Nuclear Submarine : भारत ने अपनी तीसरी सबमरीन को तैयार कर लिया है और यह परीक्षण के अंतिम चरण में है. इसके बाद पनडुब्बी को नौसेना को सौंप दिया जाएगा.
Nuclear Submarine : भारत अपनी समुद्री सैन्य शक्ति और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने की दिशा में तेजी कार्य कर रहा है. देश की तीसरी सबसे बड़ी बैलिस्टीक मिसाइल सबमरीन (SSBN) INS अरिधमन इस साल नेवी में शामिल हो जाएगी. साथ ही जिस दौरान इसको नेवी का हिस्सा बनाया जाएगा. वह वक्त ये ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ के साथ मेल खाएगी. वहीं, भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल डीके त्रिपाठी ने पिछले साल दिसंबर में संकेत दिया था कि INS अरिधमन को 2026 में कमीशन किया जाएगा. फिलहाल यह अपने परीक्षण के अंतिम चरण में है और जल्द ही नौसेना का हिस्सा हो जाएगी.
नेवी में INS अरिधमन के शामिल होने के बाद भारत के पास पहली बार तीन पनडुब्बियां हो जाएंगी. साथ ही यह भारत को कंटीन्यूअस एट-सी डिटरेंस की रणनीति हासिल करने के लिए काफी करीब पहुंच जाएगा. इसका सीधा मतलब है कि 365 दिन भारत की कम से कम एक सबमरीन समुद्र में गश्त लगाती रहेगी.
क्या इस सबमरीन में खास?
एडवांस टेक्नोलॉजी वेसल (ATV) प्रोजेक्ट के तहत विशापत्तनम में तैयार किया गया है और यह दो अन्य सबमरीन के मुकाबले घात के साथ एडवांस भी है. इस पनडुब्बी में K-4 बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस होगी, जिसकी मारक क्षमता 3500 किलोमीटर है. इसके अलावा यह 24 K-15 सागरिका मिसाइलों को भी ले जाने की क्षमता रखता है. बताया जा रहा है कि इस सबमरीन में 83 मेगावाट का प्रेशराइज्ड वॉटर रिएक्टर भी लगा है. साथ ही दुश्मनों की नजरों से बचने के लिए इसमें एनेकोइक टाइल्स लगाई गई है, जो शोर को काफी कम कर देती है.
रणनीतिक तैयारी के लिए शानदार
INS अरिधमन का कमीशन होना भारत के न्यूनतम विश्वसनीय निवारण के परमाणु सिद्धांत का एक प्रमुख स्तंभ है. नौसेना के प्रमुख स्तंभ है. वहीं, नौसेना के प्रमुख ने एक बयान दिया, जिसमें उन्होंने बताया कि पनडुब्बी ने लगभग सभी परीक्षाओं को पास कर लिया है और इस गर्मियों से इसको नेवी का हिस्सा बना दिया जाएगा. इस सबमरीन के साथ समुद्री सीमाओं पर भारत की रणनीतिक पहुंच और सर्वाइल सुनिश्चि करेगा.
यह भी पढ़ें- MP : जबलपुर में सांप्रदायिक तनाव, मंदिर में की गई तोड़फोड़ और पथराव; भारी पुलिस बल तैनात
