Chhatrapati Shivaji Maharaj: अगर आप भी रितेश देशमुख की फिल्म राजा शिवाजी देखने जाने वाले हैं या देख चुके हैं, तो आपको शिवाजी महाराज के जीवन से जुड़े ये तथ्य जरूर जानने चाहिए
11 May, 2026
भारत की धरती पर कई ऐसे वीर योद्धा हुए हैं, जिन्होंने विदेशी अक्रांताओं से अपनी भूमि की रक्षा की है. ऐसे ही एक वीर थे छत्रपति शिवाजी महाराज. भारतीय इतिहास में छत्रपति शिवाजी महाराज सिर्फ एक राजा नहीं हैं, बल्कि वे स्वराज्य, साहस, रणनीति और सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक हैं. यही वजह है कि भारतीय सिनेमा, खासकर बॉलीवुड और मराठी फिल्मों ने बार-बार उनके जीवन और संघर्षों को बड़े पर्दे पर दिखाने की कोशिश की है. शिवाजी महाराज पर बनी फिल्में सिर्फ मनोरंजन का जरिया नहीं हैं, बल्कि भारत के युवाओं को इतिहास, देशभक्ति, लीडरशिप और आत्म-सम्मान का संदेश भी देती हैं. आज के समय में, जब लोगों की ऐतिहासिक हस्तियों में दिलचस्पी बढ़ रही है, तो शिवाजी महाराज पर बनी फिल्मों का महत्व और भी बढ़ जाता है. ये फिल्में न सिर्फ मराठा इतिहास को जिंदा रखती हैं बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और बहादुरी की परंपरा को नई पीढ़ियों तक पहुंचाने का काम भी करती हैं.
हाल ही में शिवाजी महाराज पर आधारित फिल्म ‘राजा शिवाजी’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई है, जिसका क्रेज सोशल मीडिया पर नजर आ रहा है. इसमें रितेश देशमुख ने शिवाजी महाराज की भूमिका निभाई है. उनके साथ सलमान खान समेत कई बड़े कलाकारों ने भारतीय इतिहास की झलक को इस फिल्म के जरिए दिखाने की कोशिश की है. अगर आप भी इस फिल्म को देखने जाने वाले हैं या देख चुके हैं, तो आपको शिवाजी महाराज के जीवन से जुड़ी ये अहम जानकारी जरूर पढ़नी चाहिए, जिससे आपको फिल्म की कहानी बेहतरीन तरीके से समझ आएगी.

कौन थे छत्रपति शिवाजी महाराज?
शिवाजी को छत्रपति की उपाधि विरासत में नहीं मिली थी, बल्कि यह उनके ‘हिंदवी स्वराज्य’ और कड़े संघर्ष का नतीजा था. शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी, 1630 को भोसले वंश में हुआ था. उनके पिता शाह जी भोसले, बीजापुर की आदिलशाही सल्तनत में सरदार थे. लेकिन शिवाजी महाराज ने विदेशी ताकतों की सेवा करने के बजाय स्वतंत्रता का सपना देखा. उन्होंने अपनी माता जीजाबाई से धर्म और संरक्षक दादोजी कोंडदेव से युद्ध की शिक्षा ली. 15-16 साल की उम्र में उन्होंने रायरेश्वर मंदिर में ‘हिंदवी स्वराज्य’ की शपथ ली. इसी समय से मराठा राज्य की स्थापना के लिए संघर्ष शुरू हुआ. तोरणा किले पर जीत हासिल की गई, जो उनके सैन्य अभियान की पहली बड़ी सफलता थी.
1656 में, छत्रपति शिवाजी महाराज ने रायगढ़ के शासक यशवंतराव मोरे को हराकर किला जीत लिया. शिवाजी महाराज ने रायरी का नाम बदलकर रायगढ़ रखा और इसे एक बड़ी राजधानी के तौर पर विकसित किया. 1674 में रायगढ़ किले में उन्हें औपचारिक रूप से “छत्रपति” घोषित किया गया. इस राज्याभिषेक ने उन्हें एक स्वतंत्र और संप्रभु राजा के रूप में स्थापित किया, जो किसी सुल्तान या सम्राट के अधीन नहीं थे. 1680 में शिवाजी महाराज की मृत्यु के बाद उनके बेटे संभाजी महाराज रायगढ़ की गद्दी पर बैठे. आदिलशाह ने 1659 में शिवाजी को हराने के लिए सेनापति अफजल खान को भेजा था. शिवाजी महाराज ने चतुराई से गले मिलते हुए उसका वध कर दिया था. उनकी यह तस्वीर आपने सोशल मीडिया पर जरूर देखी होगी.
गुरिल्ला युद्ध और भारतीय नौसेना के जनक
गुरिल्ला युद्ध- छत्रपति शिवाजी महाराज को भारत में गुरिल्ला युद्ध नीति का जनक कहा जाता है. यह एक ऐसी खास युद्ध नीति है, जिसके तहत शत्रु को थकाकर उस पर अचानक हमला किया जाता है. शिवाजी ने इस युद्ध तकनीक को पहाड़ियों, घने जंगलों और घाटियों में अपनी ताकत बनाया. उनकी सेना हर जंगल और घाटी को अच्छी तरह जानती थी, लेकिन दुश्मनों के सैनिक वहां फंस जाते थे. गुरिल्ला युद्ध में मराठा सेना दुश्मन की तैयारी से पहले ही उनपर हमला कर देती थी. वे अक्सर रात में खराब मौसम में हमला करते थे ताकि दुश्मन को संभलने का मौका न मिले.

पहली भारतीय नौसेना बनाई- शिवाजी महाराज को भारतीय नौसेना का जनक कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने सबसे पहले नौसेना की स्थापना की थी. उन्होंने चुपके से अपने वफादार सैनिकों और लोकल कारीगरों को जहाज बनाने की तकनीक सीखने के लिए विदेशी इंजीनियरों के पास भेजा. उनका मकसद यह पक्का करना था कि मराठा साम्राज्य भविष्य में किसी विदेशी ताकत पर निर्भर न रहे. शिवाजी महाराज ने कोंकण इलाके के कम गहरे पानी और चट्टानी किनारों को ध्यान में रखते हुए हल्के और तेज चलने वाले जहाज बनाए. उन्होंने धीरे-धीरे 500 से ज्यादा जहाज बनाए.
अफजल खान के साथ बैठक
वैसे तो शिवाजी महाराज ने अपने जीवन काल में कई युद्ध जीते, लेकिन शिवाजी महाराज और अफजल खान की लड़ाई मराठा इतिहास की चर्चित घटनाओं में से एक है, जिसमें शिवाजी महाराज ने अपनी चतुराई से अफजल खान को मौत के घाट उतारा था. दरअसल, बीजापुर की बड़ी बेगम ने अपने सेनापति अफजल खान को विशाल सेना के साथ शिवाजी को मारने के लिए भेजा. शिवाजी महाराज जानते थे कि इतनी बड़ी सेना से केवल चालाकी से लड़ा जा सकता है. उन्होंने अपने दूत को अफजल खान के पास यह संदेश देने के लिए भेजा कि वे डरे हुए हैं और मिलकर क्षमा मांगना चाहते हैं. शिवाजी महाराज ने खान को प्रतापगढ़ किले के पास बुलाया. यह तय हुआ कि कोई भी हथियार नहीं लाएगा. लेकिन दोनों ही एक दूसरे से वाकिफ थे.
शामियाना लगाया गया, जहां जाने से पहले शिवाजी महाराज ने अपने कपड़ों के अंदर लोहे का कवच पहन लिया और अपने हाथों में बाघ नख छिपा लिया. जैसे ही अफजल खान ने गले मिलने के बहाने उनकी गर्दन दबाई और अपने खंजर से हमला किया, लेकिन महाराज के कवच ने उनकी रक्षा की. पलक झपकते ही महाराज ने अपने बाघ के पंजों से खान का पेट फाड़ दिया और वह मारा गया. इसके बाद महाराज ने तोप दागकर अपनी सेना को संकेत दिया. संकेत मिलते ही मराठा सेना ने जंगलों में छिपे सैनिकों पर हमला बोल दिया.

बॉलीवुड में शिवाजी महाराज की लोकप्रियता क्यों बढ़ रही है?
बॉलिवुड में राष्ट्रवादी और सांस्कृतिक फिल्मों को चलन बढ़ रहा है. भारतीय योद्धाओं के ऊपर कई फिल्में बन रही हैं. पिछले कुछ वर्षों की बात करें, तो हमें लगातार फिल्मों के जरिए मराठा इतिहास के बारे में जानने को मिल रहा है. महाराष्ट्र में शिवाजी महाराज का बहुत सम्मान किया जाता है, यहां तक कि उन्हें भगवान की तरह पूजा जाता है, लेकिन अब पूरे भारत में लोग उनके बारे में जानना चाहते हैं. इसका एक कारण यह भी है कि भारतीय राजनीति और सार्वजनिक चर्चा में ऐतिहासिक व्यक्तित्वों पर ज्यादा चर्चा होने लगी है. सोशल मीडिया पर लोग उनके बारे में लिखते और पढ़ते हैं. OTT प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है.
मराठा इतिहास पर बनी बॉलिवुड फिल्में
तान्हाजी: द अनसंग वॉरियर- साल 2020 में आई यह फिल्म शिवाजी महाराज के सबसे विश्वसनीय सूबेदार तान्हाजी मालुसरे के जीवन में आधारित है. फिल्म में कोंढाणा किले पर विजय की कहानी दिखाई गई है कि किस तरह से तान्हाजी ने अपने बुद्धि और बल से कोंढाणा का किला जीता था. इसमें अजय देवगन ने तान्हाजी का किरदार निभाया है और शरद केलकर ने छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमिका निभाई है. तान्हाजी की कहानी को लोगों ने खूब पसंद किया.
हर हर महादेव: फिल्म हर हर महादेव 2022 में रिलीज हुई थी. यह छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और स्वराज्य स्थापित करने के उनके संघर्ष पर आधारित है. फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे शिवाजी महाराज ने अपनी हिम्मत, रणनीति और लीडरशिप से आदिलशाही सेना का सामना किया. इस फिल्म में सुबोध भावे ने छत्रपति शिवाजी महाराज का रोल किया है और शरद केलकर ने बाजीप्रभु देशपांडे का रोल किया है.
छावा: यह फिल्म 2025 में रिलीज हुई थी. फिल्म छत्रपति शिवाजी महाराज के बेटे संभाजी महाराज के जीवन और उनके अदम्य साहस पर आधारित है. फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे संभाजी महाराज ने मुगलों के खिलाफ मराठा साम्राज्य की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी और अत्याचार सहे. विक्की कौशल ने संभाजी महाराज का रोल किया है और रश्मिका मंदाना ने महारानी येसुबाई का रोल किया है. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत हिट हुई थी और विक्की कौशल ने इसमें शानदार एक्टिंग की है.
राजा शिवाजी को पसंद कर रहे लोग

राजा शिवाजी: फिल्म राजा शिवाजी 1 मई, 2026 को रिलीज हुई है. यह फिल्म छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, उनकी बहादुरी और हिंदवी स्वराज की स्थापना पर आधारित है. फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे शिवाजी महाराज ने अपनी समझदारी, रणनीति और बहादुरी से मराठा साम्राज्य को मजबूत किया.
राजा शिवाजी में रितेश देशमुख ने छत्रपति शिवाजी महाराज का रोल किया है और साथ में डायरेक्शन भी किया है. इस फिल्म में एक दो नहीं, बल्कि कई दिग्गज सितारों ने काम किया हैं. संजय दत्त ने अफजल खान, अभिषेक बच्चन ने संभाजी महाराज, सलमान खान ने जीवा महाला, जेनेलिया डिसूजा ने महारानी सईबाई, भाग्य श्री ने राजमाता जीजाबाई, विद्या बालन ने बड़ी बेगम, सचिन खेडेकर ने शाह जी भोसले, फरदीन खान ने मुगल सम्राट शाहजहां, अमोल गुप्ते ने मोहम्मद आदिल शाह, बोमन ईरानी ने पीर बाबा और जितेंद्र जोशी ने पंत गोपीनाथ बोकिल की भूमिका निभाई है.
रितेश देशमुख की फिल्म ‘राजा शिवाजी’ ने रिलीज के 10 दिनों के अंदर भारत में 81 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर ली है. राजा शिवाजी 100 करोड़ के बजट में बनी है. आने वाले वीकेंड्स में यह अच्छा कलेक्शन कर सकती है. फिल्म अन्य देशों में रिलीज नहीं की गई है, इसलिए इसका वर्ल्डवाइड कलेक्शन और डॉमेस्टिक कलेक्शन एक ही है. कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि फिल्म की ऐतिहासिक कहानी दर्शकों को काफी पसंद आ रही है और यह फिल्म सिनेमाघरों में उनका खूब मनोरंजन भी कर रही है.
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