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नेपाल चुनाव: RSP लहर के बीच अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे दहल, अपने ही गढ़ में हारे ओली

by Sanjay Kumar Srivastava
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नेपाल चुनाव: RSP लहर के बीच अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे पूर्व PM दहल, अपने ही गढ़ में हारे ओली

Nepal Election: नेपाल में 5 मार्च को हुए आम चुनाव में भाग लेने वाले तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों में से केवल पुष्पकमल दहल ‘प्रचंड’ ही राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) की सुनामी के बीच अपनी सीट जीतने में कामयाब रहे.

Nepal Election: नेपाल में 5 मार्च को हुए आम चुनाव में भाग लेने वाले तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों में से केवल पुष्पकमल दहल ‘प्रचंड’ ही राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) की सुनामी के बीच अपनी सीट जीतने में कामयाब रहे. 2022 में गठित राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) 156 सीटों में से 120 सीटें जीतकर दो-तिहाई जीत की ओर अग्रसर है. इस नई पार्टी ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया, जब RSP के प्रधान मंत्री पद के उम्मीदवार बालेंद्र शाह ‘बालेन’ ने CPN-UML के अध्यक्ष और चार बार के प्रधान मंत्री केपी ओली को झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र में भारी अंतर से हरा दिया, जो वर्षों से उनका और उनकी पार्टी का गढ़ था. 35 वर्षीय बालेन ने 74 वर्षीय ओली के 18,734 वोटों के मुकाबले 68,348 वोट हासिल किए. पूर्वी नेपाल के कोशी प्रांत का निर्वाचन क्षेत्र, जहां पूर्व प्रधान मंत्री वर्षों तक अपराजित रहे थे. भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध को लेकर ओली सरकार के खिलाफ युवाओं के नेतृत्व वाले जेन जेड समूह के दो दिवसीय हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद पिछले साल 9 सितंबर को ओली के इस्तीफे के बाद 5 मार्च को आम चुनाव जरूरी हो गए थे.

हर चुनाव में प्रचंड बदल देते हैं अपनी सीट

बालेन ने ओली से मुकाबला करने के लिए झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र को चुना, जिससे यह रूढ़िवादी पुराने समर्थकों बनाम आशा के नए चेहरे के बीच सीधा मुकाबला हो गया. 71 वर्षीय प्रचंड, जो हर चुनाव में एक नया निर्वाचन क्षेत्र चुनने के लिए जाने जाते हैं, ने 5 मार्च को रुकुम पूर्व से चुनाव लड़ा था. 2007 में प्रचंड ने रोल्पा-2 और काठमांडू-10 से जीत हासिल की थी, फिर 2013 में वह काठमांडू-10 से हार गए लेकिन सिराहा-5 से जीत गए. 2017 में वह चितावन -3 से जीते, फिर 2022 में गोरखा -2 में स्थानांतरित हो गए. पूर्व संसद सदस्य सुनील बाबू पंत ने कहा कि प्रचंड ने सुरक्षित क्षेत्र की तलाश में बार-बार अपना निर्वाचन क्षेत्र बदला और इस बार उन्होंने सुदूर रुकुम पूर्व से चुनाव लड़ा, जो पूर्ववर्ती माओवादी पार्टी के गढ़ों में से एक था. लेकिन यह सिर्फ निर्वाचन क्षेत्र में बदलाव नहीं था जिससे प्रचंड को मदद मिली. चुनाव से कुछ महीने पहले उन्होंने सीपीएन-माओवादी केंद्र को भंग कर दिया, दो दर्जन सीमांत दलों को इसमें विलय करने के बाद पार्टी का नाम बदलकर नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) कर दिया. अब वह नई पार्टी NCP के सह-समन्वयक हैं.

RSP ने दिग्गजों के गढ़ों को किया ध्वस्त

एक अन्य पूर्व प्रधान मंत्री 73 वर्षीय राकांपा के सह-समन्वयक माधव नेपाल, रौतहट -1 में RSP के राजेश कुमार चौधरी से हार गए. प्रगतिशील लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष व पूर्व प्रधान मंत्री 71 वर्षीय बाबूराम भट्टाराई ने गोरखा-2 निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा था, लेकिन बाद में उन्होंने दौड़ से अपना नाम वापस ले लिया. हालांकि, केवल विरासती राजनीतिक दलों के दिग्गजों को ही हार का सामना नहीं करना पड़ा. आरएसपी ने नेपाल की दो बड़ी पार्टियों नेपाली कांग्रेस (एनसी) और सीपीएन-यूएमएल के कई गढ़ों, इलाकों और मुख्य क्षेत्रों को भी ध्वस्त कर दिया. चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, सीपीएन-यूएमएल के लगभग 11 पदाधिकारियों को आरएसपी उम्मीदवारों के हाथों अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा, जबकि आधा दर्जन से अधिक एनसी के दिग्गज भी चुनाव हार गए. सितंबर में ओली सरकार को हटाने के बाद जेन जेड द्वारा चुनाव अभियान से पहले और उसके दौरान उठाए गए प्रमुख मुद्दे भ्रष्टाचार विरोधी, सुशासन, भाई-भतीजावाद का अंत, राजनीतिक नेतृत्व में पीढ़ीगत बदलाव आदि थे. नेपाल समाचारपत्र की पत्रकार सरस्वती कर्माचार्य ने कहा कि हिमालयी राष्ट्र के राजनीतिक नेतृत्व में पीढ़ीगत बदलाव के अलावा भाई-भतीजावाद का अंत हुआ. उन्होंने कहा कि और पार्टियों के साथ-साथ पुराने नेताओं का राजनीतिक भविष्य भी डूब गया.

ये भी पढ़ेंः Nepal में Balendra का स्वैग, पुरानी पार्टियों का सूपड़ा साफ; अब सत्ता की चाबी युवा जोश के हाथ

News Source: PTI

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