NEET Controversy : NEET पेपर लीक पर सवालों को लेकर संसद में सियासी टकराव लगातार तेज होता जा रहा है. इसकी वजह से लगातार चौथे दिन संसद के दोनों सादनों की कार्यवाही अवरुद्ध रही और किसी बिल पर चर्चा नहीं सकी. एक तरफ सरकार दोनों सदनों में चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष ने बहस से पहले नई शर्त रख दी है. कांग्रेस के साथ अब अन्य विपक्षी दल भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ गए हैं. ऐसे में संसद में गतिरोध टूटने के आसार फिलहाल कम नजर आ रहे हैं.
जतर -मन्त्रर से लेकर संसद तक गतिरोध जारी
मानसून सत्र में NEET पेपर लीक का मुद्दा सबसे बड़ा राजनीतिक टकराव बन गया है. हालात ये मानसून सत्र में NEET पेपर लीक का मुद्दा सबसे बड़ा राजनीतिक टकराव बन गया है. हालात ये हैं कि सत्र शुरू होने से पहले NDA और INDIA ब्लॉक अपनी अपनी मंगों के समर्थन में आमने सामने तक आ गए. दोनों ओर से जमकर नारेबाजी की गई. इस नारेबाजी में कांग्रेस की नेत्री प्रियंका गांधी वाड्रा काफी आक्रमक दिखीं.
कार्यवाही शुरू होते ही हंगामा हुआ शुरू
यह हाल तो सांसद भवन के बाहर का था. लेकिन जैसे ही सदन की करवाई शुरु हुई , एक बार फिर दोनों सदनों में जबरदस्त हंगामा शुरू हो गया. इधर दो दिन के बाद सरकार लोकसभा और राज्यसभा दोनों में चर्चा के लिए तो तैयार हो गई. लेकिन विपक्ष चर्चा शुरू होने से पहले ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ गई है. कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक सामान्य चर्चा का कोई मतलब नहीं है.
विपक्ष की मांग है कि राज्यसभा में नियम 267 के तहत और लोकसभा में 377 के तहत चर्चा कराई जाए, जिसके तहत सदन के तय कामकाज को स्थगित कर इस मुद्दे पर तत्काल बहस होती है. विपक्ष का दावा है कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इतने बड़े मामले में केवल चर्चा नहीं, बल्कि जवाबदेही भी तय होनी चाहिए. इसलिए शिक्षा मंत्री की नैतिक जिम्मेदारी तय करते हुए उनका इस्तीफा जरूरी है. अब इस मुद्दे पर कांग्रेस के साथ अन्य विपक्षी दलों ने भी समर्थन जताना शुरू कर दिया है और इस्तीफे की मांग को और मुखर बना दिया है.
आरोपों का जबरदस्त रूप से प्रतिबाद किया
दूसरी ओर सरकार और एनडीए के घटक दलों ने विपक्ष के आरोपों का जबरदस्त रूप से प्रतिबाद किया. सरकार ने साफ साफ कहा कि वह किसी भी मुद्दे पर चर्चा से नहीं भाग रही है. सरकार का आरोप है कि विपक्ष बहस से बचने के लिए नई-नई शर्तें रख रहा है और सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है। सरकार का कहना है कि यदि विपक्ष चर्चा चाहता है तो बिना शर्त सदन चलने देना चाहिए.
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