Rupee News Today: फॉरेक्स ट्रेडर्स का कहना है कि तेल के बढ़ते दामों के बीच अमेरिकी डॉलर की खरीदारी जारी रहने के कारण रुपया दबाव में है. यह 96 के निशान के बहुत करीब मंडरा रहा है.
Rupee News Today: पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने भारत सहित दुनिया के कई देशों को प्रभावित किया है. विश्व के कई ऐसे देश हैं जिनकी अर्थव्यवस्था को इससे बड़ा तगड़ा झटका लगा है. जानकार बताते हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बाधित हो गया है और दुनिया की एनर्जी सप्लाई (तेल, गैस आदि) बुरे तरीके से प्रभावित हुई है. इस वजह से कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं. इस बीच भारतीय करेंसी रुपया में फिर से गिरावट दर्ज की गई है. शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में रुपये लगातार तीन सत्रों में नए निचले स्तर पर पहुंचने के बाद 30 पैसे गिरकर डॉलर के मुकाबले 95.94 पर खुला है.
रुपये में गिरावट की क्या हैं वजहें?
जानकारी के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी, मजबूत अमेरिकी डॉलर और पश्चिम एशिया में जारी संकट की चिंताओं की वजह से निवेशकों के दिलों-दिमाग पर बुरा असर पड़ा है. इसकी वजह से भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी जारी है और रुपये में गिरावट देखी गई. फॉरेक्स ट्रेडर्स का कहना है कि तेल के बढ़ते दामों के बीच अमेरिकी डॉलर की खरीदारी जारी रहने के कारण रुपया दबाव में है. यह 96 के निशान के बहुत करीब मंडरा रहा है. इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात से कोई सार्थक रिजल्ट नहीं निकला, खासकर अमेरिका-ईरान मोर्चे पर, जिससे निवेशकों की भावनाएं और भी कमजोर हो गईं.
पिछले बंद भाव से 30 पैसे की गिरावट
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार (Interbank Foreign Exchange Market) में, डॉलर के मुकाबले रुपये 95.86 पर खुला. रुपया अपने पिछले बंद भाव से 30 पैसे की गिरावट दर्शाता है. बता दें कि गुरुवार को भारतीय करेंसी रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.96 के नए रिकॉर्ड के साथ निचले स्तर पर कमजोर हुआ था. हालांकि, बाद में यह 2 पैसे की बढ़ते के साथ 95.94 पर बंद हुआ था.
क्यों बढ़ा डॉलर?
सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के एमडी अमित पबारी ने डॉलर की बढ़ती कीमत पर खास बातें कही हैं. उन्होंने कहा, “मजबूत अमेरिकी खुदरा बिक्री और स्थिर श्रम बाजार के आंकड़ों के बाद फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक कटौती की उम्मीदें कम होने से डॉलर इंडेक्स लगातार चौथे सत्र में बढ़ा है.” उन्होंने आगे कहा, “जब भी ग्लोबल स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है, तो डॉलर आमतौर पर बाजार के लिए पसंदीदा सुरक्षित स्थान बन जाता है. फिलहाल, रुपया घरेलू नीतिगत समर्थन और विदेशों में तेल, मुद्रास्फीति और डॉलर के वैश्विक दबाव के बीच फंसा हुआ है.”
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News Source: PTI
