Home Latest News & Updates खेत-खलिहान और घर सब दांव पर: क्या अपने ही देश में कैदी बन कर रह जाएंगे इस गांव के लोग?

खेत-खलिहान और घर सब दांव पर: क्या अपने ही देश में कैदी बन कर रह जाएंगे इस गांव के लोग?

by Sanjay Kumar Srivastava 7 June 2026, 4:06 PM IST (Updated 7 June 2026, 4:16 PM IST)
7 June 2026, 4:06 PM IST (Updated 7 June 2026, 4:16 PM IST)
खेत-खलिहान और घर सब दांव पर: क्या अपने ही देश में कैदी बन कर रह जाएंगे इस गांव के लोग?

India-Bangladesh Border: मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित लिंगखोंग गांव के निवासियों ने रविवार को हिंसक विरोध प्रदर्शन किया. जीरो लाइन के बिल्कुल करीब स्थित इस गांव के लोगों की मांग है कि सीमा पर बाड़ लगाने का काम अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा पर ही किया जाना चाहिए. ग्रामीणों की स्पष्ट मांग है कि सरकार को बाड़ को 150 गज अंदर लगाने की बजाय सीधे जीरो लाइन (अंतर्राष्ट्रीय सीमा रेखा) पर खड़ा करना चाहिए. ऐसा करने से उनका पूरा गांव और जमीन सुरक्षित रूप से भारतीय बाड़ के अंदर (सुरक्षित क्षेत्र के अंदर) आ जाएगी और वे अपने ही देश में अलग-थलग होने से बच जाएंगे. ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत जीरो लाइन से 150 गज की दूरी पर बाड़ लगाई गई, तो उनका पूरा गांव देश के बाकी हिस्सों से पूरी तरह से कट जाएगा.

भविष्य को लेकर चिंतित हैं ग्रामीण

प्रदर्शनकारियों ने पिनुरस्ला के उपमंडल अधिकारी (एसडीओ) को एक ज्ञापन सौंपकर चल रहे स्थायी बाड़ निर्माण कार्य को तत्काल रोकने की मांग की है ताकि उनका अस्तित्व सुरक्षित रह सके. ग्राम प्रधान रामू ने पीटीआई-भाषा को बताया कि हम सीमा पर बाड़ लगाने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हम चाहते हैं कि बाड़ शून्य रेखा (Zero Line) पर लगाई जाए ताकि हमारा गांव भारत के अंदर और बाड़ वाले क्षेत्र के भीतर रहे. स्थानीय रीमा खोंग्सदिर ने कहा कि यदि बाड़ अपने वर्तमान मार्ग रेखा में आती है, तो हमारा गांव बाहर रह जाएगा. हम अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं और चाहते हैं कि राज्य सरकार हमारी चिंताओं को सुने और उसे भारत सरकार के सामने उठाए.

अधिकारियों ने कहा कि भारत-बांग्लादेश सीमा को सुरक्षित करने के लिए सीमा पर बाड़ का निर्माण जारी है. मेघालय की बांग्लादेश के साथ 444 किमी लंबी सीमा है, जिसका 80 किमी से भी कम हिस्सा स्थानीय मुद्दों और कठिन इलाके के कारण बाड़ रहित है. सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि निवासियों को सुरक्षा और सहायता प्रदान करने के लिए लिंगखोंग में पहले ही एक चौकी स्थापित की जा चुकी है.

उन्होंने कहा कि गांव में बीएसएफ की मौजूदगी है और निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं. गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत ने बांग्लादेश के साथ उन क्षेत्रों में शून्य रेखा के साथ एकल पंक्ति बाड़ बनाने का मुद्दा उठाया है जहां मानव बस्तियों के प्रभावित होने की संभावना है.

जीरो लाइन के मुहाने पर स्थित है लिंगखोंग गांव

अधिकारी ने कहा कि जीरो लाइन पर सिंगल लाइन बाड़ लगाने के प्रस्ताव पर बातचीत शुरू हो गई है. हालांकि, बांग्लादेश में नई सरकार ने अभी तक इस मामले पर निर्णय नहीं लिया है. मेघालय के लिंगखोंग गांव में चल रहे विरोध प्रदर्शन के संदर्भ में ‘जीरो लाइन’ का सीधा मतलब वास्तविक अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा से है. यह एक चिह्नित कानूनी रेखा है जो आधिकारिक तौर पर भारत और बांग्लादेश के भौगोलिक क्षेत्रों को अलग करती है. लिंगखोंग गांव बिल्कुल जीरो लाइन के मुहाने पर स्थित है.

यदि भारत सरकार नियमानुसार जीरो लाइन के 150 गज के अंदर भारतीय सीमा में बाड़ लगा देती है तो यह पूरा गांव तथा ग्रामीणों के घर/खेत इस बाड़ के दूसरी तरफ (बाहरी तरफ) रह जाएंगे. तकनीकी रूप से वे भारत का हिस्सा होंगे और सुरक्षा के लिए बीएसएफ द्वार होंगे. लेकिन अपने ही देश के मुख्य हिस्से में जाने के लिए उन्हें दैनिक सुरक्षा जांच और द्वारों पर निर्भर रहना पड़ेगा.

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News Source: PTI

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