Home Latest News & Updates छत्तीसगढ की कला को विदेशों तक पहुंचाने वाली पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन, पीएम ने जताया दुख

छत्तीसगढ की कला को विदेशों तक पहुंचाने वाली पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन, पीएम ने जताया दुख

by Neha Singh 5 July 2026, 10:58 AM IST (Updated 5 July 2026, 11:00 AM IST)
5 July 2026, 10:58 AM IST (Updated 5 July 2026, 11:00 AM IST)
Teejan Bai Death

Teejan Bai Death: छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कहानी सुनाने की कला को अपनी दमदार आवाज और एक्सप्रेसिव स्टाइल से दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचाने वाली मशहूर पंडवानी लोक गायिका तीजन बाई का निधन हो गया. उन्होंने रविवार को रायपुर के AIIMS में 70 साल की उम्र में आखिरी सांस ली. तीजन बाई लंबे समय से बीमार चल रही थीं. रायपुर AIIMS के एक डॉक्टर ने बताया कि तीजन बाई ने सुबह 3.15 बजे अस्पताल में आखिरी सांस ली. 27 मई से उनका इलाज चल रहा था.

पीएम मोदी और सीएम साय ने जताया दुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीजन बाई के निधन पर दुख जताया. पीएम ने एक्स पर लिखा, मशहूर पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के गुजर जाने से मुझे बहुत दुख हुआ है. अपनी शानदार परफॉर्मेंस से उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस लोक कला को दुनिया भर में एक खास पहचान दी. उनका जाना कला और संस्कृति की दुनिया के लिए एक ऐसा नुकसान है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती. दुख की इस घड़ी में, मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और चाहने वालों के साथ हैं. ओम शांति.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि भारतीय लोक कला और संस्कृति में उनके बेमिसाल योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा. वह सुबह दिग्गज कलाकार को श्रद्धांजलि देने के लिए AIIMS गए थे. साय ने X पर कहा, “पद्म विभूषण अवॉर्डी और दुनिया भर में मशहूर पंडवानी आर्टिस्ट डॉ. तीजन बाई, छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की अमर कहानीकार के निधन के बारे में जानकर बहुत दुख हुआ. अपनी अनोखी सिंगिंग स्टाइल, असाधारण टैलेंट और लोक परंपराओं को बचाने के पक्के इरादे से, उन्होंने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को ग्लोबल स्टेज तक पहुंचाया. उन्होंने कहा कि भारतीय लोक कला और संस्कृति में उनके बेमिसाल योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा.”

गानों से लेकर महाकाव्य सुनाया

1956 में दुर्ग जिले के गनियारी गांव में एक आम परिवार में जन्मी, तीजन बाई को कम उम्र से ही महाभारत की कहानियां सुनने और सुनाने का शौक था. समाज के विरोध और पैसे की तंगी के बावजूद, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक कला पंडवानी की देश की सबसे मशहूर कलाकार बन गईं. पंडवानी में नाटकीय अंदाज में कहानी, गाना और संगीत के साथ महाकाव्य के किस्से सुनाए जाते हैं.

अपनी दमदार आवाज, स्टेज पर जबरदस्त मौजूदगी और एक्सप्रेसिव स्टाइल के लिए जानी जाने वाली तीजन बाई ने पंडवानी को एक क्षेत्रीय लोक परंपरा से दुनियाभर में मशहूर कला के रूप में बदल दिया. उन्होंने भारत और विदेशों में, जिसमें अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जापान, रूस, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी शामिल हैं, बड़े पैमाने पर परफॉर्म किया, जिससे छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दुनियाभर में पहचान मिली. भारतीय लोक कलाओं में उनके शानदार योगदान के लिए, उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया.

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News Source: PTI

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