Middle East Tension : अमेरिका और इजरायल अभी ईरान पर सीधा हमला नहीं कर रहा है. इसी बीच भारत में मौजूद ईरानी प्रतिनिधि ने वर्तमान की स्थिति को ‘न युद्ध, न शांति’ बताया.
Middle East Tension : मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच अभी सीधा हमला नहीं हो रहा है. साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से मालवाहक जहाज आवाजाही के लिए काफी संघर्ष कर रहे हैं. समुद्री गलियारे से गैस और क्रूड ऑयल की आवाजाही बाधित होने की वजह से दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है. अब गैस और पेट्रोल की कीमतों में भी बेतहाशा वृद्धि होना भी शुरू हो गया है. इसी बीच भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने शनिवार को तेहरान और इजरायरल-अमेरिका के बीच चल रहे तनाव को ‘न युद्ध, न शांति’ की स्थिति बताया.
US पर दबाव क्यों नहीं डाल रहे : इलाही
मजीद हकीम इलाही ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से संघर्ष को तुरंत रोकने की अपील करते हुए कहा कि वैश्विक स्थिरता उन लोगों पर निर्भर करती है जिन्होंने युद्ध शुरू किया था. उन्होंने सवाल उठाया कि युद्ध से प्रभावित और ऊर्जा संकट जूझ रहे देश अमेरिका पर दबाव क्यों नहीं डाल रहे हैं. इलाही ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान यह युद्ध नहीं चाहता था, लेकिन लगातार हमलों के बीच उसे जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ा. हालांकि, ईरान ने कई बार इस युद्ध को रोकने की कोशिश की, लेकिन इसके बाद भी इजरायल ने हमला जारी रखा. उन्होंने आगे कहा कि मुझे नहीं पता है कि इन लोगों और इन देशों (इजरायल और अमेरिका) की क्या हालत है. वह सिर्फ अपनी मर्जी दूसरे देशों पर थोपना चाहते हैं और अब उनसे पूछना चाहते हैं कि उन्हें यह अधिकार किसने दिया?
ऐसे रुकी दोनों देशों के बीच बातचीत
वहीं, युद्ध शुरू होने से पहले ओमान में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत चल रही थी और फिर वह जिनेवा में चली गई. जिनेवा में बातचीत में प्रगति हुई और फिर अचानक हमला करना शुरू कर दिया. इसके बाद दोनों देशों के बीच में बातचीत रूक गई. इलाही ने दावा किया कि इजरायल और अमेरिका के हवाई हमलों में की वजह से ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई, मंत्रियों, कमांडरों और आम नागरिकों की मौत हो गई. साथ ही बहुत सारे आम लोगों की भी मौत हो गई और इस सबसे भयानक एक प्राइमरी स्कूल पर हमला किया, जिसमें 175 मासूम लड़कियों की मौत हो गई.
4 हजार की मौत और 40 हजार लोग हुए घायल
इलाही ने दावा किया है कि अभी तक संघर्ष में 4000 ईरानियों की मौत हुई है और करीब 40 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. इसके अलावा घरों, अस्पतालों, विश्वविद्यालों और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है. वहीं, इंफ्रास्ट्रक्चर भारी नुकसान और भारी संख्या में जान गंवाने के बाद भी ईरान बिना शर्त के साथ लड़ाई को आगे बढ़ा रहा है. साथ ही अमेरिका का भी डटकर सामना किया. इलाही ने कहा कि अमेरिका बिना शर्त के समर्पण चाहता था, लेकिन इन शर्तों को कोई भी देश स्वीकार नहीं कर सकता था.
यह भी पढ़ें- Strait of Hormuz पर ताला और दुनिया का बुरा हाल, पाइपलाइन से बदलेगी खाड़ी की चाल?
News Source: PTI
