Andaman Sea Accident: अंडमान सागर में एक बड़ा हादसा हुआ है. बांग्लादेश से मलेशिया जा रहा जहाज समुद्र में पलट गया, जिससे 250 लोग लापता हो गए.
Andaman Sea: अंडमान सागर में एक बड़ा हादसा हुआ है. बांग्लादेश से मलेशिया जा रहा जहाज समुद्र में पलट गया, जिससे 250 लोग लापता हो गए. लापता लोगों में रोहिंग्या शरणार्थी और बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं. बताया जाता है कि खराब मौसम और तेज हवा के कारण चालक दल ने जहाज से नियंत्रण खो दिया, जिससे जहाज समुद्र में डूब गया. इस बीच 9 अप्रैल को बांग्लादेशी ध्वज वाहक जहाज ‘एमटी मेघना प्राइड’ ने नौ लोगों को समुद्र में तैरते हुए बचाया. बचाए गए लोगों में तीन रोहिंग्या और छह बांग्लादेशी शामिल हैं. संयुक्त राष्ट्र ने इस पर गहरी चिंता जताई है.
जहाज में क्षमता से अधिक थे यात्री
अधिकारियों ने बताया कि जहाज में क्षमता से अधिक यात्री सवार थे, जिसके चलते चालक दल ने जहाज पर से नियंत्रण खो दिया और दुर्घटनाग्रस्त हो गया. बांग्लादेश तटरक्षक प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कॉम. सब्बीर आलम सुजान ने बुधवार को एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि तीन रोहिंग्या और छह बांग्लादेशियों सहित नौ लोगों को 9 अप्रैल को बचाया गया था. संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त ने मंगलवार को कहा कि जहाज दक्षिणी बांग्लादेशी जिले कॉक्स बाजार के टेकनाफ से बड़ी संख्या में यात्रियों को लेकर मलेशिया के लिए रवाना हुआ था. अंडमान सागर में एक बड़े हादसे के बीच एक निजी मालवाहक जहाज ने नौ रोहिंग्या शरणार्थियों की जान बचाई है.
9 को सुरक्षित निकाला
एमटी मेघना प्राइड नामक जहाज बांग्लादेश के चटगांव से इंडोनेशिया जा रहा था. इस दौरान चालक दल ने अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में फंसे 9 लोगों को देखा और उन्हें सुरक्षित निकाला. तटरक्षक अधिकारियों ने बताया कि यह बचाव कार्य किसी आधिकारिक खोज अभियान का हिस्सा नहीं था, क्योंकि घटनास्थल बांग्लादेशी क्षेत्र से बाहर था. बचाए गए शरणार्थियों को टेकनाफ में स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया गया है. इस घटना पर संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने गहरी चिंता व्यक्त की है.
रोजगार के लिए जा रहे थे मलेशिया
एजेंसियों का कहना है कि रोहिंग्या समुदाय लंबे समय से विस्थापन का दंश झेल रहा है और अभी तक उसका स्थाई समाधान नहीं हुआ है. जिसकी वजह से वे हादसे का शिकार हुए हैं. म्यांमार के राखीन राज्य में जारी हिंसा और शरणार्थी शिविरों में घटती मानवीय सहायता, शिक्षा व रोजगार के अभाव ने इन लोगों को जोखिम भरी समुद्री यात्राएं करने पर मजबूर कर दिया है. जीवित बचे लोगों में से एक रफीकुल इस्लाम ने एएफपी को बताया कि बचाए जाने से पहले वह लगभग 36 घंटे तक तैरता रहा. उसने कहा कि वह जहाज से गिरे तेल से जल गया था. 40 वर्षीय व्यक्ति ने कहा कि मलेशिया में नौकरी के वादे ने ही उसे जहाज पर चढ़ने के लिए प्रेरित किया.
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News Source: PTI
