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पते पर नहीं मिली कंपनी, सरकार को लगाया 37 लाख का चूना, तीन आरोपी दबोचे गए, ऐसे खुली पोल

by Sanjay Kumar Srivastava
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पते पर नहीं मिली कंपनी, सरकार को लगाया 37 लाख का चूना, तीन आरोपी दबोचे गए, ऐसे खुली पोल

GST Fraud: उत्तर प्रदेश के लखनऊ में फर्जी कंपनी के जरिए लाखों की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है. आरोपियों ने कंपनी बनाने के लिए फर्जी बिजली बिल का इस्तेमाल किया था.

GST Fraud: उत्तर प्रदेश के लखनऊ में फर्जी कंपनी के जरिए लाखों की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है. आरोपियों ने कंपनी बनाने के लिए फर्जी बिजली बिल का इस्तेमाल किया था. आरोपियों ने धीरे-धीरे सरकार को 37 लाख का चूना लगा दिय़ा. धोखाधड़ी की जानकारी मिलने पर शासन में हड़कंप मच गया. इस मामले में तेजी दिखाते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस ने शुक्रवार को GST की चोरी करके सरकार को लगभग 37 लाख रुपये का नुकसान पहुंचाने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों ने जाली दस्तावेजों, जिनमें एक फर्जी बिजली बिल भी शामिल है, का इस्तेमाल करके एक फर्जी कंपनी बनाई थी. पिछले साल 3 नवंबर को लखनऊ (डिवीजन-19) के राज्य कर उपायुक्त अशोक कुमार त्रिपाठी द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने महानगर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया.

के एस एंटरप्राइजेज निकली फर्जी

पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने महानगर क्षेत्र के एक घर से संचालित होने वाली के एस एंटरप्राइजेज नामक एक फर्जी कंपनी बनाई और लौह अपशिष्ट व स्क्रैप के व्यापार के लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पंजीकरण प्राप्त किया. जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि कंपनी को एक जाली बिजली बिल और फर्जी पते का उपयोग करके पंजीकृत किया गया था. दिए गए पते पर रहने वाले मकान मालिक ने पुलिस को बताया कि उनके परिसर से ऐसा कोई कार्यालय या जीएसटी कंपनी संचालित नहीं हो रही है. पुलिस के अनुसार आरोपियों ने गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ उठाया और विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से लगभग 4.70 करोड़ रुपये के लेनदेन किए, जिसके परिणामस्वरूप जीएसटी राजस्व में 37,52,545.32 रुपये का नुकसान हुआ. जिसमें उत्तर प्रदेश के खजाने को करीब 19 लाख रुपये का नुकसान शामिल है.

सरगना का रहा आपराधिक इतिहास

पुलिस ने लखनऊ निवासी दीपक कुमार (25) और प्रशांत तिवारी (25) तथा हरदोई जिले के संडीला निवासी कैलाश मौर्य (32) को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, सरगना दीपक ने अपने नाम से बैंक खाते संचालित किए और विभिन्न कंपनियों के साथ लेनदेन किया. लगभग 15 लाख रुपये चार चेकों के माध्यम से प्रशांत तिवारी को हस्तांतरित किए गए, जिन्होंने इस राशि का उपयोग व्यक्तिगत खर्चों के लिए किया. कैलाश मौर्य पर फर्म की फर्जी मुहर बनवाने और धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए बैंक खाते खुलवाने में मदद करने का आरोप है. पुलिस ने बताया कि दीपक का आपराधिक इतिहास है. उस पर 2019 में हत्या और उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट के तहत केस दर्ज है. अन्य आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जा रही है. पुलिस ने बताया कि अन्य फरार आरोपियों में वह व्यक्ति भी शामिल है जिसके नाम पर जीएसटी पंजीकरण कराया गया था. आगे की जांच चल रही है.

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News Source: Press Trust of India (PTI)

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