US Sanctions On Russia: अमेरिका ने ईरान और रूस से तेल खरीदने के लिए सेंक्शन में राहत दी थी, जो 11 अप्रैल को खत्म हो गई. अब US ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने इस छूट को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है
16 April, 2026
भारत अब रूस और ईरान से तेल नहीं खरीद पाएगा. अमेरिका के प्रतिबंध एक बार फिर से लागू हो चुके हैं. मिडिल ईस्ट विवाद की वजह से ज़्यादातर देशों में तेल संकट को देखते हुए, अमेरिका ने ईरान और रूस से तेल खरीदने के लिए सेंक्शन में राहत दी थी, जो 11 अप्रैल को खत्म हो गई. अब अमेरिका ने इसे और आगे बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया है. US ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बुधवार (15 अप्रैल) को घोषणा की कि वॉशिंगटन उन सेंक्शन में राहत को नहीं बढ़ाएगा जो देशों को रूस और ईरान से एनर्जी खरीदने की इजाजत देती है.
US ट्रेजरी सेक्रेटरी ने क्या कहा?
स्कॉट बेसेंट ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ-साफ कहा कि यह छूट सिर्फ उन तेल शिपमेंट पर लागू होती है जो 11 मार्च से पहले समुद्र में थे और अब इस्तेमाल हो चुके हैं. US के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने ईरान के खिलाफ बढ़ते इकोनॉमिक प्रेशर की चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि यह कदम ईरान के खिलाफ फाइनेंशियल बमबारी जैसा होगा और ईरान के खिलाफ कड़ी इकोनॉमिक कार्रवाई की जाएगी. पिछले महीने छूट का ऐलान करते हुए, US के ट्रेजरी सेक्रेटरी ने कहा था कि US के पास ग्लोबल कीमतों पर असर डालने के कई ऑप्शन हैं और जरूरत पड़ने पर वे घरेलू रिजर्व का भी इस्तेमाल कर सकते हैं
30 दिन की छूट खत्म
5 मार्च को US ने यूक्रेन युद्ध की वजह से लगे बैन के बावजूद, भारत समेत कई देशों को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दी थी. यह छूट 12 मार्च को लागू की गई ताकि भारतीय रिफाइनर पहले से लोड किया हुआ रूसी तेल खरीद सकें. 11 अप्रैल की अवधि खत्म हो गई. US ने अब इस छूट को बढ़ाने से मना कर दिया है. US ने इस टेम्पररी छूट को ग्लोबल एनर्जी की कीमतों, खासकर कच्चे तेल को स्थिर करने के लिए एक जरूरी कदम बताया था. फरवरी के आखिर में, US-ईरान झगड़े की वजह से तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर चली गई थीं.
छूट के दौरान तीन गुना बढ़ी खरीद
मार्च में रूस से भारत की क्रूड ऑयल की खरीद तीन गुना से ज़्यादा बढ़कर 5.3 बिलियन यूरो हो गई, क्योंकि तेल की कीमतों में उछाल ने इंपोर्ट बिल बढ़ा दिया. यूरोपियन थिंक टैंक सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) ने एक रिपोर्ट में कहा गया कि “मार्च 2026 में भारत रूसी फॉसिल फ्यूल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार था, जिसने कुल EUR 5.8 बिलियन के रूसी हाइड्रोकार्बन इंपोर्ट किए. भारत की खरीद में क्रूड ऑयल प्रोडक्ट्स का हिस्सा 91 परसेंट था, जो कुल EUR 5.3 बिलियन था.” उनके महीने के बाकी इंपोर्ट में कोयला (EUR 337 मिलियन) और तेल प्रोडक्ट्स (EUR 178.5 मिलियन) शामिल थे. फरवरी में, भारत तीसरा सबसे बड़ा इंपोर्टर था, जिसने 1.8 बिलियन यूरो के रूसी हाइड्रोकार्बन खरीदे.
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News Source: PTI
