Home Top News ईरान युद्ध और ऊर्जा की कीमतों को लेकर होगी EU समिट में चर्चा, हंगरी ने रोका यूक्रेन का कर्ज; जानें मामला

ईरान युद्ध और ऊर्जा की कीमतों को लेकर होगी EU समिट में चर्चा, हंगरी ने रोका यूक्रेन का कर्ज; जानें मामला

by Sachin Kumar
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EU summit focus Iran war loan to Ukraine blocked Hungary

EU Summit : मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के बीच दुनिया भर में तेल और गैस की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है. इसी बीच EU का शिखर सम्मेलन गुरुवार से शुरू हो गया है, जिसमें ऐसे मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है.

EU Summit : यूरोपीय संघ (EU) का ब्रसेल्स में गुरुवार से शिखर सम्मेलन शुरू हो गया है. युद्ध की वजह से मंदी का असर दिखने लगा है और महंगाई भी चरम पर पहुंच रही है. इसी बीच EU शिखर सम्मेलन इसके समाधान और युद्ध को खत्म करने को लेकर चर्चा हो सकती है. इसमें मुख्य रूप से ईरान युद्ध, ऊर्जा की कीमतें, प्रवासन और युद्ध से तबाह हुए यूक्रेन के लिए एक बड़े कर्ज पर बातचीत होगी. हालांकि, हंगरी ने यूक्रेन का ऋण रोक दिया है. बता दें कि यूरोपीय संघ के देशों ने डोनाल्ड ट्रंप की उस मांग को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने के लिए सैन्य सामान भेजने के लिए कहा था.

ऊर्जा कीमतों ने यूरोप की कमर को तोड़ा!

होर्मुज़ जलडमरूमध्य तेल, गैस और उर्वरक के वैश्विक प्रवाह के लिए एक अहम समुद्री रास्ता है. अब इसको रोकने का मतलब है कि दुनिया भर में तेल और गैस की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि होना. वहीं, मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने की वजह से पहले ही कीमतों में वृद्धि हो रही है और यूरोप में एक नए शरणार्थी संकट का डर सताने लगा है. यही वजह है कि यूरोपीय नेताओं ने इस मुद्दे को अपनी प्राथमिकताओं में रखा है. दूसरी तरफ यूरोपीय संघ और यूरोपीय आयोग ने ऊर्जा की कीमतों में हो रही लगातार वृद्धि को कम करने के लिए टूलबॉक्स पेश किया है. एक वरिष्ठ यूरोपीय राजनयिक के मुताबिक, इन सभी 27 देशों के बाजारों के पास इन कीमतों को कम करने के उपाय नहीं थे जिसके बाद इन्होंने एक मंच पर आने का फैसला किया.

यूक्रेन को दिया जाने वाले बजट का हुआ विरोध

दूसरी तरफ इस शिखर सम्मेलन में हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन और EU के ज्यादातर दूसरे देशों के बीच लंबे समय से चल रहे टकराव पर भी चर्चा होगी. पिछला EU शिखर सम्मेलन दिसंबर में बेल्जियम के एक किले में हुआ था, जहां ओर्बन समेत सभी नेताओं ने यूक्रेन को 90 अरब यूरो का कर्ज देने पर सहमति जताई थीं. यह कर्ज यूक्रेन को युद्ध में मदद करने के लिए देने की बात कही गई थी. इसी बीच ओर्बन ने इस फैसले का भी विरोध करना शुरू कर दिया और ऐसा उस वक्त हुआ जब जनवरी में द्रुजबा तेल पाइपलाइन बंद हो गई. यूक्रेनी अधिकारियों कहना था कि रूस के हमले की वजह से हुआ था.

हंगरी ने कर्ज देने का किया विरोध

रूसी समर्थक विक्टर ओर्बन साल 2010 से सत्ता पर काबिज हैं और यूक्रेन को दिए जाने वाले बजट के खिलाफ मीडिया में एक जबरदस्त अभियान चला रहे हैं. इस अभियान के माध्यम से वह ब्रसेल्स और कीव दोनों को ही खलनायक के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं, मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ओर्बन ने कहा था कि अगर तेल नहीं होगा तो, पैसा भी नहीं होगा. साथ ही यूक्रेन को कर्ज देने के लिए यूरोपीय संघ के नेता और राजनयिक को ओर्बन और स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको से बातचीत करनी होगी. खास बात यह है कि फिको सरकार ने भी रूस को समर्थन देने का फैसला किया है. इसके अलावा यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने मंगलवार को प्रस्ताव दिया कि EU जरूरत पड़ने पर द्रुज़बा पाइपलाइन की मरम्मत का खर्चा उठाएगा . साथ ही हंगरी और स्लोवाकिया के लिए वैकल्पिक ईंधन पाइपलाइनें बनाने में भी मदद करेगा.

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News Source: PTI

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