Middle East War : ईरान और इजरायल के बीच जारी जंग एक फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है. इजरायल और अमेरिका ने नतांज के परमाणु केंद्र को फिर से निशाना बनाने की कोशिश की है.
Middle East War : मिडिल ईस्ट में युद्ध एक फिर भयंकर मोड़ पर गया है. ईरान के सबसे संवेदनशील और सुरक्षित माने जाने वाले नतांज परमाणु केंद्र पर अमेरिका और इजरायल ने जमकर बमबारी की है. इस खबर के फैलने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. हालांकि, अभी तक विकिरण रिसाव होने की कोई बात नहीं कही गई है. बताया जा रहा है नतांज ईरान का मुख्य यूरेनियम संवर्धन केंद्र है, जो तेहरान से करीब 200 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है. इस केंद्र पर पहले भी कई बार बमबारी हो चुकी है और अब ताजा हमला अमेरिका-इजरायरल के संयुक्त अभियान का हिस्सा माना जा रहा है.
दूर-दराज तक पहुंचीं धमाके की आवाज
ईरानी मीडिया में भी कहा जा रहा है कि इस ताजा हमले में नतांज संवर्धन केंद्र को निशाना बनाया गया है. हमला इतना खतरनाक था कि इसकी आवाज दूर-दराज तक पहुंची. हालांकि, शुरुआती जांच के बाद ईरानी अधिकारियों ने राहत की सांस ली और बताया कि रेडिएशन का रिसाव नहीं हुआ है. मतलब यह है कि परमाणु कचरा फैलने जैसा जो डर था वह टल गया है. स्थानीय मीडिया ने यह भी दावा किया कि भारी धमाके के बाद भी रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं. सरकार का कहना है कि यह इजरायल और अमेरिका का संयुक्त अभियान का हिस्सा है और उनका मकसद है कि किसी भी तरह से यूरेनियम को तबाह किया जाए.
क्यों किया जा रहा है बार-बार हमला
मामला यह है कि नतांज परमाणु केंद्र दुश्मनों के निशाने पर हमेशा रहा है. साल 2025 से अभी तक इस साइट पर कई बार हमला किया जा चुका है. हर बार की तरह यहां पर बस मशीन और इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचता है. खास बात यह है कि पर्यावरण को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचा है. वहीं, ईरानी परमाणु ऊर्जा के प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निगरानी संगठन IAEA को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि नतांज पर दो बार क्रूर हमले किए गए हैं. सेटेलाइट तस्वीरों से सामने आया है कि कुछ दरवाजे और इमारत को नुकसान पहुंचा हैं. साथ ही IAEA ने पुष्टि की है कि नतांज में कुछ बिल्डिंग को नुकसान पहुंचा है लेकिन भूमिगत संवर्धन हॉल को नुकसान नहीं पहुंचा है.
पिछली बार भी किया गया था हमला
बता दें कि पिछले साल जून में इजरायल और ईरान के बीच 12 दिनों का भीषण युद्ध चला था. उस दौरान भी मुख्य टारगेट नतांज ही बनाया गया था. उस वक्त अमेरिका भी सीधे तौर हमलावर हो गया था और अब एक बार फिर इस साइट पर हमला बता रहा है कि यह लड़ाई चरम पर पहुंचने वाली है. अभी ईरान की तरफ से जवाबी कार्रवाई नहीं हुई है. आपको बताते चलें कि परमाणु केंद्र पर हमला करना बहुत खतरनाक हो सकता है और इसके दुष्परिणाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखने को मिल सकते हैं.
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News Source: PTI
