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ऑपरेशन यूपी: संगठन से सरकार तक फेरबदल की तैयारी, मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड पर टिकी नजर

by Rajeev Ojha
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ऑपरेशन यूपी: संगठन से सरकार तक फेरबदल की तैयारी, मंत्रियों और विधायकों के रिपोर्ट कार्ड पर टिकी नजर

UP Politics: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने अभी से कमर कस ली है. जीत का लक्ष्य लेकर चल रही भारतीय जनता पार्टी (BJP) अब कभी भी ऑपरेशन यूपी शुरू कर सकती है.

UP Politics: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने अभी से कमर कस ली है. जीत का लक्ष्य लेकर चल रही भारतीय जनता पार्टी (BJP) अब कभी भी ऑपरेशन यूपी शुरू कर सकती है. इसकी उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है. इसके तहत संगठन से लेकर सरकार तक बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे. संगठन के प्रदेश के मुखिया पंकज चौधरी और सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ की टीम नए और ऊर्जावान चेहरों के साथ सामने आएगी. यह टीम ऐसी होगी, जिसके सहारे पार्टी अगले साल होने वाले विधानसभा के रण में एक बार फिर मैदान मारने का लक्ष्य लेकर उतरेगी. संगठन की दृष्टि से भाजपा ने यूपी को छह क्षेत्रों में बांट रखा है. प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पंकज चौधरी की ताजपोशी के बाद इन सभी क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके सभी सहयोगी संगठनों के साथ भाजपा की समन्वय बैठक हो चुकी है. पश्चिम, अवध, बुंदेलखंड, काशी और गोरक्ष क्षेत्र के बाद छठवीं और आखिरी बैठक अभी बृज क्षेत्र के मथुरा में संपन्न हुई.

बीजेपी की तैयारी से अन्य सियासी दलों में हलचल

संगठन और सरकार में संभावित फेरबदल के को देखते हुए इन बैठकों के खास मायने हैं. इन बैठकों में कार्यकर्ताओं का असंतोष दूर करने पर तो मंथन किया ही गया, विधायकों और मंत्रियों के बारे में फीडबैक भी लिया गया. इन समन्वय बैठकों से प्रदेश के अन्य सियासी दलों में भी हलचल है, क्योंकि संघ की सभी प्रकार की गतिविधियों के सियासी निहितार्थ निकाले जाते हैं. इन सभी बैठकों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह के साथ संघ के क्षेत्र और प्रांत प्रचारकों के अलावा संघ के अन्य सहयोगी संगठनों के पदाधिकारी भी मौजूद रहे. यूपी और उत्तराखंड को मिलाकर संघ के दो क्षेत्र प्रचारक हैं. इन्हें पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्र प्रचारक कहते हैं. एक क्षेत्र प्रचारक का केंद्र लखनऊ है तो दूसरे का मेरठ. संघ के प्रांत प्रचारकों के अलावा दोनों क्षेत्र प्रचारक भी अपने अपने क्षेत्राधिकार वाली बैठकों में मौजूद रहे. महत्वपूर्ण बात यह भी है कि सभी बैठकें क्षेत्र मुख्यालय वाले जिले में ही आयोजित की गईं. इन बैठकों को पूरी तरह गोपनीय रखा गया. संघ के पदाधिकरियों ने भाजपा संगठन और सरकार के बारे में जमीनी हकीकत और अपेक्षित भावी रणनीति के बारे में विस्तार से जानकारी दी.

कार्यकर्ताओं की नाराजगी का भी उठा मुद्दा

सूत्रों के अनुसार बैठकों में योगी सरकार के मंत्रियों और भाजपा विधायकों की परफॉर्मेंस के बारे में भी फीडबैक मिला. हाल के दिनों में केंद्र और प्रदेश सरकार के कुछ फैसलों के सियासी प्रभाव पर भी खुलकर चर्चा हुई है. इसमें शैक्षिक परिसरों से संबंधित यूजीसी का नया कानून और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा विवाद भी शामिल है. वैसे तो ऐसी समन्वय बैठकें पूर्व में भी होती रही हैं. कई बार इन बैठकों के बाद सरकार के स्तर से कुछ बड़े फैसले भी लिए गए हैं. इस बार की समन्वय बैठकें इसलिए भी खास मानी जा रही हैं, क्योंकि जल्द ही भाजपा की प्रदेश कमेटी का गठन होना है. साथ ही योगी मंत्रिमंडल का विस्तार होने की भी पूरी संभावना है. ये दोनों कार्य ज्यादा महत्वपूर्ण इसलिए हो गए हैं, क्योंकि अगले ही साल विधानसभा का चुनाव होना है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा चुनाव में जाने से पहले वास्तविक फीडबैक हासिल करके सुधार के कुछ बड़े उपाय करना चाहती है. एक मुद्दा पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजगी का भी है.

सोशल इंजीनियरिंग पर खास जोर

साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में यूपी में अपेक्षित सफलता न मिलने से पार्टी सहमी हुई है. इसके साथ ही मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने पीडीए का कार्ड खेलकर उसे और भी सतर्क कर दिया है. ऐसे में भाजपा ने कुर्मी बिरादरी के पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के बाद सोशल इंजीनियरिंग पर खास जोर देने जा रही है. इसका असर आने वाली प्रदेश कमेटी से लेकर मंत्रिमंडल तक दिखाई देगा. सरकार चाहती है कि संगठन अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से उसकी उपलब्धियां जनता तक पहुंचाए ताकि विपक्ष के हमले का जवाब देना आसान हो सके. समन्वय बैठकों के जरिए फीडबैक की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार में कार्यकर्ताओं के समायोजन की प्रक्रिया भी जल्द पूरी की जानी है. प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी खुद इसका संकेत दे चुके हैं.

कई विधायक पार्टी के निशाने पर

सूत्रों के अनुसार बैठकों में यह बताया गया कि मंत्रियों और विधायकों का कार्यकर्ताओं से संवाद बेहतर नहीं रह गया है. कुछ मंत्रियों के बारे में भ्रष्टाचार की शिकायतें भी की गई हैं. साथ ही कुछ विधायकों की अनुशासनहीनता के मामले भी उठे हैं. संभव है कि संगठन के कुछ चर्चित चेहरों को सरकार में लेकर जरूरत के हिसाब से कुछ मंत्रियों को संगठन में भेजा जाए. समन्वय बैठकों में साफतौर पर कहा गया कि विधायकों की ऐसी हरकतों से विपक्ष को हमला करने का मौका मिल रहा है, जो आने वाले चुनाव की दृष्टि से नुकसानदायक हो सकता है. हाल के दिनों में अपने बयानों से सरकार को असहज करने वाले विधायक भी पार्टी के निशाने पर हैं. कुल मिलाकर कहें तो पार्टी अब फूंक-फूंक कदम रखने वाली है ताकि विपक्ष को उसकी किसी गलती का लाभ उठाने का अवसर न मिले. समन्वय बैठकों के बाद शुरू हुई हलचल से भाजपा में सरगर्मी बढ़ी हुई है. संगठन के मौजूदा पदाधिकारी और सरकार के कई मंत्री यूपी में शुरू होने वाले संगठनात्मक ऑपरेशन से सहमे हुए हैं.

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