America-France Controversy : डोनाल्ड ट्रंप के अफगानिस्तान युद्ध को लेकर दिए गए बयान के बाद फ्रांस ने अपने सैनिकों को याद किया. युद्ध में जान गंवाने वाले सैनिकों पर माल्यार्पण किया.
America-France Controversy : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अफगानिस्तान में गैर-अमेरिकी नाटो सैनिकों वाले बयान पर फ्रांस ने पलटवार किया. एक सीनियर फ्रांसीसी सरकारी अधिकारी ने सोमवार को कहा कि अफगानिस्तान में मारे गए फ्रांसीसी सैनिकों को याद किया जाना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के इस झूठे दावे से खराब नहीं किया जाना चाहिए कि उस युद्ध में गैर-अमेरिकी नाटो देशों ने दूरी बनाए रखी थी. फ्रांस के सशस्त्र बल मंत्रालय में महानिदेशक एलिस रूफो ने पेरिस के डाउनटाइन में एक स्मारक पर माल्यार्पण किया, जो विदेशों में ऑपरेशन में फ्रांस के लिए जान देने वालों को समर्पित है. रूफो ने कहा कि यह समारोह वीकेंड तक प्लान नहीं किया गया था. लेकिन यह दिखाना बहुत जरूरी था कि हम यह स्वीकार नहीं करते कि उनका अपमान किया जाए.
अल-कायदा के खिलाफ गठबंधन किया
आपको बताते चलें कि 11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान में अल-कायदा को खत्म करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन नेतृत्व किया. साथ ही देश को अपना बेस बनाया था और अमेरिका के साथ दर्जनों देशों के सैनिक थे, जिनमें नाटो भी शामिल था. स्विट्जलैंड के दावोस में फॉक्स बिजनेस नेटवर्क को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने गुरुवार को दावा किया कि गैर-अमेरिकी नाटो सैनिक अफगानिस्तान में फ्रंटलाइन से थोड़ा दूर था. इस संघर्ष में नब्बे फ्रांसीसी सैनिक मारे गए थे. रूफो ने कहा कि युद्ध में जो शहीद हुए थे उनके सम्मान में सभी को यह याद दिलाने के लिए कि उन्होंने फ्रंट लाइन पर क्या बलिदान दिया.
ब्रिटिश सैनिकों की जमकर तारीफ
ट्रंप के बयान के बाद जब हंगामा मचा तो वह धीरे-धीरे पीछे हटते हुए नजर आए और उन्होंने अफगानिस्तान में लड़ने वाले ब्रिटिश सैनिकों की खूब तारीफ की. हालांकि, उन्होंने दूसरे सैनिकों के बारे में कुछ नहीं कहा. रूफो ने आगे कहा कि मैंने बयान देखे हैं और खासकर पूर्व सैनिक संगठनों की नाराजगी दिखी. उन्होंने आगे कहा कि ट्रांस-अटलांटिक एकजुटता को विवादों पर हावी होना चाहिए. आप जानते हैं कि अमेरिकियों, ब्रिटिशों और फ्रांसीसी सैनिकों के बीच भाईचारा है.
डोनाल्ड ट्रंप नाटो सहयोगियों का जिक्र करते हुए कहा था कि हमने उनसे कुछ नहीं मांगा. आप जानते हैं कि वह कहेंगे कि उन्होंने अफगानिस्तान में अपने सैनिक भेजे और भेजे भी थे. लेकिन वह युद्ध के मोर्चे से थोड़ा दूर थे. दूसरी तरफ उन्होंने ब्रिटिश सैनिकों की जमकर तारीफ की और कहा कि उनके बहादुर सैनिक हमेशा अमेरिका के साथ रहेंगे.
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News Source: Press Trust of India (PTI)
