Home Top News 2025 की वह अंतरराष्ट्रीय घटनाएं जिन्होंने पूरी दुनिया को किया प्रभावित, भविष्य में दिखेगा असर?

2025 की वह अंतरराष्ट्रीय घटनाएं जिन्होंने पूरी दुनिया को किया प्रभावित, भविष्य में दिखेगा असर?

by Sachin Kumar
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Introduction

Major International Events in 2025 : वर्ष 2025 को अब लोग अलविदा कहने जा रहे हैं और 2026 का वेलकम करने के लिए इंतजार कर रहे हैं. इसी कड़ी में हम 2025 की उन घटनाओं का जिक्र करने जा रहे हैं जिन्होंने पूरी दुनिया को प्रभावित किया. अगर हम युद्ध के नजरिए से कुछ घटनाओं को देखें तो ईरान-इस्राइल युद्ध ने काफी प्रभावित किया. इसके अलावा ट्रंप टैरिफ ने भी दुनिया भर के देशों को झटका दिया. साथ ही एक-दो देशों में हुए आंदोलनों ने भी लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया, जिसमें मुख्य रूप से नेपाल का जेन-जी प्रोटेस्ट और बांग्लादेश में शेख हसीना का तख्तापलट होने के बाद हिंसक आंदोलन और महंगाई को लेकर पश्चिम के देशों में हुए आंदोलन शामिल हैं. इन सभी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए 2025 काफी रोचक भरा रहा और इसने अपनी विदाई के समय कई घटनाओं को अपने में समा लिया. इस आर्टिकल में हम उन घटनाओं का जिक्र कर रहे हैं जिन्होंने सीधे तौर पर आम लोगों को प्रभावित किया और गली-नुक्कड़ की बहस के लिए एक नया मुद्दा दिया.

Table Of content

  • चीन-रूस और भारत महाशक्तियों का समीकरण
  • पाक-अफगान के रिश्तों में पड़ी दरार
  • टैरिफ बम से वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल
  • इतिहास में पहली बार अमेरिकी पोप का चुनाव
  • मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव
  • 43 दिन तक ठप रहा अमेरिकी सिस्टम
  • नेपाल में जेन जी के प्रोटेस्ट से सरकार गिरी

चीन-रूस और भारत महाशक्तियों का समीकरण

भारत, चीन और रूस तीनों एक बड़ी अर्थव्यवस्था और भूभाग के मामले में ये दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्र और जनसंख्या को कवर करते हैं. ऐसे में तीनों देशों के बीच में सामंजस्य बैठने से प्रगति के रास्ते को काफी तेजी से आगे बढ़ सकता है और ये तीनों देश BRICS सगंठन में भी शामिल है जिसका कार्य मुख्य रूप से आर्थिक क्षेत्र को बढ़ाना देने का है और इसका मुख्य बैंक चीन में स्थित है. इस संगठन के बैंक के धन की बदौलत भारत में कई सड़क परियोजनाएं चल रही हैं. ऐसे में अगर ये नए समीकरण और रणनीतिक तालमेल के साथ आगे बढ़ते हैं तो पश्चिम और अमेरिका के ऊपर से निर्भरता काफी कम हो जाएगी. इसके साथ ही चीन का विनिर्माण, रूस का ऊर्जा और रक्षा और भारत की सेवाएं पश्चिम वर्चस्व को सीधी चुनौती देने का काम करेंगी. वहीं, भारत का जोर पूर्ण गठजोड़ की बजाय अपनी स्वायत्त बनाए रखने पर है, क्योंकि चीन और रूस अपने-अपने एजेंडे के हिसाब से आगे बढ़ते हैं. इन तीनों देशी की तिकड़ी को RIC बोला जाता है, जो वैश्विक शक्ति को संतुलन को बदल रहा है लेकिन यह अस्थिर असंतुलन है.

Major International Events in 2025

पाक-अफगान के रिश्तों में पड़ी दरार

साल 2025 में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते विवाद भी एक गंभीर मुद्दा रहा और सीमा पर दोनों देशों की तरफ से किए हमलों में सुरक्षाकर्मियों और नुकसान पहुंचा. विशेषज्ञों का कहना था कि यह सिर्फ सीमा विवाद नहीं था, बल्कि गहरे राजनीतिक और सुरक्षा हितों से जुड़े टकराव जैसा है. पाक और अफगान के बीच सीमा विवाद कोई नया नहीं है, इन दोनों देशों के बीच में पहले भी कई बार झड़प हुई हैं. अफगान सैनिकों की गोलीबारी और पाकिस्तान के हवाई हमलों की सीधी कहानी डूरंड रेखा से जुड़ी है, जो साल 1893 में ब्रिटिश शासन के दौरान खींची गई थी. हालांकि, अफगानिस्तान इसको औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं करता है. इसके अलावा तालिबानी सरकार पाकिस्तान पर आरोप लगाती आई है कि वह तेहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान जैसे आतंकी संगठनों पर कोई भी कार्रवाई नहीं करता है. साथ ही पाकिस्तान ने तालिबान सरकार पर पाकिस्तानी विरोधी गुटों को शरण देने का आरोप लगाया. पाक और अफगानिस्तान के बीच कई बार गोलीबारी हो चुकी है और यह विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों देशों की सीमा पर स्थित घरों में रहने वाले लोग छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं.

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टैरिफ बम से वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल

अमेरिका की सत्ता पर दूसरी बार काबिज होने के बाद से ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चर्चाओं में बने हुए हैं. उनकी तरफ से लिया गया सबसे चर्चित मुद्दा दुनिया भर के देशों पर टैरिफ लगाकर बातचीत की मेज पर लाना था. इसी कड़ी में उन्होंने सबसे पहले चीन पर 145 फीसदी का टैरिफ लगाया और उसके जवाब में चीन ने 125 प्रतिशत सीमा शुल्क लगा दिया था. इसके बाद जेनेवा में हुई बातचीत के बाद अमेरिका ने टैरिफ 145 से घटाकर 30 फीसदी कर दिया और चीन ने घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया था. इसी बीच ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया और उसके साथ देश पर यह आरोप लगाकर कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है, तो 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया था और उसके बाद कुल सीमा शुल्क 50 फीसदी हो गया. इसी कड़ी में ट्रंप ने हर एक देश में दो डिजिट में टैरिफ लगाया और इसके कारण ग्लोबल लेवल पर सप्लाई चैन प्रभावित हो गई. साथ ही उपभोक्ताओं को महंगी वस्तुओं भी खरीदनी पड़ी. इसके अलावा इस घटना ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया और ट्रंप यह कहते रहे कि यह फैसला शॉर्ट टर्म के लिए नुकसान पहुंचाएगा लेकिन लॉन्ग टर्म में काफी फायदा देने वाला है.

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इतिहास में पहली बार अमेरिकी पोप का चुनाव

कैथोलिक चर्च के इतिहास में पहली बार अमेरिकी मूल के कार्डिनल रॉबर्ट प्रीवोस्ट चुना गया और उनको पोप लियो XIV का नाम दिया गया. ये घटना 8 मई 2025 को हुई, जब पोप फ्रांसिस की 21 अप्रैल 2025 की मौत के बाद चुना गया. रॉबर्ट प्रीवोस्ट का जन्म 14 सितंबर, 1955 को शिकागो में हुआ और वह ऑगस्टिनियन ऑर्डर के सदस्य, जिन्होंने काफी लंबे समय से मिशनरी कार्यों में अपना समय बिताया है. 133 कार्डिनल्स ने वोटिंग के माध्यम से दो-तिहाई (89) वोट हासिल किए और उसके उन्हें पोप बनाया गया. साथ ही साल 1900 के बाद यह पांचवां मौका है जब किसी पोप को दो दिनों में चुन लिया गया. इसके अलावा वोटिंग से दूसरे दिन रोमन कैथोलिक से एक धुआं निकला, जिससे पता चल गया कि अगले पोप का चयन हो गया है. साथ ही जब नए पोप का चयन किया गया तो वेटिकन में मौजूद 45 हजार से ज्यादा लोगों ने जोरदार ताली बजाकर उनका स्वागत किया.

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मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव

गाजा युद्ध के बीच 13 जून, 2025 को शुरू हुआ इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष करीब 12 दिनों तक चला. इजराइल ने ईरानी सैन्य और परमाणु स्थलों पर हमला करके सबको चौंका दिया था. हालांकि, ईरान ने पहले ही अपने सभी प्रोग्राम को विस्थापित कर दिया और यही वजह रही कि उसको भारी नुकसान नहीं पहुंचा. हालांकि, इजराइल के इस हमले में ईरान के प्रमुख वैज्ञानिक और सैन्य कमांडर मारे गए थे. 200 से अधिक इजराइली लड़ाकू विमानों ने आवासीय इलाकों पर हमला किया.

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43 दिन तक ठप रहा अमेरिकी सिस्टम

अमेरिका में 1 अक्तूबर से शुरू हुआ शटडाउन 43 दिनों तक चला और यह अमेरिका के इतिहास में सबसे लंबा चलने वाला बंद था. इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान 35 दिनों तक सरकारी कामकाज में बाधा हुई थी. शटडाउन के दौरान अमेरिकी लोगों को मिलने वाली फूड स्टैंप (SNAP) सहायता रुक गई. इसके अलावा अमेरिका के एग्रीकल्चर के पास सिर्फ 5 अरब डॉलर का रिजर्व फंड बचा था और नवंबर तक फूड जारी रखने के लिए 9.2 अरब डॉलर की जरूरत थी. इसका सबसे बड़ा असर सरकारी कर्मचारियों पर देखने को मिला था वह लोग 43 दिनों तक छुट्टी पर चले गए थे. साथ ही सेना, पुलिस, बॉर्डर सिक्योरिटी और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर जरूरी कामकाज के लिए तैनात रहने पड़ा. हालांकि, इन लोगों को बिना सैलेरी के काम करना पड़ा. इसके अलावा फूड प्रोग्राम रोक दिया गया. अमेरिका में 4.2 करोड़ लोगों की फूड स्टैंप राशि रोक दी गई, क्योंकि सरकार के पास जरूरी फंड को रोक दिया गया था.

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नेपाल में जेन जी के प्रोटेस्ट से सरकार गिरी

भारत के पड़ोसी देश नेपाल में ज़ेन-जी के प्रोटेस्ट के बाद सरकार का तख्तापलट हो गया. इन विरोध प्रदर्शनों को जेन-जी आंदोलन कहा गया और साल 1997 से 2012 के बीच पैदा हुए लोगों को ‘जेनरेशन ज़ूमर्स’ या ‘जेन ज़ी’ कहते हैं. यह वह पीढ़ी है जो इंटरनेट की दुनिया में पैदा हुई और जब बड़ी हुई तो सोशल मीडिया पर सक्रिय हो गई. साथ कहना गलत नहीं है कि इनके लिए पूरी दुनिया ही सोशल मीडिया बन गई. ऐसे में जब नेपाल सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को प्रतिबंध किया तो युवाओं ने विरोध करना शुरू कर दिया और देखते ही देखते ये प्रदर्शन हिंसा में बदल गया. इस दौरान कई मौतों हो गई और सरकारी इमारतों में भयंकर आग लगा दी गई. इसके बाद ही केपी शर्मा ओली ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. बताया जाता है कि सत्ता के विरोध में युवाओं के मन में गुस्सा बहुत पहले से पल रहा था, खासकर भ्रष्टाचार के प्रति रोष जाग रहा था. लेकिन सोशल मीडिया पर बैन ने इस शांत ज्वालामुखी को फटने पर मजबूर कर दिया.

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Conclusion

साल 2025 का उथल-पुथल रहा और इस दौरान कई ऐसी घटनाएं हुईं जिन्होंने लोगों को काफी प्रभावित किया. इसमें सबसे प्रमुख है- रूस-चीन और भारत भविष्य में क्या एक ऐसा इकोनॉमिक कॉरिडोर तैयार करेंगे जो पश्चिम के सामने एक संतुलन प्लेटफॉर्म बनाएगा. हालांकि, ये तीनों देश BRICS संगठन में शामिल है जिन्होंने एक ऐसा मंच तैयार किया है जिसका काम देश की प्रमुख योजनाओं के लिए पैसा देना और राजनीतिक स्थिरता को बनाए रखना है. इसके बाद नेपाल प्रोटेस्ट जिसने में जेन-जी की तरफ से विरोध प्रदर्शन देखा गया और इसके बाद सवाल खड़े किए गए कि क्या ऐसा आंदोलन चीन और भारत में भी ऐसा देखने को मिल सकता है. वहीं, अक्तूबर में अमेरिका में 43 दिनों सरकारी कामकाज ठप पड़ा रहा और इस दौरान सरकारी कर्मचारियों को 43 दिनों तक फ्री में काम करना पड़ा और अमेरिका के इतिहास में सबसे लंबे समय तक चलने वाला बंद था. इसके अलावा दुनिया भर के देशों को सबसे बड़ा झटका उस वक्त लगा जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आयातित वस्तुओं पर भारी सीमा शुल्क लगा दिया, जिसमें भारत और चीन भी शामिल थे. इस फैसले का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी देखने को मिला, क्योंकि सप्लाई चैन सबसे ज्यादा प्रभावित हुई थीं.

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