Fruit Juice Benefits: आजकल की भागदौड़ वाली बिजी लाइफस्टाइल में, लोगों के ऊपर प्रेशर बढ़ गया है. व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में संतुलन बनाना भी मुश्किल होता जा रहा है. करियर से लेकर लव लाइफ और फैमिली तक, हर व्यक्ति की जिंदगी में उसकी अपनी कई परेशानियां होती हैं. इन सब की टेंशन से उसकी सेहत पर भी असर पड़ता है. टेंशन दूर करने या मूड ठीक करने के लिए लोग अलग-अलग तरीके अपनाते हैं- कोई गाने सुनता है, कोई टहलने जाता है, तो कोई अपनी पसंद की चीजें खाकर सुकून पाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सुबह के रूटीन में एक गिलास फलों का जूस पीना आपके मानसिक स्वास्थ्य को ठीक कर सकता है?
हाल ही में हुई एक स्टडी ने इस बारे एक चौंकाने वाला खुलासा है, जो हमारे रोज के खान-पान और डिप्रेशन के बीच के रिश्ते के बार बारे में बताता है. चार हफ्तों के एक छोटे से ट्रायल में, शोधकर्ताओं ने देखा कि जिन लोगों ने अपने रोजाना के खाने में 100 प्रतिशत फलों का जूस या स्मूदी शामिल की, उनमें डिप्रेशन का स्तर कम हुआ. इससे पता चलता है कि फल न केवल शरीर को पोषण देते हैं या ताजगी लाते हैं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं.
एक गिलास जूस से ठीक होगा मूड
यूके की ‘5-a-day’ (दिन में 5 बार फल और सब्जियां खाने की) गाइडलाइन के तहत, रोजाना एक गिलास 100% फलों का जूस या स्मूदी पीने से मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है. यह जानकारी UK की न्यूकैसल यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च से सामने आई है. एक रैंडम कंट्रोल्ड ट्रायल में, ऐसे 42 वयस्कों को शामिल किया गया जो आमतौर पर बहुत कम फल और सब्जियां खाते थे. उन्हें अपना सेवन बढ़ाने के लिए मदद दी गई. उन्हें ‘5-a-day’ के लक्ष्य को पूरा करने के लिए रोजाना फल और सब्जियां खिलाई गईं. दूसरे ग्रुप को ‘5-a-day’ के लक्ष्य के साथ-साथ, रोजाना एक गिलास फलों का जूस या स्मूदी लेने के लिए भी कहा गया.
चार सप्ताह के बाद, दोनों ग्रुप ने अपने खान-पान में फलों और सब्जियों की मात्रा बढ़ा दी थी. जिन लोगों ने फलों का जूस या स्मूदी को अपनी डाइट में शामिल किया था, उनमें डिप्रेशन का स्तर कम पाया गया. इस रिसर्च के नतीजों को ‘ब्रिटिश जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन’ में प्रकाशित किया गया है और इसे ‘फ्रूट जूस साइंस सेंटर’ से फंडिंग मिली थी. शोधकर्ताओं का कहना है कि ये नतीजे इस बात को पुख्ता करते हैं कि खान-पान में किए गए छोटे और व्यावहारिक बदलाव मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकते हैं.

‘साइंसडेली’ के अनुसार, डॉ. कर्टनी नील कहती हैं: “हालांकि ज्यादातर लोग जानते हैं कि दिन में 5 बार फल और सब्जियां खाना सेहत के लिए अच्छा है, लेकिन कई लोगों के लिए ऐसा कर पाना मुश्किल होता है. हमारे ट्रायल से पता चला कि जिन लोगों के खान-पान में फल और सब्जियां कम थीं, उन्हें ‘5-a-day’ के लक्ष्य को पूरा करने में आने वाली आम रुकावटों को दूर करने के लिए आर्थिक और शैक्षिक मदद दी गई. इससे वे अपनी डाइट में सार्थक बदलाव करने में सफल रहे.” ‘साइंसडेली’ में डॉ. नील के हवाले से कहा गया है, “हमने पाया कि रोजाना एक छोटा गिलास 100% फलों का जूस या स्मूदी पीने जैसे आसान और किफायती उपाय, लोगों को ‘5-ए-डे’ के लक्ष्य तक पहुंचने में मदद कर सकते हैं. इससे मानसिक स्वास्थ्य को भी फायदा हो सकता है.”
‘5-ए-डे’ लक्ष्य तक कैसे पहुंचे
सलाह के अनुसार साबुत फल और सब्जियां खाने से पुरानी बीमारियों का खतरा कम होता है और लंबे समय तक स्वास्थ्य बेहतर रहता है. इन फायदों के बावजूद, यूके में 5 में से 1 से भी कम (17%) वयस्क और 10 में से केवल 1 किशोर ही वर्तमान में ‘5-ए-डे’ की सलाह का पालन कर रहे हैं. 4 हफ्ते के इस ट्रायल में शामिल सभी लोग, अध्ययन शुरू होने के समय, रोजाना दो या उससे कम फल और सब्जियां खा रहे थे. लोगों को अपना सेवन बढ़ाकर ‘5-ए-डे’ तक पहुंचाने में मदद के लिए सहायता दी गई.
एक ग्रुप लोगों को केवल साबुत फल और सब्जियां खाकर इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए कहा गया. वहीं दूसरे ग्रुप ने साबुत फल और सब्ज़ियों के साथ-साथ रोजाना एक गिलास फलों का जूस या स्मूदी भी लेना शुरू किया. शोधकर्ताओं ने चिंता और अवसाद (डिप्रेशन) के लक्षणों को मापने वाले प्रमाणित प्रश्नावली (questionnaires) का उपयोग करके प्रतिभागियों के मूड में आए बदलावों का मूल्यांकन किया. जिन प्रतिभागियों ने साबुत फलों के साथ-साथ फलों का जूस और स्मूदी भी ली, उनमें डिप्रेशन का स्कोर कम पाया गया. 27-पॉइंट के पैमाने पर उनका स्कोर 2.52 पॉइंट कम था. शोधकर्ताओं ने इस अंतर को ‘मामूली लेकिन सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण’ बताया.
फाइबर का सेवन भी बढ़ा
अध्ययन के दौरान डाइट संबंधी जानकारी से पता चला कि दोनों ग्रुप के लोगों की डाइट में फाइबर की मात्रा लगभग 8-10 ग्राम तक बढ़ गई थी. इस नतीजे से पता चलता है कि जूस लेने के बावजूद, प्रतिभागियों ने अपनी डाइट में फाइबर से भरपूर अन्य फलों और सब्जियों को शामिल करना बंद नहीं किया. वेबसाइट के अनुसार, इस अध्ययन में 42 प्रतिभागी शामिल थे. फलों के जूस में मौजूद शुगर को लेकर चिंताएं होने के बावजूद, शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों ने इस अध्ययन में फलों का जूस या स्मूदी ली, उनमें 4 हफ्ते बाद भी मेटाबोलिक स्वास्थ्य संकेतकों (metabolic health markers) पर कोई बुरा असर नहीं पड़ा.
‘गहन शोध की जरूरत’
न्यूकैसल यूनिवर्सिटी में न्यूट्रिशन और एजिंग के लेक्चरर और इस अध्ययन के वरिष्ठ लेखकों में से एक, डॉ. ओलिवर शैनन ने कहा “यूके में जीवन-यापन की बढ़ती लागत को देखते हुए, ताजे फलों और सब्जियों की कीमतें अक्सर उन लोगों के लिए एक बाधा बन जाती हैं जो इन्हें अपनी डाइट में ज्यादा शामिल करना चाहते हैं. हमारे अध्ययन से पता चलता है कि रोज एक गिलास फलों का जूस या स्मूदी पीना इसका एक समाधान हो सकता है, जिससे लोगों को रोजाना 5 फल और सब्जियां खाने का लक्ष्य पूरा करने में मदद मिल सकती है.” उन्होंने आगे कहा “यह पता चलना कि जो लोग फलों का जूस पीते हैं, उनमें डिप्रेशन का स्तर कम होता है, एक सकारात्मक संकेत है. इस पर और अधिक शोध किए जाने की जरूरत है. खासकर उन लोगों के मामले में जिनका मानसिक स्वास्थ्य अच्छा नहीं है. यह उन अध्ययनों का समर्थन करता है, जिनके अनुसार खट्टे फलों (सिट्रस) का जूस पीने से मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह बेहतर होता है और सोचने-समझने की क्षमता (कॉग्निटिव फंक्शन) में सुधार आता है. खान-पान में छोटे-छोटे बदलाव – जैसे फलों का सेवन बढ़ाना, जिसमें रोज एक गिलास जूस पीना भी शामिल है, मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकते हैं.”

अध्ययन कैसे किया गया
4 सप्ताह के इस ट्रायल में 42 लोग शामिल थे, जो रिसर्च की शुरुआत में रोजाना दो या उससे कम फल और सब्जियों खाते थे. प्रतिभागियों को रैंडम तरीके से तीन ग्रुपों में से किसी एक में रखा गया. पहले ग्रुप में 14 लोग थे, जो ‘कंट्रोल’ ग्रुप के रूप में थे. उनसे कहा गया कि वे अपना सामान्य खान-पान जारी रखें.
दूसरे ग्रुप के 14 प्रतिभागियों को अपने खान-पान में फल और सब्जियों की मात्रा बढ़ाकर रोजाना ‘5-ए-डे’ तक ले जाने के लिए मदद की गई. इन लोगों को केवल साबुत फल और सब्जियां दी गईं.
बाकी बचे 14 प्रतिभागियों को भी साबुत फलों और सब्जियों के जरिए रोजाना ‘5-ए-डे’ तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित किया गया, लेकिन इसके साथ ही उन्हें रोजाना एक गिलास फलों का जूस या स्मूदी भी दी गई.
तीनों ग्रुप को हर हफ्ते £10 दिए गए, ग्रुप 2 और 3 के प्रतिभागियों को कुछ शिक्षण सामग्री भी दी गई, ताकि उन्हें अपने खान-पान में सुझाए गए बदलाव करने में मदद मिल सके. शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों के मूड का आकलन करने के लिए एंग्जायटी (GAD-7 – जनरलाइज्ड एंग्जायटी डिसऑर्डर 7) और डिप्रेशन (PHQ-9 – पेशेंट हेल्थ क्वेश्चनयर-9) से जुड़े प्रमाणित प्रश्नावली (questionnaires) का इस्तेमाल किया.
कंट्रोल ग्रुप की तुलना में, फलों का जूस और स्मूदी लेने वाले ग्रुप में डिप्रेशन के संकेत काफी कम पाए गए. 27-पॉइंट के स्केल पर, कंट्रोल ग्रुप की तुलना में फलों का जूस लेने वाले ग्रुप का स्कोर 2.52 पॉइंट कम था – जहां कंट्रोल ग्रुप का औसत स्कोर 5.45 था, वहीं फलों का जूस लेने वाले लोगों का औसत स्कोर 2.93 रहा.
अध्ययन के दौरान लोगों ने चार बार अपने खान-पान का विवरण (dietary recall) दिया, जिसमें उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटों में उन्होंने क्या खाया था. इन रिकॉर्ड्स के आधार पर, यह अनुमान लगाया गया कि दोनों ग्रुप (जिन्हें फल और जूस दिया गया था) ने अपने रोजमर्रा के फाइबर सेवन में 8-10 ग्राम की वृद्धि की.
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सिर्फ जूस पीने से डिप्रेशन पूरी तरह ठीक हो सकता है. मानसिक स्वास्थ्य पर खान-पान के अलावा नींद, तनाव का स्तर और शारीरिक गतिविधि जैसी कई अन्य चीजों का भी असर पड़ता है. लेकिन यह स्टडी यह जरूर साबित करती है, एक छोटा सा स्टेप हमारी लाइफस्टाइल में कितना बड़ा बदलाव करता है. डाइट में जूस लेने से ड्रिप्रेशन कम होगा, तो लोगों की कार्यक्षमता बेहतर होगी और लंबे समय में होने वाली बीमारियों से बचा जा सकेगा.
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News Source: ANI
