Donald Trump Attack Attempts: दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के सबसे ताकवर व्यक्ति डोनाल्ड ट्रंप हमेशा सुर्खियों में रहते हैं. विवादित बयानों, चौंकाने वाले फैसलों और अग्रेसिव स्टाइल के कारण उनकी कड़ी आलोचना भी होती है. अपने पूरे पॉलिटिकल करियर के दौरान, उन्हें न केवल आलोचना का सामना करना पड़ा है, बल्कि कई बार उनकी जान लेने के प्रयास भी किए गए हैं.
ताजा घटना की बात करें तो, व्हाइट हाउस के पास शनिवार शाम (22 मई) को एक संदिग्ध आदमी सिक्योरिटी चेकपॉइंट के पास पहुंचा और सिक्योरिटी वालों पर फायरिंग शुरू कर दी. संदिग्ध ने 25 से 30 राउंड फायरिंग की, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई. एक लॉ एनफोर्समेंट अधिकारी ने बताया कि सीक्रेट सर्विस ने हमलावर को गोली मारी, जिससे उसकी मौत हो गई. इस घटना से ठीक एक महीने पहले भी डोनाल्ड ट्रंप पर जानलेवा हमला हुआ था, जब डोनाल्ड ट्रंप वाशिंगटन हिल्टन होटल में पत्रकारों के साथ डिनार कर रहे थे. इसी तरह पेंसिल्वेनिया में रैली के दौरान ट्रंप को गोली मारी गई थी, जिसके दृश्य काफी भयानक थे. राष्ट्रपति ट्रंप पर 1-2 बार नहीं बल्कि 8 से ज्यादा बार हत्या और हमले की कोशिशे हुई है. कभी उन्हें जहर से मारने की कोशिश की गई, तो कभी कोई घात लगाकर गोली मारने के लिए बैठा था. यह दिखाता है कि दुनिया की सबसे शक्तिशाली लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंदर भी, राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा पक्की करना कितनी बड़ी चुनौती है. चलिए जानते हैं कितनी बार डोनाल्ड ट्रंप की हत्या और हमले के प्रयास किए गए.
तीन बार हत्या की कोशिश
13 जुलाई, 2024 (बटलर, पेन्सिलवेनिया)
13 जुलाई, 2024 को, पेन्सिलवेनिया के बटलर के पास डोनाल्ड ट्रंप एक चुनावी रैली में बोल रहे थे. भाषण शुरू होने के कुछ मिनटों बाद ही एक व्यक्ति ने AR-15-स्टाइल राइफल से एक के बाद एक आठ गोलियां चलाईं. इस हमले में ट्रंप को दाहिने कान में ऊपरी हिस्से गोली लगी और वह घायल हो गए, जिसके बाद वह जमीन पर गिर गए. उनके कान से खून निकलने लगा, तभी सीक्रेट सर्विस ने उन्हें बचाया. हमलावर की पहचान थॉमस क्रूक्स के तौर पर हुई, जिसने एक दर्शक, कोरी कम्पेरेटर को भी मार डाला और दो अन्य को गंभीर रूप से घायल कर दिया. जवाबी कार्रवाई में सीक्रेट सर्विस काउंटर-स्नाइपर टीम के एक सदस्य ने उसे गोली मारकर मार डाला. हत्या की कोशिश के कारण सीक्रेट सर्विस डायरेक्टर किम्बर्ली चीटल को इस्तीफा देना पड़ा.

15 सितंबर, 2024 (वेस्ट पाम बीच, फ्लोरिडा)
15 सितंबर, 2024 को फ्लोरिडा के वेस्ट पाम बीच में इंटरनेशनल गोल्फ क्लब में ट्रंप गोल्फ खेल रहे थे. उसी समय झाड़ियों में रयान राउथ नाम के व्यक्ति को राइफल लहराते हुए देखा गया. एक सीक्रेट सर्विस ऑफिसर ने राउथ पर गोली चलाई, लेकिन वह भाग गया. ऑफिसर ने उसे भागते समय पकड़ लिया. अधिकारियों ने बाद में कन्फर्म किया कि राउथ का इरादा सच में डोनाल्ड ट्रंप की हत्या करने का था. 7 अप्रैल, 2025 को एक चार्जशीट में पता चला कि राउथ फरवरी 2024 की शुरुआत से ही मेक्सिको में रहने वाले रामिरो नाम के एक साथी के साथ हत्या की प्लानिंग कर रहा था. राउथ का ट्रायल 8 सितंबर, 2025 को शुरू हुआ और 23 सितंबर को उसे सभी आरोपों में दोषी पाया गया. उसे 4 फरवरी, 2026 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई.
25 अप्रैल, 2026 (वॉशिंगटन, DC)
25 अप्रैल, 2026 को डोनाल्ड ट्रंप वॉशिंगटन हिल्टन होटल में पत्रकारों के साथ डिनर कर रहे थे. अचानक, एक हथियारबंद आदमी भागते हुए आया और उसने गोलियां चला दीं. सीक्रेट सर्विस एजेंट्स ने ट्रंप, उनकी पत्नी मेलानिया, वाइस प्रेसिडेंट जे.डी. वेंस और कई कैबिनेट मेंबर्स को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया. हमलावर की पहचान 31 साल के कोल थॉमस एलन के रूप में हुई, जो टॉरेंस, कैलिफोर्निया का रहने वाला है. उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया. उसके पास से भारी मात्रा में चाकू और कारतूस बरामद हुआ. अमेरिकी संघीय अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई.
अन्य हमले और सुरक्षा चूक
2016: लास वेगास रैली में पिस्टल छीनने की कोशिश
18 जून, 2016 को ट्रंप राष्ट्रपति चुनाव के प्रचार के दौरान नेवादा के लास वेगास में ट्रेजर आइलैंड होटल और कसीनो में भाषण दे रहे थे. इस कार्यक्रम में उनके समर्थक बड़ी संख्या में मौजूद थे. इसी बीच, 20 साल के ब्रिटिश आदमी माइकल स्टीवन सैंडफोर्ड ने अचानक एक पुलिस ऑफिसर से पिस्टल छीनने की कोशिश की. हालांकि, ऑफिसर ने तुरंत उसे पकड़ लिया और मौके पर ही काबू कर लिया. बाद में उसे यूएस सीक्रेट सर्विस को सौंप दिया गया. पूछताछ के दौरान, सैंडफोर्ड ने माना कि उसका इरादा ट्रंप की हत्या करने का था. उसने कहा कि अगर वह अपनी पहली कोशिश में कामयाब नहीं होता, तो वह फिर से कोशिश करता. कोर्ट ने उसे 12 महीने की सजा सुनाई, साथ ही $200 का जुर्माना भी लगाया. बाद में अच्छे बर्ताव की वजह से उसे जल्दी रिहा कर दिया गया और मई 2017 में वापस यूनाइटेड किंगडम भेज दिया गया.
2017: काफिले पर हमला करने का प्लान
6 सितंबर, 2017 को नॉर्थ डकोटा के मंडन में एक हैरान करने वाली घटना हुई. ट्रंप एक तेल रिफाइनरी में अपने समर्थकों से मिल रहे थे. ग्रेगरी ली लिनांग नाम के एक आदमी ने रिफाइनरी से एक फोर्कलिफ्ट चुरा ली. उसका इरादा फोर्कलिफ्ट को ट्रंप के काफिले की तरफ ले जाकर राष्ट्रपति को मारने का था. हालांकि, जब फोर्कलिफ्ट रिफाइनरी के अंदर फंस गई तो उसका प्लान फेल हो गया. फिर वह पैदल भागा, लेकिन पुलिस ने उसका पीछा करके पकड़ लिया. पूछताछ के दौरान, लिनांग ने माना कि उसका इरादा प्रेसिडेंट की हत्या करना था. अधिकारियों के मुताबिक, उन्हें शुरू में लगा कि वह फोर्कलिफ्ट सिर्फ चोरी करने के मकसद से ले गया था, लेकिन बाद में उसके प्लान के बारे में जानकर वे चौंक गए. उसने कोर्ट में सभी आरोप मान लिए और उसे 20 साल जेल की सजा सुनाई गई.
2018: राइसिन लेटर से फैली दहशत
अक्टूबर 2018 में, ट्रंप और अमेरिकी अधिकारियों को संदिग्ध लेटर भेजे गए थे. 1 अक्टूबर को अधिकारियों ने अरंडी के बीजों वाला एक लिफाफा जब्त किया. शुरू में, शक था कि इसमें राइसिन नाम का जहरीला पदार्थ हो सकता है, जो बहुत खतरनाक जहर है. इसके अलावा, पेंटागन को कई संदिग्ध चिट्ठियां भेजी गईं, सभी का पता “जैक एंड द मिसाइल बीन स्टॉक पाउडर” था. जांच के बाद, 39 साल के पूर्व नेवी वेटरन विलियम क्लाइड एलन III को गिरफ्तार किया गया. उन पर राष्ट्रपति को धमकी भरे खत भेजने और सरकारी अधिकारियों को डराने का आरोप लगाया गया था. हालांकि, एलन ने कोर्ट में खुद को बेगुनाह बताया. बाद में उनकी मानसिक हालत की वजह से उन्हें मनोचिकित्सक इलाज के लिए भेजा गया. जनवरी 2022 में उनके खिलाफ केस हटा दिया गया.

2020: ट्रंप को मिला जहरीला खत
2020 में, ट्रंप को फिर से राइसिन वाले खत से निशाना बनाने की कोशिश की गई. 20 सितंबर, 2020 को कनाडाई महिला पास्कल सेसिल वेरोनिक फेरियर को न्यूयॉर्क के बफेलो में कनाडाई बॉर्डर पार करने की कोशिश करते हुए गिरफ्तार किया गया था. जांच में पता चला कि उसने ट्रंप को राइसिन मिला एक लेटर भेजा था. लेटर में उसने ट्रंप से राष्ट्रपति चुनाव से हटने की मांग की और उनके खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया. अमेरिकी अधिकारियों ने उस पर बायोलॉजिकल हथियार कानूनों का उल्लंघन करने और धमकी देने का आरोप लगाया. बाद में, अगस्त 2023 में अमेरिकी कोर्ट ने उसे लगभग 22 साल जेल की सजा सुनाई. इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि ट्रंप को न केवल पब्लिक इवेंट्स में बल्कि मेल और ऑनलाइन चैनलों के जरिए भी धमकियों का सामना करना पड़ा.
2024: ईरान द्वारा हत्या की साजिशें
अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसियों (FBI) ने ईरान से जुड़े कई नेटवर्क का पता लगाया है जो ट्रंप की हत्या के लिए किराए के शूटर ढूंढ रहे थे. जुलाई 2024 में ह्यूस्टन में एक पाकिस्तानी व्यक्ति आसिफ मर्चेंट को गिरफ्तार किया गया. उसे ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की तरफ से ट्रंप की हत्या करने के लिए लोगों की भर्ती करने का काम सौंपा गया था. 6 मार्च, 2026 को मर्चेंट को न्यूयॉर्क शहर में ट्रंप की हत्या की साजिश में दोषी ठहराया गया. मर्चेंट ने गवाही दी कि उसने तेहरान में अपने परिवार को बचाने के लिए बिना मन के इसमें हिस्सा लिया.
8 नवंबर, 2024 को अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने अफगान नागरिक फरहाद शाकरी, कार्लिस्ले रिवेरा और जोनाथन लोडहोल्ट को ट्रंप की हत्या की साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया. ये तीनों मेजर जनकर कासिम सुलेमानी की हत्या का बदला लेने के लिए आए थे. शाकरी ने कथित तौर पर एक अंडरकवर FBI एजेंट को बताया कि IRGC के एक अधिकारी ने उसे ट्रंप की हत्या की साजिश रचने का काम दिया गया है. रिवेरा और लोडहोल्ट को नवंबर 2024 में गिरफ्तार किया गया और जनवरी 2026 में संबंधित आरोपों में दोषी ठहराया गया, जबकि शाकरी अभी भी फरार है.

2025: सोशल मीडिया पर जान से मारने की धमकियां
अगस्त 2025 में, ट्रंप के खिलाफ एक और गंभीर मामला सामने आया. इंडियाना की एक 50 साल की महिला को वाशिंगटन डीसी में ट्रंप के खिलाफ हिंसक धमकियां देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया. महिला के इंस्टाग्राम अकाउंट से बहुत ही आपत्तिजनक और हिंसक पोस्ट किए गए थे. पोस्ट में ट्रंप को बेहद खतरनाक तरीके से जान से मारने की धमकी दी गई थी. उसने अपनी पोस्ट में ट्रंप प्रशासन की कोविड-19 पॉलिसी के खिलाफ भी गुस्सा दिखाया था. सीक्रेट सर्विस की पूछताछ के दौरान, महिला ने दावा किया कि उसके पास एक नुकीली चीज है जिसका इस्तेमाल वह ट्रंप को मारने के लिए कर सकती है. अपनी गिरफ्तारी के दिन, उसने व्हाइट हाउस कॉम्प्लेक्स के बाहर प्रदर्शन भी किया. हालांकि, सिक्योरिटी एजेंसियों ने उसे समय रहते हिरासत में ले लिया, जिससे एक बड़ी घटना टल गई.
ये सभी घटनाएं साफ दिखाती हैं कि डोनाल्ड ट्रंप को लगातार सुरक्षा खतरों का सामना करना पड़ा है. चाहे चुनावी रैलियां हों, सार्वजनिक कार्यक्रम हों या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर, लोगों ने बार-बार उन्हें अलग-अलग तरीकों से नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि बढ़ता पॉलिटिकल एक्सट्रीमिज्म, सोशल मीडिया पर नफरत और गुस्से की पॉलिटिक्स, ऐसे खतरों को बढ़ा रही हैं. इन घटनाओं ने US सीक्रेट सर्विस और सिक्योरिटी एजेंसियों पर भी दबाव बढ़ा दिया है, क्योंकि कई बार ट्रंप की सुरक्षा में चूक हुई है.
व्हाइट हाउस के बाहर संदिग्ध ने चलाई अंधाधुंध गोलियां, जवाबी कार्रवाई में हमलावर की मौत
