2026, 8:58 PM IST
16 July 2026, 8:58 PM IST
खाड़ी देशों को सीधा अल्टीमेटम: होर्मुज़ जलमार्ग पर ईरान ने खींची लक्ष्मण रेखा, क्या शुरू होगा महायुद्ध?

US-IRAN WAR: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरानी सशस्त्र बलों के संयुक्त परिचालन कमान ‘खतम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर’ के प्रवक्ता कर्नल इब्राहिम ज़ोलफ़गारी ने अमेरिका को एक बड़ी युद्ध की खुली चेतावनी दी है. यह तीखी प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस हालिया धमकी के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर ईरान बातचीत की मेज पर नहीं लौटता है तो अमेरिका अगले हफ्ते ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों को निशाना बनाकर तबाह कर देगा.

ट्रंप को सीधी चुनौती

कर्नल ज़ोलफ़गारी ने एक वीडियो बयान जारी कर ट्रंप को सीधे तौर पर ललकारा है. उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की धमकी पर अमल किया गया, तो अमेरिकी क्षेत्र का बचा हुआ सारा बुनियादी ढांचा ईरानी सेना के शक्तिशाली हमलों से पूरी तरह मटियामेट कर दिया जाएगा. वहां ऐसा कुछ नहीं बचेगा जिससे उनके होने का सबूत मिले. इसके साथ ही, तेल निर्यात के वैश्विक मार्ग होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर भी कर्नल ने सख्त रुख अपनाया है.

उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी विदेशी या बाहरी देश के रूप में अमेरिका को इस रणनीतिक जलमार्ग के प्रबंधन में दखल देने की इजाजत नहीं देगा. ज़ोलफ़गारी ने चेतावनी दी कि यह ईरान की ऐसी ‘रेड लाइन’ (लक्ष्मण रेखा) है जिसे किसी भी हाल में पार नहीं किया जा सकता. उन्होंने खाड़ी देशों को भी आगाह किया कि अमेरिका को किसी भी प्रकार की सैन्य या साजोसामान की मदद देना ईरान के खिलाफ युद्ध माना जाएगा.

अमेरिका का ताबड़तोड़ हमला

अमेरिका ने ईरान पर गुरुवार तड़के हमले तेज कर दिए और उत्तर की ओर के ठिकानों को निशाना बनाया. साथ ही, अमेरिकी सेना ने एक जहाज़ पर भी गोलीबारी की, जिस पर अमेरिका ने आरोप लगाया था कि वह इस्लामिक रिपब्लिक पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहा था. जवाब में, ईरान ने सुबह होने से पहले इलाके में अमेरिकी सहयोगियों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन से हमले किए और चेतावनी दी कि उसके हमले और बढ़ सकते हैं.

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मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच कई दिनों से चल रहे हमलों और जवाबी हमलों और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के लिए नई धमकियों ने ईरान युद्ध को खत्म करने के अंतरिम समझौते को खत्म कर दिया है. इस इलाके को फिर से पूर्ण युद्ध की ओर धकेल सकते हैं. ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिकी हमलों में पहले ही 35 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं और 300 से ज़्यादा घायल हुए हैं.

होर्मुज जलडमरूमध्य: ईरान की अटूट ‘रेड लाइन’

हिंसा के इस ताज़ा दौर में पहली बार ईरान की राजधानी तेहरान के आस-पास के इलाकों में भी हमले हुए, जिससे पता चलता है कि अमेरिकी हमले के दायरे में अब ज़्यादा ठिकाने आ गए हैं. जब अमेरिका और इज़राइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ़ युद्ध शुरू किया, तो तेहरान ने जहाज़ों की आवाजाही के लिए जलडमरूमध्य को बंद कर दिया. इस कदम से तेल, उर्वरक और कई अन्य सामानों की कीमतें इस इलाके से बाहर भी बहुत तेज़ी से बढ़ गईं और ईरान को बातचीत में बड़ी बढ़त मिल गई.

अमेरिका की धमकी पर पलटवार

ईरानी सेना के ‘खतम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर’ के प्रवक्ता कर्नल इब्राहिम ज़ोलफ़गारी ने धमकी दी कि अगर अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बार-बार दी गई चेतावनियों पर अमल करते हुए ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों पर हमला करता है, तो ईरान इलाके के बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर हमले कर सकता है. ज़ोलफ़गारी ने कहा कि अगर ट्रंप की धमकी पर अमल किया जाता है, तो इलाके का सारा बुनियादी ढांचा इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान की शक्तिशाली सशस्त्र सेनाओं के ज़बरदस्त हमलों से नष्ट कर दिया जाएगा. उन्होंने आगे कहा कि हम किसी भी हाल में और किसी भी तरह से अमेरिका को, जो एक विदेशी और इलाके से बाहर का देश है, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में दखल नहीं देने देंगे. यह ईरान की ऐसी ‘रेड लाइन’ है जिसे कोई पार नहीं कर सकता.

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ईरान के डिफेंस और मिसाइल ठिकानों को बनाया निशाना

सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार तड़के तेहरान के आसपास अमेरिकी हमले हुए. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अमेरिकी हमलों में सेमनन प्रांत को निशाना बनाया गया, जहां ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल प्रोडक्शन और स्पेस प्रोग्राम स्थित है. ईरानी मीडिया ने गुरुवार सुबह हमदान, होर्मोज़गन, खुज़ेस्तान, लोरेस्तान, मरकाज़ी और सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांतों के आसपास भी हमलों की खबर दी. बुधवार को अमेरिका ने दिन के उजाले में ईरान पर हमले फिर से शुरू किए, जिससे हमलों की बढ़ती तीव्रता का पता चलता है. सेंट्रल कमांड ने बताया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में रणनीतिक रूप से अहम ग्रेटर टुनब द्वीप पर हुए हमले में ईरान के डिफेंस और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया गया.

अमेरिका ने व्यापारिक जहाज पर दागा मिसाइल

अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने फारस की खाड़ी में ईरान के मुख्य तेल निर्यात टर्मिनल, खार्ग द्वीप की ओर जा रहे कुराकाओ-ध्वज वाले तेल टैंकर ‘बेल्मा’ पर गोलीबारी की. जहाज द्वारा कई चेतावनियों को नजरअंदाज करने के बाद एक अमेरिकी विमान ने जहाज के स्मोकस्टैक (धुआं निकलने वाली चिमनी) में मिसाइल दागकर उस व्यापारिक जहाज को बेकार कर दिया.

ईरानी सरकारी टेलीविजन की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को एक और अमेरिकी हमले में सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में ईरान की 388वीं मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री ब्रिगेड की बैरक को निशाना बनाया गया, जो टैंक और बख्तरबंद वाहन संचालित करती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकियों ने हमले में कम से कम 13 मिसाइलें दागीं और मारे गए सात लोगों में अनिवार्य सैन्य सेवा वाले सैनिक और पेशेवर सैनिक शामिल थे. कई सैनिक घायल भी हुए.

ईरान ने की जवाबी कार्रवाई

ईरान ने गुरुवार सुबह बहरीन, जॉर्डन और कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन हमले करके जवाबी कार्रवाई की. इन देशों में अमेरिकी सेना तैनात है. इन हमलों से हुए नुकसान या हताहतों के बारे में तुरंत कोई जानकारी नहीं मिली. कुवैत ने गुरुवार दोपहर को फिर से हमले (गोलीबारी) की सूचना दी. इस बीच, इराकी प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी ने इराक के अर्ध-स्वायत्त उत्तरी कुर्द क्षेत्र के इरबिल शहर पर रात भर हुए ड्रोन हमले की निंदा की. अधिकारियों के अनुसार, जिस ड्रोन को इंटरसेप्ट (रास्ते में ही रोक) कर लिया गया था, वह उनके अमेरिका दौरे के दौरान आया था. इस दौरे में उन्होंने कहा था कि इराक ईरान समर्थित समूहों सहित गैर-सरकारी सशस्त्र समूहों को निहत्था करने की दिशा में काम करेगा.

शांति समझौता अभी भी संभवः ट्रंप

लड़ाई का ताज़ा दौर होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर केंद्रित है, क्योंकि ईरान इस अहम समुद्री रास्ते से गुज़रने वाले उन जहाज़ों पर हमले कर रहा है जो अमेरिकी नियंत्रण वाले रूट का इस्तेमाल करते हैं. अमेरिका ने बलपूर्वक इस जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की धमकी दी है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए हज़ारों ज़मीनी सैनिकों के अलावा एक बहुत बड़े नौसैनिक बेड़े की ज़रूरत होगी.

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गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय मानक माने जाने वाले ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रही. यह कीमत युद्ध से पहले की तुलना में 15 प्रतिशत से ज़्यादा है, लेकिन संघर्ष के चरम पर पहुंची लगभग 120 डॉलर की कीमत से अभी भी काफी कम है. बढ़ती कीमतें ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती है, जो नवंबर में होने वाले चुनावों में कांग्रेस पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की उम्मीद कर रहे हैं. लेकिन वाशिंगटन इस समुद्री रास्ते को सफलतापूर्वक फिर से खोलने में संघर्ष करता रहा है, जिसके कारण ट्रंप ने बुधवार को नौसैनिक नाकेबंदी फिर से लागू कर दी.

मध्यस्थता में लगा है पाकिस्तान

ट्रंप ने फिर ज़ोर देकर कहा कि ईरान शांति समझौता करने के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने इस बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया. उन्होंने बुधवार को पेंसिल्वेनिया में अमेरिकी सेना के वॉर कॉलेज में कहा कि उन्हें हमारी गतिविधियां पसंद नहीं हैं, और वे समझौता करना चाहते हैं. हमें पता चल जाएगा कि हम उनके साथ समझौता करते हैं या बस इसे खत्म कर देते हैं. मध्यस्थों ने तनाव कम करने की कोशिश की है, लेकिन अब तक वे सफल नहीं हो पाए हैं. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि वह अभी भी अमेरिका और तेहरान को बातचीत की मेज़ पर लाने की कोशिश कर रहा है, साथ ही यह भी माना कि मध्यस्थता करना तेज़ी से मुश्किल होता जा रहा है.

हिरासत में ली गई नागरिक की पहचान

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जब भी पक्ष तनाव बढ़ाने के सभी तर्क आज़मा लेते हैं, तो शांति का फ़ॉर्मूला सामने आता है. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि तेहरान ने 2024 से ईरान में ग़लत तरीके से हिरासत में रखे गए एक अमेरिकी नागरिक को रिहा करके सद्भावना का संकेत दिया है. उन्होंने और विवरण नहीं दिया.

मानवाधिकार वकील जेरेड गेन्सर ने एक बयान जारी कर हिरासत में लिए गए व्यक्ति की पहचान अपनी क्लाइंट डेना करारी के रूप में की, जो एक अमेरिकी-ईरानी नागरिक हैं, एक गैर-लाभकारी संस्था चलाती हैं और जिन पर जासूसी का आरोप लगाया गया था. ईरान ने तुरंत रिहाई की पुष्टि नहीं की. कहा कि उनके मामले के बारे में सार्वजनिक रूप से जानकारी नहीं थी, जैसा कि कभी-कभी इस्लामिक गणराज्य में हिरासत के मामलों में होता है.

कुवैत पर भीषण गोलाबारी

कुवैत की सेना ने गुरुवार को कहा कि वह ईरान की तरफ से आ रहे नए हमलों को रोक रही है. ईरान का यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़) को लेकर चल रहे विवाद के बीच अमेरिका ने इस इस्लामिक देश पर अपने हमले तेज़ कर दिए हैं.अमेरिका ने पिछले कुछ दिनों में ईरान को निशाना बनाते हुए अपने हमले तेज़ किए हैं.

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