Jharkhand News : पारसनाथ जोन में चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियान के तहत गिरिडीह पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है. भाकपा (माओवादी) संगठन की एरिया कमेटी सदस्य अनिता किरस्कू उर्फ बबिता ने झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति नई दिशा–एक नई पहल से प्रभावित होकर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. बबिता ने पुलिस केंद्र, गिरिडीह में पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार द्वितीय कमान अधिकारी अभिनव आनंद तथा अपर पुलिस अधीक्षक सुरजीत कुमार की उपस्थिति में सरेंडर किया.
सक्रिय रूप से कार्य कर रही थी महिला
अनिता किरस्कू उर्फ बबिता लंबे समय से भाकपा (माओवादी) संगठन से जुड़ी हुई थी और संगठन के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही थी. वह पारसनाथ और आसपास के जंगलों में सक्रिय माओवादी दस्तों के साथ रहकर संगठन की गतिविधियों में शामिल रही. सुरक्षा एजेंसियों के लिए उसकी गतिविधियां लंबे समय से चिंता का विषय थीं.
25 लाख रुपये के इनामी की पत्नी हैं बबिता
बबिता का आत्मसमर्पण इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह 25 लाख रुपये के इनामी माओवादी सब-जोनल/स्क्वाड कमांडर अजय महतो उर्फ टाइगर की पत्नी है. अजय महतो को गिरिडीह पुलिस ने महज तीन दिन पहले एक विशेष अभियान के दौरान गिरफ्तार किया था. उसके बाद से सुरक्षा एजेंसियां संगठन के अन्य सक्रिय सदस्यों पर लगातार दबाव बनाए हुए थीं. माना जा रहा है कि पुलिस की लगातार कार्रवाई और सरकार की पुनर्वास नीति के कारण बबिता ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया.
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म्मानजनक जीवन जी सकें
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि झारखंड सरकार की नई दिशा–एक नई पहल नीति का उद्देश्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय उग्रवादियों को हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है. इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों को पुनर्वास, आर्थिक सहायता, कौशल विकास और रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान है, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें.
गिरिडीह पुलिस ने कहा कि पारसनाथ जोन में नक्सल विरोधी अभियान लगातार जारी रहेगा. पुलिस और सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई के कारण माओवादी संगठन कमजोर पड़ रहा है और कई सदस्य आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं. अधिकारियों ने इसे अभियान की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि आने वाले दिनों में भी ऐसे अभियान और तेज किए जाएंगे.
सक्रिय नक्सलियों से की अपील
पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार ने कहा कि जो भी उग्रवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए सरकार की पुनर्वास नीति पूरी तरह खुली है. उन्होंने अन्य सक्रिय नक्सलियों से भी अपील की कि वे हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करें और सामान्य जीवन की शुरुआत करें.
पारसनाथ क्षेत्र लंबे समय से नक्सल गतिविधियों के कारण संवेदनशील रहा है. हालांकि, हाल के वर्षों में पुलिस और सुरक्षा बलों के लगातार अभियान, खुफिया तंत्र की सक्रियता तथा सरकार की पुनर्वास नीति के कारण इस क्षेत्र में माओवादी संगठन को लगातार झटके लग रहे हैं. अजय महतो की गिरफ्तारी और अब उसकी पत्नी अनिता किरस्कू उर्फ बबिता के आत्मसमर्पण को सुरक्षा एजेंसियां नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी सफलता मान रही हैं. पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई से संगठन की गतिविधियों पर और प्रभाव पड़ेगा तथा क्षेत्र में शांति और विकास को गति मिलेगी.
- झारखंड से विशाल भारद्वाज की रिपोर्ट
