Basant Panchami Shubh Muhurat: बसंत पंचमी का त्योहार हर साल माघ महीने की पंचमी तिथि को मनाया जाता है. यहां जानें इसकी सही तारीख और शुभ मुहूर्त क्या है.
10 January, 2026
Basant Panchami Shubh Muhurat: सनातन धर्म में बसंत पंचमी का बहुत महत्व है. बसंत पंचमी का त्योहार हर साल माघ महीने की पंचमी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन ज्ञान, संगीत और कला की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है.इस दिन स्कूल और कला के संस्थानों में देवी सरस्वती की पूजा की जाती है और सभी लोग ज्ञान और कला पाने के लिए प्रार्थना करते हैं. लोग अपने सरस्वती की मूर्ति की स्थापना करते हैं, इसलिए कई दिनों पहले से ही बाजार में हलचल शुरू हो जाती है. कई लोगों को बसंत पंचमी की सही तारीख के बारे में नहीं पता होता है. यहां बसंत पंचमी की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में बताया गया है.

बसंत पंचमी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी सरस्वती का जन्म माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को हुआ था। इस दिन को देवी सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। बसंत पंचमी से बसंत ऋतु की शुरुआत होती है। बसंत पंचमी का दिन सभी शुभ कामों के लिए शुभ माना जाता है। इसी वजह से बसंत पंचमी के दिन को अबूझ मुहूर्त के रूप में जाना जाता है। नई पढ़ाई शुरू करना, नई नौकरी शुरू करना, मुंडन संस्कार, अन्नप्राशन संस्कार, गृह प्रवेश समारोह या कोई भी अन्य शुभ काम बसंत पंचमी पर करना बहुत शुभ माना जाता है।
कब है बसंत पंचमी
पांचांग के अनुसार, बसंत पंचमी की तिथि 23 जनवरी को अर्धरात्रि 2 बजकर 28 मिनट पर शुरू होगी और 24 जनवरी को अर्धरात्रि को 1 बजकर 46 मिनट पर खत्म होगी. इसलिए बसंत पंचमी 23 जनवरी को मनाई जाएगी. वहीं इसके शुभ मुहूर्त की बात करें तो सरस्वती पूजा के लिए सबसे शुभ समय सुबह 7 बजकर 15 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा. माना जाता है कि सही मुहूर्त में पूजा करने से सही फल मिलता है.

पूजन विधि
बसंत पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें और मंदिर को भी साफ करें. इस दिन पीले वस्त्र पहनें. एक चौकी पर माता सरस्वती की तस्वीर या मूर्ति को पीला वस्त्र बिछाकर उस पर स्थापित करें. मां के सामने घी का दीपक जलाएं और पीले चंदन से टीका लगाएं. पीले फूल अर्पित करें, हलवा और पीले रंग की मिठाई को भोग लगाएं.मां को पीली साड़ी और श्रृंगार अर्पित करें. इसके बाद “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का जाप करें या सरस्वती माता की आरती कर लें. अंत में मां से ज्ञान और सफलता मांगते हुए प्रार्थना करें. पूजा में पूरे परिवार के साथ बैठने से सभी को सद्बुद्धि मिलती है.
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