Home Top News ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए US को करना होगा इन चुनौतियों का सामना? अब ट्रंप ने दिया ये बयान

ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए US को करना होगा इन चुनौतियों का सामना? अब ट्रंप ने दिया ये बयान

by Sachin Kumar
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US could take over Greenland

Greenland Controversy : राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वह ग्रीनलैंड के बारे में कुछ करने जा रहे हैं और चाहे ये किसी को पसंद हो या नहीं. साथ ही अगर यह लक्ष्य आसान तरीके से नहीं होता है तो मुश्किल तरीके से प्राप्त किया जाएगा.

Greenland Controversy : वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को कैद करने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की नजर ग्रीनलैंड पर है. वह बार-बार अपने भाषण में कहते रहे हैं कि अमेरिका ग्रीनलैंड लेना चाहता है. साथ ही अमेरिका को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और खनिज से भरपूर इस द्वीप पर कंट्रोल करना चाहिए, जो NATO सहयोगी डेनमार्क का एक सेमी-ऑटोनॉमस क्षेत्र है. साथ ही डेनमार्क, ग्रीनलैंड और अमेरिका के अधिकारियों ने गुरुवार को वाशिंगटन में मुलाकात की और व्हाइट हाउस की नई कोशिश पर चर्चा करने के लिए अगले हफ्ते फिर से मिलने के बात कही है. इसके अलावा व्हाइट हाउस इस द्वीप पर कब्जा करने के लिए मिलिट्री फोर्स के साथ दूसरे विकल्पों पर लगातार विचार कर रहा है.

अमेरिका का स्पष्ट संदेश

राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि वह ग्रीनलैंड के बारे में कुछ करने जा रहे हैं और चाहे ये किसी को पसंद हो या नहीं. उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अगर यह आसान तरीके से नहीं होता है तो मुश्किल तरीके से प्राप्त किया जाएगा. हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि वह क्या करने वाले हैं और इसका पूरा अर्थ क्या है? द न्यूयॉर्क टाइम्स को ट्रंप ने बताया कि वह ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाना चाहते हैं क्योंकि किसी जगह पर मालिकाना हक ऐसी चीजें और तत्व देता है जो आप सिर्फ एक डॉक्यूमेंट पर साइन करके हासिल नहीं कर सकते हैं. दूसरी तरफ ट्रंप और उनके अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वह बिजनेस और माइनिंग डील करने के लिए ग्रीनलैंड को कंट्रोल करना चाहते हैं.

57 हजार लोगों वाले द्वीप नहीं कोई सेना

कहा जा रहा है कि अगर अमेरिका ग्रीनलैंड पर जबरदस्ती कब्जा कर लेता है तो ये NATO के एक बड़े संकट में फंस जाएगा, शायद अस्तित्व के संकट में आ जाए. साथ ही ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है और इसकी आबादी करीब 5700 हजार है और इसकी कोई अपनी पर्सनल सेना भी नहीं है. रक्षा डेनमार्क करता है, जिसकी सेना अमेरिकी की सेना के मुकाबले बहुत छोटी है. यह साफ नहीं है कि अगर अमेरिका जबरदस्ती द्वीप पर कंट्रोल करने का फैसला करता है तो NATO के बाकी सदस्य कैसे प्रतिक्रिया देंगे या वे डेनमार्क की मदद के लिए आएंगे या नहीं.

अमेरिका के दावे पर डेनमार्क का जवाब

वहीं, डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने कहा कि अगर अमेरिका किसी दूसरे NATO देश पर मिलिट्री हमला करने की कोशिश करता है तो सब कुछ रुक जाएगा. दूसरी तरफ ट्रंप का कहना है कि अमेरिकी सुरक्षा की गारंटी के लिए द्वीप पर कंट्रोल चाहिए, उन्होंने इस इलाके में रूसी और चीनी जहाजों से खतरे का हवाला दिया है, लेकिन आर्कटिक की इंटरनेशनल पॉलिटिक्स की एक्सपर्ट लिन मोर्टेंसगार्ड ने कहा कि यह बिल्कुल भी सच नहीं है. उन्होंने कहा कि शायद रूसी पनडुब्बियां हैं लेकिन पूरे आर्कटिक क्षेत्र में है लेकिन कोई भी सतह का जहाज नहीं है. इसके अलावा चीन के पास सेंट्रल आर्किटकल महासागर में रिसर्च का जहाज है और दोनों देशों की सेनाओं ने आर्कटिक में जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज की हैं, लेकिन वह अलास्का के करीब हुई हैं.

यह भी पढ़ें- मादुरो के बाद वेनेजुएला के तेल पर ट्रंप का कब्जा, अमेरिकी कंपनियां करेंगी 100 बिलियन का निवेश!

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