Home अंतरराष्ट्रीय फिलिस्तीनी ट्रक के हमले में Israel में भारतीय मूल के सैनिक की मौत, संदिग्ध की हुई पहचान

फिलिस्तीनी ट्रक के हमले में Israel में भारतीय मूल के सैनिक की मौत, संदिग्ध की हुई पहचान

by Divyansh Sharma 12 September 2024, 3:10 PM IST (Updated 12 September 2024, 6:35 PM IST)
12 September 2024, 3:10 PM IST (Updated 12 September 2024, 6:35 PM IST)
फिलिस्तीनी ट्रक के हमले में Israel में भारतीय मूल के सैनिक की मौत, संदिग्ध की हुई पहचान- Live Times

Israel Hamas War: भारतीय मूल के इजराइली सैनिक सार्जेंट गेरी गिदोन हंगल भारत से आकर साल 2020 में इजराइल के नोफ हागलिल में बस गए थे.

Israel Hamas War: इजराइल और हमास के बीच भीषण जंग जारी है. इस बीच जानकारी सामने आ रही है कि एक आतंकी हमले में भारतीय मूल के इजराइली सैनिक की मौत हो गई. इजराइली सेना से मिली जानकारी के मुताबिक, भारतीय मूल के इजराइली सैनिक सार्जेंट गेरी गिदोन हंगल भारत से आकर साल 2020 में इजराइल के नोफ हागलिल में बस गए थे. स्टाफ सार्जेंट गेरी गिदोन हंगल केफिर ब्रिगेड की नहशोन बटालियन में एक सैनिक थे.

गार्ड पोस्ट से जा भिड़ा फिलिस्तीनी नंबर वाला ट्रक

आसफ जंक्शन के पास बुधवार को फिलिस्तीनी लाइसेंस प्लेट वाला ट्रक व्यस्त राजमार्ग से हटकर बस स्टॉप के पास स्थित इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) की गार्ड पोस्ट से जा भिड़ा. गार्ड पोस्ट में उस वक्त सार्जेंट गेरी गिदोन हंगल मौजूद थे. टक्कर इतनी तेज थी कि गेरी गिदोन हंगल की मौत हो गई. हमले के CCTV फुटेज भी सामने आ गए हैं. इजरायली सुरक्षा सूत्रों ने संदिग्ध का नाम 58 वर्षीय हायल धैफल्लाह बताया है. वह मध्य पश्चिमी तट के पास रफत शहर का रहने वाला है. उन्होंने बताया कि भारतीय मूल के इजराइली सैनिक सार्जेंट गेरी गिदोन हंगल का अंतिम संस्कार गुरुवार को किया जाएगा. इस हमले की जिम्मेदारी हमास ने ली है. इजराइल ने कहा है कि सेना पश्चिमी तट पर अपने आतंक विरोधी अभियानों को बढ़ा रहा है, उसका दावा है कि ईरान समर्थित समूह जॉर्डन से हथियारों की तस्करी कर रहे हैं और इजराइली में हमले की कोशिश कर रहे हैं.

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साल 2020 में इजराइल आए थे गेरी गिदोन हंगल

गेरी गिदोन हंगल साल 2020 में भारत के उत्तरपूर्वी हिस्से से इजराइल में आकर बस गए थे. वह बनेई मेनाशे जनजाति से ताल्लुक रखते थे. भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों मणिपुर और मिजोरम से आने वाले बनेई मेनाशे के बारे में माना जाता है कि वह प्राचीन काल की खोई हुई जनजातियों में से एक हैं और बनेई मेनाशे इजराइली जनजाति के वंशज हैं. बनेई मेनाशे के लगभग 300 युवा मौजूदा युद्ध के दौरान सेना की ड्यूटी कर रहे हैं. इनमें से अधिकांश लड़ाकू इकाइयों में सेवारत हैं. सेफर्डिक चीफ रब्बी श्लोमो अमर ने साल 2005 में उन्हें मेनशेश के वंशज घोषित किया. बनेई मेनाशे समुदाय के लगभग 5 हजार सदस्यों के बारे में कहा जाता है कि वह पिछले पांच वर्षों में इजराइल में प्रवास कर चुके हैं. इनमें से लगभग 1,500 सदस्य हैं. 5,500 अभी भी भारत में रहते हैं और प्रवास की प्रतीक्षा कर रहे हैं.

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