Home Latest News & Updates छात्रों के भविष्य पर सुनवाई, 8 जून को दिल्ली हाईकोर्ट करेगी विचार, CBSE OSM प्रणाली के खिलाफ याचिका

छात्रों के भविष्य पर सुनवाई, 8 जून को दिल्ली हाईकोर्ट करेगी विचार, CBSE OSM प्रणाली के खिलाफ याचिका

by Sanjay Kumar Srivastava 2 June 2026, 4:12 PM IST (Updated 2 June 2026, 4:39 PM IST)
2 June 2026, 4:12 PM IST (Updated 2 June 2026, 4:39 PM IST)
छात्रों के भविष्य पर सुनवाई: 8 जून को दिल्ली हाईकोर्ट करेगी विचार, सीबीएसई OSM प्रणाली के खिलाफ जनहित याचिका

CBSE: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ऑनलाइन ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की गई है. याचिका में कहा गया है कि उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में स्कैनिंग दोष, बेमेल त्रुटियां और तकनीकी विफलताएं सामने आई हैं. इन कमियों के कारण परेशान छात्रों का भविष्य दांव पर नहीं लगाया जा सकता. कांग्रेस की छात्र शाखा NSUI ने 12वीं कक्षा की परीक्षा में सीबीएसई की ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर की है. NSUI ने मामले की स्वतंत्र जांच और प्रभावित छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं की मैन्युअल रीचेकिंग और भौतिक सत्यापन की मांग की है.

सीबीएसई ने मानी तकनीकी गड़बड़ी

याचिका में अदालत से प्रभावित छात्रों के पुनर्मूल्यांकन के लिए अधिकारियों को अपना पोर्टल एक महीने तक खुला रखने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है. इस मामले की सुनवाई 8 जून को हाईकोर्ट की अवकाशकालीन पीठ द्वारा किये जाने की संभावना है. याचिका के मुताबिक, सीबीएसई ने खुद माना है कि उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियां उपलब्ध कराने वाले पोर्टल में एक बड़ी तकनीकी खराबी थी. बहुत ही कम समय में 3,87,399 उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियों के लिए लगभग 1,27,146 आवेदन जमा किए गए. याचिकाकर्ता का तर्क है कि इतनी बड़ी संख्या में आवेदन छात्रों में परीक्षा प्रणाली के प्रति अत्यधिक चिंता और अविश्वास को दर्शाता है. इसे परिणाम पश्चात की सामान्य प्रक्रिया कहकर ख़ारिज नहीं किया जा सकता.

मैन्युअल सत्यापन की नहीं है व्यवस्था

याचिका में दावा किया गया है कि मौजूदा शिकायत निवारण तंत्र अपर्याप्त है. छात्रों के पास केवल सीमित डिजिटल उपाय बचे हैं, जबकि विवादित प्रतियों के मैन्युअल सत्यापन या स्वतंत्र पुन: जांच के लिए कोई सार्थक प्रणाली नहीं है. इस तकनीकी खराबी के कारण छात्रों को कॉलेज में प्रवेश, शैक्षणिक देरी, छात्रवृत्ति की हानि और दीर्घकालिक करियर क्षति का सामना करना पड़ रहा है. वकील ऋषव रंजन के माध्यम से दायर याचिका में अधिकारियों को भविष्य की डिजिटल मूल्यांकन प्रणालियों के लिए उचित सुरक्षा उपाय, प्रोटोकॉल और दिशानिर्देश तैयार करने और लागू करने का निर्देश देने की मांग की गई है. जिन छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं गायब या धुंधली हैं, उन्हें प्रतिपूरक उच्च अंक देने के लिए भी प्रार्थना की गई है. याचिका में केंद्र और सीबीएसई पक्षकार हैं.

छात्रों का न हो शैक्षणिक नुकसान

इस बीच, एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा कि मूल्यांकन प्रक्रिया में तकनीकी और प्रशासनिक विफलताओं के कारण छात्रों को शैक्षणिक नुकसान नहीं होना चाहिए. संगठन द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि एनएसयूआई ने अदालत के समक्ष दृढ़ता से तर्क दिया है कि परीक्षा प्राधिकरण द्वारा लागू की गई त्रुटिपूर्ण प्रणाली के कारण छात्रों को शैक्षणिक नुकसान उठाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है. इसमें कहा गया है कि यह मामला महत्वपूर्ण है क्योंकि 1.29 लाख से अधिक छात्रों ने सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया है, जबकि लगभग 1.11 लाख छात्रों को 12वीं कक्षा की परीक्षा में असफल घोषित किया गया था. एनएसयूआई ने कहा कि याचिका ऋषव रंजन के अलावा वकील अजय छिकारा, उमर होदा और ईशा बख्शी के माध्यम से दायर की गई है.

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News Source: PTI

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